कृषक कल्याण वर्ष की शुरुआत, सीएम यादव ने इतिहासिक ट्रैक्टर रैली से दी किसानों को नई योजनाओं की सौगात

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कृषक कल्याण वर्ष की शुरुआत, सीएम यादव ने इतिहासिक ट्रैक्टर रैली से दी किसानों को नई योजनाओं की सौगात

भोपाल में इतिहासिक ट्रैक्टर रैली के साथ ‘कृषक कल्याण वर्ष’ की शुरुआत

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के कोकता बायपास स्थित आरटीओ ऑफिस से लगभग 1101 ट्रैक्टरों की रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और खुद ट्रैक्टर चलाकर रैली में शामिल हुए। इस रैली को उन्होंने किसानों के विश्वास और सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। बाद में वे जंबूरी मैदान में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां ‘कृषक कल्याण वर्ष’ की औपचारिक शुरुआत की गई।

किसानों के लिए ई-विकास पोर्टल और खाद आपूर्ति की नई व्यवस्था

जंबूरी मैदान में मुख्यमंत्री ने ई-विकास पोर्टल, एग्री स्टैक वितरण प्रणाली और खाद आपूर्ति पोर्टल का शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था से किसान पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से खाद की आसान बुकिंग कर सकेंगे और उन्हें सीधे डिलीवरी मिलेगी। इससे खाद के लिए भटकने की समस्या कम होगी और आपूर्ति प्रणाली को मजबूत किया जाएगा, क्योंकि खेती का रकबा बढ़ने से खाद की मांग भी बढ़ी है।

कृषक कल्याण वर्ष में 16 विभागों की संयुक्त भागीदारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘कृषक कल्याण वर्ष’ केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे वर्ष 16 विभागों के माध्यम से किसानों के लिए लगातार काम करने का संकल्प है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले किसान मामलों को सिर्फ कृषि विभाग तक सीमित माना जाता था, जबकि अब 16 मंत्रालय मिलकर किसानों की आय बढ़ाने और लागत घटाने की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने बताया कि राज्य की कृषि विकास दर लगभग 16 प्रतिशत की गति से बढ़ रही है।

फूड पार्क, कृषि उद्योग और किसानों की आय बढ़ाने की योजना

डॉ. यादव ने घोषणा की कि किसानों की उपज जल्दी खराब होने की समस्या दूर करने के लिए प्रदेश में फूड पार्क विकसित किए जाएंगे। इन फूड पार्कों में सरकार सब्सिडी के माध्यम से किसानों को भागीदार बनाएगी, ताकि उन्हें फसल का बेहतर मूल्य मिल सके। उन्होंने कहा कि लक्ष्य है किसानों की आय बढ़ाना और उनकी लागत कम करना, जिसके लिए फसलों का विविधीकरण, प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा और कृषि प्रसंस्करण को प्रोत्साहित किया जाएगा।

सोलर पंप और मुफ्त बिजली की घोषणा

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में 5 हॉर्सपावर के बिजली कनेक्शन के लिए किसानों को 7,500 रुपये जमा करने पड़ते हैं, लेकिन सरकार तीन वर्षों में 30 लाख किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराएगी। इन सोलर पंपों के माध्यम से किसानों को मुफ्त बिजली देने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने भाजपा किसान मोर्चा से अपील की कि वे किसानों को संगठित कर इस योजना का लाभ दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

MSP पर कोदो-कुटकी खरीद और मोटे अनाज को बढ़ावा

डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की कि प्रदेश में कोदो और कुटकी की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जाएगी, ताकि आदिवासी और छोटे किसानों को सीधा लाभ मिल सके। उन्होंने डिंडोरी में श्रीअन्न अनुसंधान केंद्र की स्थापना की घोषणा भी की, जिससे मोटे अनाज के उत्पादन और अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा।

भावांतर योजना, किसान सम्मान निधि और अन्य आर्थिक सहायता

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत किसानों को 6 हजार रुपये सालाना मिलते हैं और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा अतिरिक्त 6 हजार रुपये जोड़कर किसानों को 12 हजार रुपये वार्षिक सहायता की व्यवस्था की गई। उन्होंने कहा कि सोयाबीन बोने वाले किसानों को भावांतर योजना से उचित मूल्य मिला और अब सरकार सरसों पर भी भावांतर योजना का लाभ देने की दिशा में काम कर रही है, जिसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा जा रहा है।

उन्होंने बताया कि आपदा प्रभावित 24 लाख 14 हजार किसानों को 2,150 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी गई है और भावांतर योजना के तहत अब तक 1,350 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं। केंद्र सरकार द्वारा 43 लाख मीट्रिक टन धान खरीद की अनुमति के मुकाबले राज्य में 44 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान का उपार्जन किया जा चुका है।

नदी जोड़ो परियोजनाएं और सिंचाई क्षमता में वृद्धि

मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्तमान में खेती का रकबा लगभग ढाई लाख हेक्टेयर बढ़ा है, जो सरकारी नीतियों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चल रही तीन नदी जोड़ो परियोजनाओं से करीब 16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद है। उन्होंने नर्मदा पर बने बांधों के माध्यम से प्रदेश को हराभरा बनाए जाने का उल्लेख किया और कहा कि नदी जोड़ो अभियान जारी है।

कृषि में प्राकृतिक और जैविक खेती को प्रोत्साहन

डॉ. यादव ने कहा कि रासायनिक खादों पर अत्यधिक निर्भरता अधिक उत्पादन के मार्ग में बाधा है, इसलिए सरकार प्राकृतिक और जैविक खेती को प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे उड़द, मूंग और मूंगफली जैसी फसलों के माध्यम से प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें, क्योंकि कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से किसी का भला नहीं होगा।

वेदर इन्फॉर्मेशन डेटा सिस्टम और मौसम आधारित खेती

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि किसानों के हित में वेदर इन्फॉर्मेशन डेटा सिस्टम तैयार किया जाएगा। इस सिस्टम के माध्यम से मौसम आधारित खेती को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि किसान समय पर सटीक जानकारी के आधार पर फसल संबंधी निर्णय ले सकें।

कृषक कल्याण वर्ष-2026 के फोकस सेक्टर

डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि कृषक कल्याण वर्ष-2026 का उद्देश्य कृषि को केवल पारंपरिक खेती तक सीमित न रखकर उसे लाभकारी, स्थायी और तकनीक आधारित रोजगार सृजन मॉडल के रूप में विकसित करना है। इस वर्ष के लिए उद्यानिकी, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य-पालन और खाद्य प्रसंस्करण को फोकस सेक्टर बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य-पालन और वानिकी को एकीकृत कर जिला-स्तरीय क्लस्टर आधारित विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। उच्च उत्पादकता, प्राकृतिक खेती, डिजिटल सेवाओं और कृषि प्रसंस्करण के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा। एग्री-टेक, ड्रोन सेवाएं, एफपीओ प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण और हाइड्रोपोनिक्स जैसे क्षेत्रों में ग्रामीण युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर सृजित करने की बात भी रखी गई।

कृषि बजट और प्रमुख योजनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि और समृद्ध ग्रामीण क्षेत्र मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं। इसी कारण राज्य सरकार कृषि बजट में लगातार वृद्धि कर रही है और किसानों के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं चला रही है। इनमें समर्थन मूल्य पर उपज की खरीदी, सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए भावांतर योजना, अतिवृष्टि, कीट-व्याधि और प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को राहत, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना, मुख्यमंत्री कृषि उन्नति योजना और रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना मुख्य हैं।

ऐतिहासिक और धार्मिक संदर्भ, किसान के सम्मान पर जोर

कोकता बायपास पर किसानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनवी के हमले का उल्लेख किया और कहा कि आज सरदार पटेल के प्रयासों से यह मंदिर अपने वैभव को प्राप्त कर चुका है। उन्होंने अयोध्या में भगवान राम मंदिर के निर्माण का भी उल्लेख किया और भारतीय परंपरा को प्रकृति के साथ जीवन जीने की अद्वितीय परंपरा बताया।

जंबूरी मैदान में मुख्य कार्यक्रम और प्रदर्शनी

ट्रैक्टर रैली के बाद मुख्यमंत्री जंबूरी मैदान पहुंचे, जहां भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, मत्स्य पालन एवं मछुआ कल्याण मंत्री नारायण सिंह पंवार, मंत्री कृष्णा गौर, उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना, पशुपालन मंत्री लखन पटेल, विधायक भगवानदास सबनानी, रामेश्वर शर्मा और महापौर मालती राय उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने जंबूरी मैदान में लगी कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन किया, गौ-पूजन कर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और मिनी ट्रैक्टर पर बैठकर आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी ली।

नेताओं के संबोधन और कृषक कल्याण वर्ष की महत्ता

कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने किसानों से आग्रह किया कि वे ‘किसान वर्ष’ को होली-दीवाली की तरह मनाएं और कहा कि कृषि प्रधान देश और प्रदेश की जिम्मेदारी सिर्फ मुख्यमंत्री की नहीं बल्कि आठ करोड़ जनता की है।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री के कार्यकाल का पहला वर्ष महिलाओं को समर्पित रहा, जिसमें लाड़ली बहनों की राशि बढ़ाकर उन्हें आर्थिक मजबूती दी गई। दूसरा वर्ष उद्योग और रोजगार सृजन को समर्पित रहा, और अब यह वर्ष कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, जिससे किसानों के जीवन में बदलाव की उम्मीद जताई गई।

सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि किसान देश के विकास की नींव है और 2047 में विकसित भारत बनाने की नींव भी अन्नदाता ही रखेगा। उन्होंने जंबूरी मैदान को शुभ बताया, जहां भाजपा के बड़े सम्मेलन और सफल चुनावी परिणामों का उल्लेख किया और कहा कि यहीं से कृषक कल्याण वर्ष की शुरुआत हो रही है।

कार्यक्रम में मंत्री कृष्णा गौर ने इस दिन को मध्यप्रदेश के लिए ऐतिहासिक बताया और कहा कि भोपाल की धरती कृषि समृद्धि का नया इतिहास लिखने जा रही है। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है और किसान अब उद्यमी एवं ऊर्जा दाता की भूमिका में आगे बढ़ रहे हैं।

रबी और खरीफ फसलों पर जोर, बोनस और MSP

मुख्यमंत्री ने किसानों से गर्मी के मौसम में मूंग और उड़द की खेती करने की अपील की और कहा कि इन फसलों पर राज्य सरकार बोनस देगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक छह वन विज्ञान केंद्रों की स्थापना की जा चुकी है, जो ग्रामीण एवं कृषि आधारित विकास को सहयोग देंगे।

यातायात और रैली से जुड़ी व्यवस्थाएं

कार्यक्रम के अवसर पर प्रशासन ने कोकता बायपास पर ट्रैक्टर रैली और जंबूरी मैदान में कृषक कल्याण वर्ष के शुभारंभ कार्यक्रम के कारण वहां की सड़कों पर अन्य वाहनों की आवाजाही से बचने की सलाह दी। जंबूरी मैदान के आसपास अन्य वाहनों के लिए अलग से पार्किंग की व्यवस्था की गई।

निष्कर्ष: समग्र किसान कल्याण का रोडमैप

पूरे कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री और अन्य वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि कृषक कल्याण वर्ष केवल घोषणा नहीं, बल्कि योजनाबद्ध और निरंतर प्रयासों का साल होगा। कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंचाई, समर्थन मूल्य, प्राकृतिक खेती, तकनीक आधारित सेवाएं, वेदर डेटा सिस्टम और क्लस्टर आधारित विकास जैसे कदमों के माध्यम से सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाने, लागत घटाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने का है।

Bhavanesh Soni