इजराइल ने लेबनान के 900 साल पुराने किले पर किया कब्ज़ा, 26 साल की सबसे बड़ी घुसपैठ

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इजराइल ने लेबनान के 900 साल पुराने किले पर किया कब्ज़ा, 26 साल की सबसे बड़ी घुसपैठ

इजराइल का लेबनान के 900 साल पुराने किले पर कब्जा: 26 साल में सबसे बड़ी घुसपैठ

इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में 900 साल पुराने ब्यूफोर्ट किले और आसपास की पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया है। इजराइली अधिकारियों की ओर से रविवार को जारी तस्वीरों और वीडियो में किले पर इजराइली झंडे लहराते दिखाई दिए।

इजराइली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा कि सेना ने आसपास के गांवों में कई दिनों तक चली भीषण लड़ाई और हवाई हमलों के बाद यह कामयाबी हासिल की है। अल जजीरा के मुताबिक पिछले 26 साल में इजराइल की लेबनान में यह सबसे बड़ी घुसपैठ है।

ब्यूफोर्ट किले का सैन्य महत्व

ब्यूफोर्ट किला 1982 से 2000 तक दक्षिणी लेबनान पर इजराइली कब्जे के दौरान उसकी सेना का एक प्रमुख सैन्य अड्डा था। 700 मीटर ऊंची पहाड़ी पर बने इस किले से दक्षिणी लेबनान के अलावा इजराइल के बड़े हिस्से पर नजर रखी जा सकती है। इसलिए इसका सैन्य महत्व बहुत ज्यादा माना जाता है।

युद्धविराम के बावजूद हमले

इजराइल और लेबनान के बीच 17 अप्रैल को सीजफायर का ऐलान हुआ था। इसके बावजूद इजराइल ने हमले जारी रखे हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इजराइल किसी संभावित अमेरिका-ईरान समझौते से पहले हिजबुल्लाह को अधिकतम नुकसान पहुंचाना चाहता है।

अन्य संबंधित अपडेट

1. अमेरिकी ड्रोन गिराने का दावा

IRGC ने दावा किया है कि उसकी एयर डिफेंस यूनिट ने रविवार को ईरानी हवाई सीमा में घुसे अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को मार गिराया।

2. ट्रम्प फैसला नहीं ले पाए

राष्ट्रपति ट्रम्प ने अधिकारियों के साथ व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में करीब दो घंटे तक बैठक की। इसके बाद भी ईरान के साथ संभावित समझौते पर अंतिम फैसला नहीं ले पाए।

3. अमेरिकी रक्षा मंत्री की चेतावनी

पीट हेगसेथ ने फिर चेतावनी दी है कि ईरान या तो समझौता स्वीकार करे या फिर बल प्रयोग का सामना करने के लिए तैयार रहे।

4. अमेरिका पर धोखा देने का आरोप

सुप्रीम लीडर के सलाहकार मोहसिन रजाई ने अमेरिका पर कूटनीति को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका समुद्री नाकाबंदी जारी रखकर बातचीत की प्रक्रिया के साथ धोखा कर रहा है।

5. होर्मुज में बारूदी सुरंग तैरती दिखी

ओमान ने होर्मुज स्ट्रेट में एक संदिग्ध तैरती हुई समुद्री बारूदी सुरंग (फ्लोटिंग माइन) देखे जाने की जानकारी दी। जहाजों और मछुआरों को सावधानी बरतने की चेतावनी जारी की।

ट्रम्प के बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका ने ईरानी सेना पर उतनी सख्त कार्रवाई नहीं की, जितनी वह दूसरे देशों की सेनाओं के खिलाफ करता रहा है। फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा, "लोग यह सुनकर हैरान होंगे कि हमने ईरानी सेना को क्यों छोड़ा और उसके साथ इतनी नरमी क्यों बरती।" ट्रम्प के मुताबिक, ईरानी सेना को देश की अन्य सरकारी संस्थाओं की तुलना में थोड़ी नरम है। उन्होंने कहा कि अगर किसी देश की सभी संस्थाओं और लोगों को पूरी तरह तबाह कर दिया जाए, तो वह देश कई पीढ़ियों तक दोबारा खड़ा नहीं हो पाता। ट्रम्प ने कहा कि इसी सोच के तहत अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई करते समय कुछ सीमाएं रखीं और ईरानी सेना को पूरी तरह निशाना नहीं बनाया।

बता दें कि ईरानी सेना (अर्तेश) और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) दो अलग-अलग सैन्य संस्थाएं हैं। ईरानी सेना (अर्तेश) देश की पारंपरिक सेना है। वहीं IRGC की स्थापना 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद हुई थी। इसका मकसद सिर्फ देश की रक्षा करना नहीं, बल्कि इस्लामी व्यवस्था और क्रांति की रक्षा करना भी है। IRGC के पास अपनी अलग थल सेना, नौसेना, वायु एवं मिसाइल बल हैं। ट्रम्प के बयान में ईरानी सेना कहने का मतलब आम तौर पर अर्तेश से लिया जा सकता है। अमेरिका के अधिकांश हमले IRGC और उससे जुड़े ठिकानों पर केंद्रित रहे हैं।

ईरान की संसद की मंजूरी

ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है कि जब तक ईरान को यह भरोसा नहीं हो जाता कि उसके अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं, तब तक अमेरिका के साथ किसी भी समझौते को मंजूरी नहीं दी जाएगी। गालिबाफ ने रविवार को कहा- "हम किसी भी समझौते को तब तक मंजूरी नहीं देंगे, जब तक हमें यह यकीन न हो जाए कि उसमें ईरानी जनता के अधिकारों की रक्षा की गई है।" उन्होंने कहा कि ईरानी अधिकारियों को अमेरिका की बातों और उसके वादों पर भरोसा नहीं है।

ब्यूफोर्ट कैसल का इतिहास

ब्यूफोर्ट कैसल (ब्यूफोर्ट किला) दक्षिणी लेबनान में स्थित एक ऐतिहासिक पहाड़ी किला है। यह 700 मीटर एक ऊंची पहाड़ी पर बना है। यहां से आसपास के बड़े इलाके पर नजर रखी जा सकती है। इसी रणनीतिक महत्व के कारण सदियों से इस किले के लिए कई लड़ाइयां हुई हैं। इस किले का निर्माण 12वीं सदी में क्रूसेडर्स (ईसाई धर्म के लिए लड़ने वाले सैनिकों) ने किया था। उस समय इसका नाम बेल फोर्ट (सुंदर किला) रखा गया था, बाद में इसे ब्यूफोर्ट कहा जाने लगा। 1190 में मुस्लिम शासक सलाउद्दीन अय्यूबी ने इस किले पर कब्जा कर लिया था।

आधुनिक दौर में भी यह किला संघर्ष का केंद्र बना रहा। 1982 में इजराइल के लेबनान पर हमले के दौरान यहां भीषण लड़ाई हुई थी। इसके बाद कई वर्षों तक इजराइली सेना और उसके सहयोगी बलों का इस क्षेत्र पर नियंत्रण रहा। वर्ष 2000 में इजराइल के दक्षिणी लेबनान से हटने के बाद किला फिर लेबनान के नियंत्रण में आ गया।

अमेरिकी सेना की कार्रवाई

अमेरिका ने ईरान की ओर जा रहे एक और मालवाहक जहाज को रोक दिया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ‘लियान स्टार’ नाम का जहाज चेतावनी मिलने के बावजूद एक ईरानी बंदरगाह की तरफ बढ़ता रहा। इसके बाद अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में कार्रवाई कर जहाज को आगे बढ़ने से रोक दिया। फिलहाल जहाज समुद्र में फंसा हुआ है।

इजरायली सैनिक को श्रद्धांजलि

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ड्रोन हमले में मारे गए 21 साल के इजराइली सैनिक माइकल ट्यूकिन को श्रद्धांजलि दी है। नेतन्याहू ने बयान में बताया कि माइकल ट्यूकिन 6 साल पहले यूक्रेन से इजराइल आए थे। देश सेवा की भावना से माइकल ने गिवाती रिकॉन यूनिट में कॉम्बैट सैनिक के तौर पर भर्ती ली थी। उन्होंने माइकल के परिवार के प्रति संवेदना जताई और घायल सैनिकों के जल्द ठीक होने की कामना की। नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल अपने सैनिकों के साथ मजबूती से खड़ा है, जो फिलहाल मोर्चे पर तैनात हैं।

IRGC का दावा

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटों में तेल टैंकर, कंटेनर जहाज और दूसरे व्यापारिक जहाजों समेत 28 शिप होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे हैं। फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, IRGC ने बयान में कहा कि इन जहाजों की आवाजाही IRGC नेवी के समन्वय और सुरक्षा व्यवस्था के तहत हुई।

यूनिसेफ की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र की बच्चों से जुड़ी एजेंसी यूनिसेफ ने कहा है कि पिछले एक हफ्ते में लेबनान में औसतन हर 24 घंटे में 11 बच्चे या तो मारे गए हैं या घायल हुए हैं। युद्धविराम के बावजूद इजराइल ने देशभर में हमले तेज कर दिए हैं। यूनिसेफ ने लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के हवाले से बताया कि पिछले 7 दिनों में 77 बच्चे हमलों का शिकार हुए हैं। वहीं, रॉयटर्स के मुताबिक 16 अप्रैल को लागू हुए युद्धविराम के बाद से अब तक 55 बच्चों की मौत और 212 बच्चों के घायल होने की पुष्टि हुई है। यूनिसेफ के प्रवक्ता रिकार्डो पायर्स ने सभी पक्षों से युद्धविराम का पूरी तरह पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा, “अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत बच्चों और नागरिक ढांचे की सुरक्षा जरूरी है।”

इजराइल के रक्षा मंत्री का बयान

इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा है कि इजराइली सेना का दक्षिणी लेबनान के ब्यूफोर्ट किले पर कब्जा करना बड़ी रणनीतिक जीत हैै। सेना ने लितानी नदी पार कर अभियान का दायरा बढ़ाया था। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन को अब तक गोपनीय रखा गया था। इलाके में लड़ाई अभी जारी है और इजराइल हिजबुल्लाह को कमजोर करने और उत्तरी सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कार्रवाई जारी रखेगा।

इजराइली सेना की आगे की कार्रवाई

इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के नबातियेह शहर के पास स्थित ब्यूफोर्ट किले पर कब्जा कर लिया है। इजराइली ब्रॉडकास्टिंग कॉर्प ने कुछ तस्वीरें जारी की। इनमें रणनीतिक महत्व वाले इस ऐतिहासिक किले पर इजराइल का झंडा लहराता दिखा। इजराइली सेना ने इलाके में मौजूद अपने सैनिकों की तस्वीरें भी जारी कीं और कहा कि हमारी सेना अब लितानी नदी के उत्तर में हिजबुल्लाह के खिलाफ लगातार हमले कर रही है।

ईरान के सैन्य कमांडर की चेतावनी

ईरान के एक सीनियर सैन्य कमांडर ने चेतावनी दी है कि देश के खिलाफ किसी भी नए हमले का जवाब पहले से ज्यादा ताकतवर तरीके से दिया जाएगा। अल जजीरा के मुताबिक, ईरानी सेना के समन्वय उप कमांडर रियर एडमिरल हबीबोल्लाह सय्यारी ने कहा, "आज ईरान की सेना दुश्मन की किसी भी दुश्मनी भरी कार्रवाई के खिलाफ मजबूती और पूरी तैयारी के साथ खड़ी है।"

दक्षिणी लेबनान में लड़ाई

इजराइली सेना ने कहा है कि शनिवार को दक्षिणी लेबनान में लड़ाई के दौरान 21 साल के एक सैनिक की मौत हो गई। सेना के मुताबिक, इसी घटना में 4 अन्य सैनिक घायल भी हुए हैं। अल जजीरा के मुताबिक, सैनिक की मौत ड्रोन हमले में हुई।

इजराइली सेना का सैन्य अभियान

इजराइली सेना की प्रवक्ता एला वावेया ने कहा है कि सेना ने दक्षिणी लेबनान में बड़े स्तर का सैन्य अभियान शुरू किया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि इस अभियान का मकसद आतंकी ढांचे को नष्ट करना और हमलावरों को खत्म करना है। यह कार्रवाई दक्षिणी लेबनान में सैन्य नियंत्रण मजबूत करने के लिए की जा रही है। उन्होंने बताया कि सैनिक "फॉरवर्ड डिफेंस लाइन को आगे बढ़ाने" के लिए हमला अभियान चला रहे हैं। इजराइली सेना लितानी नदी पार कर चुकी है और अब नदी के उत्तर में हिजबुल्लाह के खिलाफ हमले बढ़ाए जा रहे हैं। साथ ही सैन्य कार्रवाई दूसरे इलाकों तक भी फैल रही है।

ट्रम्प की शर्तें

ईरान के साथ प्रस्तावित समझौते को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी शर्तें और सख्त कर दी हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने समझौते की शर्तों को और कड़ा करते हुए संशोधित प्रस्ताव दोबारा ईरान के पास भेजा है। हालांकि, रिपोर्ट में यह साफ नहीं किया गया कि समझौते के ड्राफ्ट में आखिर कौन-कौन से बदलाव किए गए हैं। माना जा रहा है कि ट्रम्प ईरान के परमाणु कार्यक्रम, संवर्धित यूरेनियम भंडार और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े मुद्दों पर ज्यादा सख्त शर्तें चाहते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ प्रस्तावित शांति समझौते में कई बदलाव मांगे हैं। अमेरिकी मीडिया वेबसाइट एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई बैठक के दौरान ट्रम्प ने अपनी टीम को ड्राफ्ट में संशोधन करने के निर्देश दिए। रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि ट्रम्प खासतौर पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और संवर्धित यूरेनियम भंडार को लेकर शर्तें और सख्त करना चाहते हैं। ट्रम्प होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने से जुड़ी भाषा में भी बदलाव चाहते हैं।

ट्रम्प का दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अगर अमेरिका ने B-2 बॉम्बर से ईरान पर हमला नहीं किया होता, तो आज इजराइल और पूरा मिडिल ईस्ट नक्शे से मिट चुका होता। ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना जरूरी था।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि उन्हें ईरान के साथ समझौता करने की कोई जल्दबाजी नहीं है। फॉक्स न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा कि अमेरिका बेहतरीन डील करेगा और अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम सैन्य तरीके से इसे खत्म कर देंगे। ट्रम्प ने कहा कि वह समझौते को प्राथमिकता देंगे, क्योंकि इससे कई लोगों की जान बचेगी और समझौते पर हस्ताक्षर होते ही होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत खोला जा सकता है। अमेरिका धीरे-धीरे अपनी शर्तें मनवा रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान परमाणु हथियार न खरीदने पर सहमत हो गया है। ट्रम्प पहले भी कह चुके हैं कि उनका सबसे बड़ा लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, ‘पहले ईरान सहमत हुआ कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। इसके बाद मैंने उनसे पुछा क्या आप इसे खरीदेंगे, तो वे इस पर भी सहमत हुए कि हम परमाणु हथियार न बनाएंगे न ही खरीदेंगे।’

ईरानी ड्रोन गिराने का दावा

ईरान की IRGC ने दावा किया है कि उसकी एयर डिफेंस यूनिट ने रविवार को ईरानी हवाई सीमा में घुसे अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को मार गिराया। यह जानकारी ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी ने दी है। IRGC के मुताबिक, ड्रोन को एयर डिफेंस और निगरानी सिस्टम ने तुरंत पहचान लिया था। इसके बाद एडवांस मिसाइल सिस्टम से उसे निशाना बनाकर गिरा दिया। ईरान ने दावा किया कि ड्रोन अमेरिकी सेना का था और दुश्मनी भरे ऑपरेशन के इरादे से सीमा में दाखिल हुआ था।

तेहरान में रैली

ईरान की राजधानी तेहरान में सरकार समर्थकों ने रैली निकाली। प्रदर्शनकारी ईरानी झंडे लेकर सड़कों पर उतरे और सरकार के समर्थन में नारे लगाए।

नई नौसैनिक अटैक शिप

ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरानी सेना ने अपनी नई नौसैनिक अटैक शिप '27 रजब' को पेश किया है। इसे तेहरान के एंकलाब स्क्वायर में आयोजित एक समारोह के दौरान दिखाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, यह अटैक शिप 100 नॉट यानी करीब 185 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंच सकती है। इसमें लंबी दूरी तक क्रूज मिसाइलें दागने की क्षमता भी मौजूद है।

होर्मुज स्ट्रेट का भविष्य

भूराजनैतिक जोखिम मामलों के एक्सपर्ट मार्को विनचेंजो ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो जाने और होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खुलने के बाद भी वहां हालात पहले जैसे सामान्य नहीं होंगे। अल जजीरा के मुताबिक, उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में अब सुरक्षित और भरोसेमंद समुद्री रास्ते जैसी स्थिति नहीं रहेगी। इस अहम जलमार्ग में आवाजाही अब पहले से ज्यादा राजनीतिक असर में रहेगी। ट्रम्प के ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया का करीब 20% तेल और एलएनजी इसी रास्ते से गुजरता था। लंबे समय में वैश्विक बाजार और शिपिंग कंपनियों का भरोसा पूरी तरह वापस नहीं लौट पाएगा।

WHO की चेतावनी

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने भी चेतावनी दी है कि बढ़ती सैन्य कार्रवाई लेबनान के लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर रही है। WHO के मुताबिक, युद्धविराम लागू होने के बाद से लेबनान में स्वास्थ्य केंद्रों पर 27 हमलों की रिपोर्ट सामने आई है। इन हमलों में 25 लोगों की मौत और 42 लोग घायल हुए हैं। संगठन ने कहा कि अब तक 16 अस्पताल और 13 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हमलों में क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।

Bhavanesh Soni