इंदौर के भागीरथपुरा में 30 प्रतिशत क्षेत्र में साफ पानी की आपूर्ति बहाल
मध्य प्रदेश के इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप के बीच प्रशासन ने दावा किया है कि नगर निगम की पाइपलाइन को दुरुस्त कर लगभग 30 प्रतिशत क्षेत्र में साफ पानी की आपूर्ति बहाल कर दी गई है।
मेयर ने साइट पर पहुंचकर पानी पीकर दिखाया
इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार को भागीरथपुरा क्षेत्र का दौरा कर वाटर सप्लाई की स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने नगर निगम की दुरुस्त की गई पाइपलाइन से जुड़े नलों से घरों में आने वाला पानी स्वयं पीकर दिखाया और कहा कि यह पानी शुद्ध और सुरक्षित है।
पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट और सप्लाई बहाली
महापौर भार्गव के अनुसार सुधार कार्यों के बाद पिछले तीन दिनों के दौरान भागीरथपुरा में नगर निगम की पाइपलाइन से जलापूर्ति की गई और पानी के कई नमूने लिए गए। जांच में इन नमूनों का पानी साफ पाया गया। इसके बाद भागीरथपुरा के करीब 30 प्रतिशत हिस्से में नगर निगम की पाइपलाइन के जरिये नियमित सप्लाई बहाल की गई है। इस क्षेत्र में लगभग 15,000 लोग निवास करते हैं।
इंदौर की जलापूर्ति प्रणाली और नर्मदा पर निर्भरता
इंदौर शहर अपनी पेयजल जरूरतों के लिए नर्मदा नदी पर निर्भर है। नगर निगम द्वारा बिछाई गई पाइपलाइन के माध्यम से नर्मदा नदी का पानी पड़ोसी खरगोन जिले के जलूद से लगभग 80 किलोमीटर दूर इंदौर लाया जाता है और फिर घर-घर सप्लाई किया जाता है।
दूषित पानी से बीमारी और मौतों का विवादित आंकड़ा
भागीरथपुरा में दूषित पेयजल पीने से लोगों के बीमार पड़ने का सिलसिला दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ था। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस प्रकोप में अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, मृतकों की संख्या को लेकर विरोधाभासी दावे सामने आए हैं।
राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ में पेश स्थिति रिपोर्ट में उल्टी-दस्त के प्रकोप के दौरान भागीरथपुरा में पांच माह के एक शिशु समेत सात लोगों की मौत का उल्लेख किया है।
मुआवजा और डेथ ऑडिट रिपोर्ट के निष्कर्ष
प्रशासन ने भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त का प्रकोप शुरू होने के बाद जान गंवाने वाले 21 लोगों को दो-दो लाख रुपये का मुआवजा दिया है। अधिकारियों का कहना है कि इनमें से कुछ मौतें अन्य बीमारियों और कारणों से हुई हो सकती हैं, लेकिन सभी मृतकों के परिवारों को मानवीय आधार पर आर्थिक सहायता दी जा रही है।
इस बीच, शहर के शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय की एक समिति की ‘डेथ ऑडिट’ रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि भागीरथपुरा के 15 लोगों की मौत दूषित पानी के प्रकोप से किसी न किसी रूप में जुड़ी हो सकती है।
स्थिति सुधारने के प्रयास जारी
प्रशासन का कहना है कि पाइपलाइन सुधार, पानी की जांच और नियंत्रित जलापूर्ति जैसे कदमों के माध्यम से स्थिति को सामान्य करने की कोशिश की जा रही है। भागीरथपुरा के शेष क्षेत्रों में भी सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए तकनीकी और स्वास्थ्य संबंधी मानकों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
Navjeet Kaur