इंदौर दूषित पानी कांड: 16 मौतें, कांग्रेस के शीर्ष नेता मैदान से गायब
मध्यप्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोग बीमार हैं। इस त्रासदी ने प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति दोनों में सवाल खड़े किए हैं, खासकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की सक्रियता को लेकर।
कांग्रेस के बड़े नेता सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित
दूषित पानी की आपूर्ति से मौतों का सिलसिला जारी रहने के बावजूद मध्यप्रदेश कांग्रेस के बड़े नेता घटनास्थल पर कम दिखाई दे रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह मुख्य रूप से सोशल मीडिया के माध्यम से ही सरकार पर हमला कर रहे हैं।
दिग्विजय सिंह और कमलनाथ ने अब तक इंदौर नहीं जाने के बावजूद प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों को कठघरे में खड़ा किया है। उनके हमले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, अफसरों और मुख्यमंत्री पर केंद्रित हैं।
जीतू पटवारी की सीमित सक्रियता, पंचायत कमेटियों पर फोकस
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, जो इंदौर जिले की राऊ सीट से विधायक रहे हैं, 30 दिसंबर को इंदौर गए और दूषित पानी से मृत लोगों के परिजनों से मुलाकात की। इसके बाद से वे पार्टी के संगठनात्मक काम, खासकर पंचायत कमेटियां बनाने में व्यस्त बताए जा रहे हैं।
पटवारी का कहना है कि कांग्रेस लगातार इस मुद्दे को उठा रही है और यदि जल्द गंभीर कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी प्रदर्शन करेगी। हालांकि, स्थानीय स्तर पर उनकी सीमित मौ现场 उपस्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की भूमिका पर प्रश्न
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी मुख्यतः सोशल मीडिया के माध्यम से सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट और एक वीडियो के जरिए सरकार और संबंधित मंत्री पर सवाल उठाए तथा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। मैदान पर उनकी उपस्थिति न के बराबर होने की वजह से विपक्ष की भूमिका पर चर्चा तेज है।
विपक्ष की भूमिका में सत्तापक्ष के नेता
इस मामले में एक खास स्थिति यह भी रही कि जिम्मेदारों की खुली आलोचना कई बार भाजपा के नेताओं की ओर से ही देखने को मिली। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि जब उनकी नहीं चली तो वे पद पर रहते हुए सिर्फ बिसलेरी पानी क्यों पीते रहे और जनता के बीच क्यों नहीं गए।
उमा भारती ने इसे “पाप” करार देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में न कोई स्पष्टीकरण होता है और न ही बचाव, केवल प्रायश्चित या दंड संभव है। इससे पहले भी उन्होंने दूषित पानी से हुई मौतों को प्रदेश सरकार और पूरी व्यवस्था के लिए शर्मनाक बताया और कहा कि जीवन की कीमत दो लाख रुपए नहीं हो सकती। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और पीड़ितों से माफी की मांग करते हुए इसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लिए परीक्षा की घड़ी बताया।
इधर, उज्जैन के कांग्रेस नेता और महिला कांग्रेस कार्यकर्ता इंदौर में प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के शीर्ष नेता现场 पर नज़र नहीं आ रहे।
देशभर से राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इंदौर की इस घटना पर देश के कई नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बसपा सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने 2 जनवरी को सोशल मीडिया पर इसे बेहद दुखद और चौंकाने वाली घटना बताया। उन्होंने राज्य सरकार से सख्त कदम उठाने और केंद्र सरकार से भी संज्ञान लेकर प्रभावी कार्रवाई की मांग की, ताकि अन्य राज्यों में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।
ओडिशा के कोरापुट से कांग्रेस सांसद सप्तगिरी शंकर उल्का ने संबंधित मंत्री द्वारा पत्रकार के लिए इस्तेमाल की गई भाषा को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि लगातार आठ साल से सबसे स्वच्छ शहर का पुरस्कार पाने वाले इंदौर में गंदा पानी पीने से लोगों की मौत होना डबल इंजन सरकार की विफलता को उजागर करता है। उन्होंने नगर निगम आयुक्त को ‘प्यादा’ बताते हुए संबंधित मंत्री को सस्पेंड करने और मुख्यमंत्री से इस्तीफा देने की मांग की।
शिवसेना (उद्धव गुट) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि इंदौर को बार-बार बेस्ट क्लीन सिटी का अवॉर्ड मिलना और फिर साफ पीने का पानी जैसी मूलभूत सुविधा का न मिल पाना, न सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए शर्मनाक है। उनके अनुसार, मरने वालों की वास्तविक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। उन्होंने छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस मामले को दबाने की कोशिश की गई थी और कहा कि इतने वर्षों से सरकार में रहने के बावजूद यदि साफ पेयजल उपलब्ध नहीं कराया जा सका तो जवाबदेही तय होनी चाहिए।
बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने बयान देते हुए कहा कि दुर्घटनाएं सुनियोजित नहीं होतीं और राहुल गांधी के पास कोई काम नहीं है, इसलिए वे इस तरह की बातें करते रहते हैं।
कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भुवनेश्वर में कहा कि साफ पेयजल उपलब्ध कराने के मामले में भारत 122 देशों में 120वें स्थान पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस इंदौर को बार-बार स्वच्छ शहर का अवॉर्ड दिया जाता है, वहीं दूषित पानी से दर्जनों लोगों की मौत और डेढ़ हजार से ज्यादा लोगों के अस्पतालों में भर्ती होने की स्थिति बन गई है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा मंत्री पत्रकारों को गालियां देकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।
केंद्रीय जलशक्ति राज्यमंत्री राजभूषण चौधरी ने कहा कि इस घटना से सरकार भी मर्माहत है। उन्होंने इसे पाइपलाइन लीकेज का परिणाम बताया और कहा कि सरकार सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है, हालांकि प्रधानमंत्री के प्रयासों के बावजूद कभी-कभी तकनीकी विफलताओं के कारण ऐसी घटनाएं हो जाती हैं।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि उन्हें पूरे मामले की विस्तृत जानकारी नहीं है, लेकिन अगर दूषित पानी की आपूर्ति हुई है तो सरकार को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं टाली जा सकें।
इंदौर में हालात और स्थानीय टकराव
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से मौतों की संख्या 16 तक पहुंच चुकी है और लगभग 150 लोग अभी भी अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। विभिन्न अस्पतालों के आईसीयू में भर्ती मरीजों को एक ही अस्पताल में शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई है और शनिवार शाम के बाद 12 मरीजों को बॉम्बे हॉस्पिटल के आईसीयू में लाया गया।
इसी बीच, भागीरथपुरा में शनिवार को कांग्रेस और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प भी हुई। हंगामे, नारेबाजी और धक्कामुक्की के चलते अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा और पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर कांग्रेस नेताओं को गाड़ियों में बैठाकर इलाके से दूर ले जाया।
निष्कर्ष: त्रासदी के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों ने साफ पेयजल व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर देशभर के नेता इस घटना पर चिंता और नाराजगी जता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की सीमित जमीनी मौजूदगी विपक्ष की प्रभावी भूमिका पर प्रश्नचिह्न लगा रही है। फिलहाल पीड़ितों के उपचार और दोषियों पर कार्रवाई की मांग के बीच, यह मुद्दा राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में प्रमुख विषय बन गया है।
Gulzar Ahmad