ईरान में उग्र प्रदर्शन के बीच अमेरिका और इजराइल को कड़े पलटवार की धमकी
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के तीसरे हफ्ते में पहुंचने के साथ ही हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। एक ओर प्रदर्शन तेज होते जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ईरानी नेतृत्व ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ सख्त बयानबाजी बढ़ा दी है।
ईरानी संसद में ‘डेथ टू अमेरिका’ के नारे, हमले पर पलटवार की धमकी
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर कलीबाफ ने संसद के लाइव सत्र के दौरान चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो इलाके में मौजूद सभी अमेरिकी मिलिट्री बेस, जहाज और इजराइल ईरान के निशाने पर होंगे। इस दौरान संसद में मौजूद सांसद ‘डेथ टू अमेरिका’ के नारे लगा रहे थे। कलीबाफ ने सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई की सराहना की और कहा कि गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों के साथ बेहद सख्ती से निपटा जाएगा तथा उन्हें कड़ी सजा दी जाएगी।
प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की तैयारी, मौत की सजा तक की चेतावनी
ईरान में दो से ज्यादा हफ्तों से जारी प्रदर्शनों पर सरकार का रुख लगातार कठोर होता जा रहा है। अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने कहा कि प्रदर्शनों में शामिल लोगों को ‘खुदा का दुश्मन’ माना जा सकता है, जिसके तहत मौत की सजा भी दी जा सकती है। टाइम मैगजीन के हवाले से कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत की बात सामने आई है, जबकि न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक 2600 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
ट्रम्प को ईरान पर सैन्य विकल्पों की ब्रीफिंग, प्रदर्शनकारियों को समर्थन
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी अधिकारियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ईरान पर संभावित सैन्य हमलों के विकल्पों पर ब्रीफिंग दी है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यदि ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों पर कठोर कार्रवाई करती है तो ट्रम्प सैन्य कदम पर गंभीरता से विचार कर सकते हैं, हालांकि अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान ‘आजादी की ओर देख रहा है’ और अमेरिका मदद के लिए तैयार है।
ईरानी राष्ट्रपति का आरोप, अमेरिका और इजराइल दंगे भड़का रहे
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने टेलीविजन इंटरव्यू में आरोप लगाया कि अमेरिका और इजराइल देश में दंगे भड़कारकर अराजकता फैलाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की बात सुनेंगे, लेकिन दंगाइयों और आतंकवादियों को समाज को तबाह करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। पजशकियान ने नागरिकों से अपील की कि वे दंगाइयों से दूर रहें।
इजराइल हाई अलर्ट पर, अमेरिकी दखल पर चर्चा
अमेरिका द्वारा ईरान पर संभावित हमले की आशंका के बीच इजराइल हाई अलर्ट पर चला गया है। रॉयटर्स के अनुसार, इजरायली सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है। रिपोर्टों के मुताबिक, जून में ईरान और इजराइल के बीच 12 दिन की जंग हो चुकी है, जिसमें अमेरिका ने इजराइल के साथ मिलकर हवाई हमले किए थे। हाल ही में इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच फोन पर बातचीत हुई, जिसमें ईरान में अमेरिकी दखल की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
ब्रिटेन में ईरानी दूतावास पर पुराना झंडा फहराया, गिरफ्तारियां
लंदन में ईरानी दूतावास के बाहर भी प्रदर्शन हुए, जहां एक प्रदर्शनकारी ने इस्लामी गणराज्य का झंडा हटाकर 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले इस्तेमाल होने वाला शेर और सूरज के चिन्ह वाला तिरंगा झंडा फहरा दिया। यह झंडा शाह के शासनकाल के दौरान प्रयोग होता था। प्रदर्शन के दौरान ‘डेमोक्रेसी फॉर ईरान’ और ‘फ्री ईरान’ जैसे नारे लगाए गए। पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी और इस घटना के सिलसिले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि एक अन्य संदिग्ध की तलाश जारी है।
क्राउन प्रिंस रजा पहलवी की अपील, देश लौटने की तैयारी
ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने वीडियो संदेश जारी कर लोगों से सड़कों पर डटे रहने की अपील की है। उन्होंने नागरिकों से कहा कि वे समूह में मुख्य सड़कों पर रहें और जोखिम भरी गलियों से दूर रहें। पहलवी का दावा है कि लगातार प्रदर्शनों से सुप्रीम लीडर अली खामेनेई का दमनकारी तंत्र कमजोर हुआ है और कई सुरक्षा कर्मियों ने जनता के खिलाफ कार्रवाई से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए तैयार रहने की बात कही है।
रजा पहलवी ने यह भी बताया कि वे लगभग 50 साल के निर्वासन के बाद देश लौटने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि वे कथित ‘राष्ट्रीय क्रांति’ की संभावित सफलता के समय जनता के साथ खड़े हो सकें। सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा कि उन्हें भरोसा है कि यह दिन अब ज्यादा दूर नहीं है।
आर्थिक संकट और शासन से असंतोष, क्राउन प्रिंस को विकल्प के रूप में देखा जा रहा
1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान में धार्मिक शासन स्थापित हुआ और पहले अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी तथा बाद में अयातुल्ला अली खामेनेई सुप्रीम लीडर बने। लंबे समय से जारी आर्थिक संकट, महंगाई, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, बेरोजगारी और मुद्रा की गिरावट के चलते लोगों में गहरा असंतोष है। कई प्रदर्शनकारी रजा पहलवी को धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में देख रहे हैं और उनकी वापसी की मांग कर रहे हैं। युवाओं और जेनरेशन जेड को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में आर्थिक स्थिरता, वैश्विक स्वीकार्यता और व्यक्तिगत आजादी बढ़ सकती है।
रियाल की ऐतिहासिक गिरावट और महंगाई से जनाक्रोश
ईरान की आर्थिक बदहाली ने आम लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर लगभग 1.45 मिलियन प्रति अमेरिकी डॉलर के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गई, जबकि साल की शुरुआत से इसकी कीमत लगभग आधी हो चुकी है। महंगाई चरम पर है, खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगभग 72% और दवाओं में 50% तक वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही 2026 के बजट में 62% कर वृद्धि के प्रस्ताव ने लोगों के गुस्से को और भड़का दिया है।
खामेनेई की चेतावनी: विदेशी भाड़े के लोग बर्दाश्त नहीं
देशभर में चल रहे प्रदर्शनों के बीच सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ईरान उन ‘विदेशियों के लिए काम करने वाले भाड़े के लोगों’ को सहन नहीं करेगा, जो देश में हिंसा भड़का रहे हैं। खामेनेई के अनुसार, कुछ उपद्रवी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को खुश करना चाहते हैं, लेकिन ईरान की एकजुट जनता अपने दुश्मनों को हराएगी। उन्होंने ट्रम्प से कहा कि वे ईरान के मामलों में दखल देने के बजाय अपने देश की समस्याओं पर ध्यान दें। खामेनेई ने यह भी जोर दिया कि इस्लामिक रिपब्लिक कई लोगों की कुर्बानियों के बाद स्थापित हुई है और उसे खत्म करने की कोशिशों के आगे पीछे नहीं हटेगी।
तेल पर निर्भर अर्थव्यवस्था और बढ़ता व्यापार घाटा
ईरान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर निर्भर है। वर्ष 2024 में देश का कुल निर्यात करीब 22.18 बिलियन डॉलर रहा, जबकि आयात 34.65 बिलियन डॉलर था, जिससे 12.47 बिलियन डॉलर का व्यापार घाटा हुआ। प्रतिबंधों और तेल निर्यात में कमी के कारण 2025 में यह घाटा लगभग 15 बिलियन डॉलर तक बढ़ गया है। मुख्य व्यापारिक साझेदारों में चीन, तुर्की, यूएई और इराक शामिल हैं, और चीन को जाने वाले ईरान के तेल निर्यात का हिस्सा बहुत बड़ा है।
ईरान ने पड़ोसी देशों और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ व्यापार बढ़ाने, इंस्टक कॉरिडोर और चीन के साथ नए ट्रांजिट रूट्स जैसे उपायों की कोशिश की है, लेकिन 2025 में जीडीपी वृद्धि के सिर्फ 0.3% रहने का अनुमान है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिबंध हटे बिना या परमाणु समझौते की बहाली के बिना व्यापार और रियाल की कीमत को स्थिर करना मुश्किल रहेगा।
ट्रम्प का दावा: मशहद पर प्रदर्शनकारियों का कब्जा
संबंधित घटनाक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान के दूसरे सबसे बड़े और सबसे बड़े धार्मिक शहर मशहद पर प्रदर्शनकारियों ने कब्जा कर लिया है। यह शहर तुर्कमेनिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा के पास स्थित है और इसकी आबादी लगभग 40 लाख बताई जाती है। इस दावे के बीच ईरान के अंदर राजनीतिक संकट, आर्थिक बदहाली और अंतरराष्ट्रीय दबाव एक साथ बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
Amit Pateria