हिमालय में ग्लेशियल लेक आउट बर्स्ट फ्लड (GLOF) का खतरा
अध्ययन के मुख्य बिंदु
भारतीय भूवैज्ञानिक संस्थानों की नई रिसर्च में 221 महत्वपूर्ण ग्लेशियल झीलों की पहचान की गई है, जिनके फटने पर अचानक बाढ़ का खतरा बना रहता है।
संवेदनशील नदी घाटियां
कोसी, यारलुंग जांगबो, मानस, ऊपरी सिंधु, चिनाब, झेलम, तीस्ता और व्यास नदी घाटियों को सबसे संवेदनशील माना गया है। इन घाटियों में 39 जिलों के 6 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों पर बाढ़ का असर पड़ सकता है।
हैंगिंग ग्लेशियर का जोखिम
उत्तराखंड के अलकनंदा बेसिन में 219 हैंगिंग ग्लेशियर मिले हैं, जिनका कुल क्षेत्रफल 71.7 वर्ग किमी है। इनमें 0.74 घन किमी अस्थिर बर्फ है, और 68% अस्थिर बर्फ छोटे ग्लेशियरों में निहित है।
डेटा और आँकड़े
491 साल में 254 बार ग्लेशियल झीलें फटी हैं। अलकनंदा बेसिन में 848 ग्लेशियर हैं, जिनमें 219 हैंगिंग ग्लेशियर हैं। विष्णुगंगा में 69 हैंगिंग ग्लेशियर मिले हैं, जिनका क्षेत्रफल 28.21 वर्ग किमी है।
निगरानी और बचाव के उपाय
वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रत्येक हैंगिंग ग्लेशियर को खतरे के स्तर के अनुसार निगरानी की जानी चाहिए। सैटेलाइट imagery, रडार, कैमरे, डॉप्लर रडार और बर्फ के भीतर की हलचल की निगरानी की जा सकती है, जिससे समय पर सड़क बंद करने और लोगों को सुरक्षित स्थान भेजा जा सके।
Sharad Shrivastava