ईरान युद्ध के बीच भारत को रूस से तेल खरीदने की छूट मिली, पेट्रोल-डीजल नहीं होगा महंगा

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ईरान युद्ध के बीच भारत को रूस से तेल खरीदने की छूट मिली, पेट्रोल-डीजल नहीं होगा महंगा

भारत को रूस से तेल खरीदने की 30 दिन की छूट मिली, ईंधन कीमतें नहीं बढ़ेंगी

ईरान-इजराइल संघर्ष के बीच भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों से 30 दिन की छूट मिल गई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को 3 अप्रैल तक के लिए एक विशेष लाइसेंस जारी किया है। इस कदम से फिलहाल भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का संकट टल गया है।

अमेरिका का अस्थायी कदम और वैश्विक बाजार स्थिरता का लक्ष्य

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 6 मार्च को बताया कि यह अस्थायी उपाय राष्ट्रपति ट्रम्प के ऊर्जा एजेंडे के तहत किया गया है। उन्होंने जोर दिया कि भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सहयोगी है और यह छूट वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति को स्थिर रखने के उद्देश्य से दी गई है। बेसेंट ने ईरान पर वैश्विक ऊर्जा बाजार को बंधक बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस दबाव को कम करने के लिए भारत को 30 दिन की छूट दी जा रही है। अमेरिका को उम्मीद है कि इस अवधि के बाद भारत अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगा, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कमी नहीं होगी।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के 'ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल' द्वारा जारी इस लाइसेंस के तहत, भारत केवल 5 मार्च तक जहाजों पर लोड हुए रूसी कच्चे तेल की ही डिलीवरी प्राप्त कर सकेगा।

इजराइल-ईरान जंग और ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव

मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष ने स्थिति को गंभीर बना दिया है, खासकर ईरान द्वारा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को ब्लॉक करने की धमकी के बाद, जहां से दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति होती है। इस स्थिति पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज या पूरा फारस की खाड़ी क्षेत्र दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में किसी भी बाधा का सीधा असर तेल और गैस की आपूर्ति पर पड़ता है, जो अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करता है।

भारत के लिए रूसी तेल का महत्व

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत उन रूसी तेल कार्गो को खरीदने पर विचार कर रहा है जो इस समय भारतीय समुद्र के करीब या एशियाई जल क्षेत्र में हैं। इससे परिवहन का समय और लागत दोनों कम होगी। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता है और अपनी कुल जरूरत का लगभग 88% विदेशों से आयात करता है।

भारत के लिए रूसी तेल कई कारणों से महत्वपूर्ण है:

पिछले साल नवंबर में यूक्रेन युद्ध के कारण अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद, भारत लगातार अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदता रहा है। फरवरी में भारत के कुल तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी फिर से बढ़कर 30% तक पहुंच गई थी।

भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर प्रभाव

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद, अमेरिकी छूट और सरकार की निगरानी के कारण भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। यह छूट आपूर्ति श्रृंखला को प्रबंधित करने में मदद करेगी।

Ravi Yadav