ईरान ने अमेरिका को 7 शर्तों वाला परमाणु प्रस्ताव भेजा, कतर बना मध्यस्थ

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ईरान ने अमेरिका को 7 शर्तों वाला परमाणु प्रस्ताव भेजा, कतर बना मध्यस्थ

ईरान ने अमेरिका को सात शर्तों वाला नया परमाणु प्रस्ताव भेजा

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका को एक नया परमाणु प्रस्ताव भेजा है जिसे कतर के जरिए पहुंचाया गया है। ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया कि अमेरिका इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है। अधिकारी ने प्रस्ताव में शामिल शर्तों के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सात शर्तें पूरी होने के बाद ही परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करेगा और होर्मुज जलडमरूमध्य खोलेगा।

ईरान की सात प्रमुख शर्तें

पहली शर्त के तहत ईरान चाहता है कि अमेरिका उस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध खत्म करे जिनकी वजह से ईरान के लिए दूसरे देशों के साथ कारोबार करना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचना मुश्किल होता है। दूसरी शर्त में ईरान की मांग है कि दूसरे देशों के बैंकों में जमा उसकी रोकी गई संपत्ति वापस की जाए क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान की बड़ी रकम विदेशों में फंसी हुई है। तीसरी शर्त के अनुसार ईरान चाहता है कि अमेरिका युद्ध के दौरान उसके ठिकानों, बुनियादी ढांचे और दूसरी संपत्तियों को हुए नुकसान की भरपाई करे और इसके लिए मुआवजा दे। चौथी शर्त में ईरान के बंदरगाहों और समुद्री कारोबार पर अमेरिका की ओर से लगाई गई रोक हटाने की मांग है क्योंकि इस नाकेबंदी के कारण ईरान के लिए समुद्र के रास्ते सामान भेजना और मंगाना मुश्किल हो रहा है। पांचवीं शर्त के तहत ईरान चाहता है कि उसके तेल कारोबार पर लगी पाबंदियां हटाई जाएं ताकि वह अंतरराष्ट्रीय बाजार में दूसरे देशों को अपना तेल बेच सके और उसकी कमाई बढ़े। छठी शर्त में ईरान की मांग है कि अमेरिका और इजरायल उसके साथ-साथ क्षेत्र में उसके सहयोगी संगठनों के खिलाफ भी सैन्य कार्रवाई बंद करें और युद्ध का दायरा दूसरे देशों और संगठनों तक न बढ़े। सातवीं शर्त के अनुसार ईरान चाहता है कि अमेरिका पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी कम करे और क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सैनिकों की तैनाती घटाई जाए।

वार्ता में गतिरोध और कतर की मध्यस्थता

अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा विवाद परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत करे और यह सुनिश्चित करे कि वह परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे नहीं बढ़ेगा। दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि परमाणु मुद्दे पर बातचीत से पहले अमेरिका को उसके खिलाफ लगाए गए प्रतिबंध और दूसरी पाबंदियां हटानी होंगी। दोनों देश बातचीत तो करना चाहते हैं, लेकिन शुरुआत कहां से हो, इस पर सहमत नहीं हैं। अमेरिका पहले परमाणु कार्यक्रम पर बात करना चाहता है, जबकि ईरान पहले आर्थिक और सैन्य पाबंदियां हटवाना चाहता है। अमेरिका और ईरान के बीच सीधे बातचीत के रास्ते बंद होने के कारण कतर जैसे देश मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। कतर पहले भी दोनों देशों के बीच बातचीत कराने और तनाव कम करने की कोशिशों में शामिल रहा है। फिलहाल अमेरिका की ओर से प्रस्ताव स्वीकार किए जाने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिकी समीक्षा के बाद ही पता चलेगा कि दोनों देश बातचीत की दिशा में आगे बढ़ते हैं या शर्तों को लेकर तनाव बना रहता है।

Arvind Vishwakarma