" एक तरफ..हमारा मुख्यमंत्री कैसा हो..जीतू पटवारी जैसा हो..के नारे..कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के वीडियो के बैकग्राउंड में मप्र की सरकार गिराने का डॉयलॉग चल रहा हो..और लिखा अगले सीएम मप्र..तो दूसरी तरफ एक पोस्ट में जारी फोटो में मप्र के बतौर सीएम उमंग सिंघार सूटबूट में कैबिनेट की बैठक लेते दिख रहे..लिखा नेक्स्ट सीएम मप्र...मुख्यमंत्री कैसा हो,उमंग सिंघार जैसा हो नारे भी लगे..आप भी चौंक गए होंगे कि आखिर ये क्या हो रहा है..अरे वही तो लिखने की कोशिश कर रहा हूं कि मप्र कांग्रेस में ये क्या हो रहा है..क्योंकि विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं..2028 में होने हैं..लेकिन कांग्रेस के कुछ नेताओं और उनके समर्थकों ने मानो शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां अभी से शुरू कर दी हैं..चुनावी वैतरणी पार करना तो दूर,नाव अभी किनारे पर ही बंधी है,लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी हैं..सोशल मीडिया का जमाना है..यह तो सभी लोग जानते हैं..लेकिन मप्र कांग्रेस के प्रमुख कर्णधारों के समर्थकों ने मानो सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं को मुख्यमंत्री बनाने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली है..कहीं उमंग सिंघार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे दिखाई दे रहे हैं, तो कहीं जीतू पटवारी को "अगला मुख्यमंत्री" घोषित किया जा रहा है..ऐसा लग रहा है जैसे कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने चुनाव होने से पहले ही परिणाम घोषित कर दिए हों" सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री बनने और वास्तविक राजनीति में मुख्यमंत्री बनने के बीच का फासला उतना ही है,जितना पोस्टर पर बनी सरकार और विधानसभा में बनी सरकार के बीच होता है..फिलहाल तो कांग्रेस में स्थिति कुछ वैसी ही दिखाई देती है "एक अनार,सौ बीमार" सीएम की कुर्सी अभी बहुत बहुत दूर है, लेकिन उसके इर्द-गिर्द चक्कर लगाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है..राजनीति में एक पुरानी कहावत है "पहले कुआं खोदो,फिर पानी की बात करो" कमोवेश कांग्रेस के सामने भी यही चुनौती है..पहले जनता का भरोसा जीतना होगा,संगठन को खड़ा करना होगा और चुनावी मैदान में भाजपा को चुनौती देने की स्थिति बनानी होगी..मुख्यमंत्री कौन बनेगा,यह सवाल तभी मायने रखेगा जब पार्टी सत्ता के दरवाजे तक पहुंचेगी. कांग्रेस पार्टी पिछले दो दशक से अधिक समय से मध्य प्रदेश की सत्ता से दूर है..संगठन की हालत यह है कि कई नए जिलाध्यक्षों की कार्यकारिणी तक पूरी नहीं बन पाई है..बूथ स्तर पर मजबूती की जरूरत है यह बात बार बार पूर्व सीएम और जमीनी नेता दिग्विजय सिंह कई बार दोहरा चुके हैं..कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने की जरूरत है और बड़े नेताओं के बीच समन्वय की भी बेहद जरूरत है..लेकिन कांग्रेस में अक्सर ऐसा लगता है कि खेत अभी जोता भी नहीं गया और फसल बांटने की चर्चा शुरू हो गई..नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के समर्थक सोशल मीडिया पर उन्हें मुख्यमंत्री बना चुके..और उनकी कैबिनेट की बैठक लेते तस्वीरें भी क्रिएट कर डाल दीं गईं हैं..यह तस्वीर खूब सुर्खिंयां बटोर रही है..कुछ महीने पहले इंदौर में जीतू पटवारी के लिए भी वही नारे गूंजे थे.."प्रदेश का मुख्यमंत्री कैसा हो,जीतू पटवारी जैसा हो..फर्क सिर्फ इतना है कि दोनों नेताओं में सार्वजनिक तौर पर विनम्रता भाव है..उमंग सिंघार समर्थकों के बीच कहते हैं कि 2028 अभी दूर है, पार्टी की सेवा करनी है तो वहीं जीतू पटवारी कहते हैं कि न मंत्री पद का दावेदार हूं,न मुख्यमंत्री पद का..उनका लक्ष्य सिर्फ कांग्रेस की सरकार बनाना है..यदि वास्तव जैसा ये दोनों नेता जनता के बीच कह रहे हें..क्या वे अपने उन उत्साही समर्थकों को भी इसकी समझाइश नहीं दे सकते जो इस तरह से पोस्ट डाल रहे हैं...दरअसल अभी से इस प्रकार की रील्स,पोस्टर डालने से कांग्रेस के भीतर ही वर्चस्व,खींचतान..कार्यकर्ताओं और समर्थकों में दूरियां पैदा होने की संभावनाएं बढ़ने से इनकार भी नहीं किया जा सकता..इनकार तो इस बात से भी नहीं किया जा सकता कि और नेताओं के समर्थक भी अब इस तरीके अपने नेताओं के सीएम बनने के पोस्टर,फोटो और रील्स नहीं डालेंगे. अंदखाने की चर्चाओं पर बात करें तो जीतू पटवारी और उमंग सिंघार के बीच खींचतान की खबरें भी बाहर आतीं रहतीं हैं..पार्टी के कई वरिष्ठ नेता पहले से ही सक्रियता से दूरी बना चुके हैं..कांग्रेस के मीडिया विभाग में जमकर खींचतान जारी है..हालांकि ऐसे में कांग्रेस प्रशिक्षण अभियान चलाकर संगठन को मजबूत करने और नेताओं की नाराजगी दूर करने की कोशिश जरूर कर रही है..लेकिन सवाल यह है कि जब घर की दीवारों में दरारें हों,तब छत पर झंडा लगाने से कांग्रेस को कितना फायदा मिलेगा..वो भी तब जब राज्यसभा की एक सीट बचाने कांग्रेस में मप्र से लेकर दिल्ली तक का दखल साफ दिखाई दे रहा हो..बहरहाल बात जब सोशल मीडिया पर है तो फिर उसमें किसी से कुछ छुपाने से भी क्या होगा..पर वास्तव में जरूरत कांग्रेस को शायद अभी मुख्यमंत्री के चेहरे से ज्यादा जमीनी चेहरों की है..क्योंकि चुनाव सोशल मीडिया की टाइमलाइन पर नहीं, बूथ की लाइन में खड़े मतदाता तय करते हैं.
मध्य प्रदेश कांग्रेस में मुख्यमंत्री बनने ..ऑनलाइन बुकिंग जारी..? विधानसभा चुनाव 2028 में राज्यसभा सीट बढ़ाने की चुनौती रेड्स में कांग्रेस सरकार.. (बात पते की ..महेंद्र विश्वकर्मा)