सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: प्रदूषण पर पाबंदियों से बढ़ता उल्लंघन, दिल्ली AQI 391

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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: प्रदूषण पर पाबंदियों से बढ़ता उल्लंघन, दिल्ली AQI 391

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली प्रदूषण पर सुनवाई में कहा: पाबंदियों से बढ़ता है उल्लंघन, अगली सुनवाई 16 नवंबर को

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण पर सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की बेंच ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण रोकने के लिए वह जितने ज्यादा आदेश और पाबंदियां लगाएगा, उनका उल्लंघन उतना ही बढ़ेगा। बेंच ने सवाल उठाया कि क्या सिर्फ सख्त नियम बनाने से प्रदूषण की समस्या हल हो सकती है और प्रदूषण के प्रति लोगों को जागरूक करने तथा उनके व्यवहार में बदलाव लाने की जरूरत बताई। कोर्ट दिवाली की छुट्टियों के बाद 16 नवंबर को मामले की अगली सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि दिल्ली का AQI पहले ही 400 तक पहुंच रहा है।

केंद्र सरकार की ओर से पांच प्रमुख क्षेत्रों में नियमों की जानकारी

केंद्र सरकार और अन्य अधिकारियों की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि प्रदूषण रोकने के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों में नियम बनाए गए हैं। इनमें उद्योगों से निकलने वाला धुआं, गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण, निर्माण और तोड़फोड़ से उड़ने वाली धूल, सड़कों की धूल और पराली जलाना शामिल हैं। उन्होंने कहा कि गुरुवार को दिल्ली के कुल प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी 14% थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में कुछ आदेश जारी करेगा। वहीं, सीनियर वकील और एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया कि प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी के आसपास बना हुआ है, यह ऐसा है जैसे कोई व्यक्ति रोजाना 30 सिगरेट पी रहा हो।

दिल्ली में शुक्रवार को दर्ज प्रदूषण के आंकड़े

दिल्ली में शुक्रवार को चारों तरफ धुंध छाई रही। प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा और शहर का औसत AQI 391 दर्ज किया गया। दिल्ली के 59 निगरानी केंद्रों में से 30 पर शुक्रवार सुबह 9 बजे AQI 400 के पार यानी गंभीर श्रेणी में पहुंच गया था। बाकी केंद्रों पर भी हवा की हालत बहुत खराब थी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, रोहिणी में सबसे ज्यादा AQI 475 दर्ज किया गया। वहीं, आईआईटी दिल्ली में यह 472 रहा।

एक याचिका में मांग की गई थी कि AQI एक तय स्तर से ऊपर पहुंचने पर सभी उम्र के बच्चों के लिए स्कूल बंद कर दिए जाएं या हाइब्रिड मोड में पढ़ाई कराई जाए। इस पर बेंच ने कहा कि वह विशेषज्ञों की राय के आधार पर फैसला करेगी।

Pushpendra Chaubey