इंदौर में हनी ट्रैप का मामला: शराब कारोबारी से 1 करोड़ की मांग, 5 गिरफ्तार
इंदौर में एक शराब कारोबारी को हनी ट्रैप में फंसाकर ब्लैकमेल करने का मामला सामने आया है। क्राइम ब्रांच ने इस सिलसिले में एक महिला शराब तस्कर, उसके बेटे, एक प्रॉपर्टी कारोबारी और एक हेड कॉन्स्टेबल समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यह गिरोह कारोबारी की निजी तस्वीरें और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर एक करोड़ रुपये की मांग कर रहा था।
मामले की मास्टरमाइंड जेल से मिली प्रेरणा
इस गैंग की मास्टरमाइंड श्वेता विजय जैन बताई जा रही है, जो 2019 के बहुचर्चित हनी ट्रैप केस में सजा काट चुकी है। उसे भी हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस फिलहाल जांच जारी होने की बात कहकर अधिक जानकारी देने से इनकार कर रही है।
शराब तस्कर से हुई थी मुलाकात
डीसीपी (क्राइम) राजेश त्रिपाठी ने बताया कि बाणगंगा इलाके के रहने वाले 45 वर्षीय हितेंद्र सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि द्वारकापुरी निवासी अलका दीक्षित से उनकी जान-पहचान है। अलका अवैध शराब तस्करी से जुड़ी रही है और उसके खिलाफ पहले भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
जमीन सौदों में हिस्सेदारी का दबाव और हनी ट्रैप की साजिश
पुलिस जांच के अनुसार, कारोबारी चिंटू ठाकुर की मुलाकात करीब एक महीने पहले अलका दीक्षित से हुई थी। अलका और उसके साथियों ने कारोबारी पर जमीन के सौदों और व्यापार में 50 फीसदी हिस्सेदारी देने का दबाव बनाया। जब चिंटू ने इनकार किया तो गिरोह ने उसे हनी ट्रैप में फंसाने की साजिश रची। एक युवती के जरिए चिंटू के आपत्तिजनक वीडियो और फोटो तैयार किए गए। इसके बाद अलका, लाखन चौधरी, जयदीप और जितेंद्र पुरोहित ने सुपर कॉरिडोर पर कारोबारी की कार रोककर उसे धमकाया और एक करोड़ रुपये की मांग की। रकम न देने पर वीडियो वायरल कर बदनाम करने की चेतावनी दी गई।
जेल में बने संपर्क और रसूखदारों को फंसाने की ट्रेनिंग
जांच में यह भी सामने आया है कि हनी ट्रैप मामले में जेल जा चुकी श्वेता जैन ने अलका और उसके साथियों को प्रभावशाली लोगों को जाल में फंसाने के तरीके बताए थे। पुलिस को शक है कि यह गिरोह लंबे समय से बड़े कारोबारियों, प्रॉपर्टी डीलरों और राजनीतिक हस्तियों को निशाना बना रहा था।
ड्रग्स और हथियार नेटवर्क से जुड़े तार
डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश कुमार त्रिपाठी के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की। जांच में अलका दीक्षित के ड्रग्स और अवैध हथियार तस्करी से जुड़े लोगों के संपर्क में होने की जानकारी भी सामने आई। इसके बाद 40 से ज्यादा पुलिस अधिकारियों की सात टीमें गठित कर इंदौर और भोपाल में एक साथ छापेमारी की गई, जिसमें पांच मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
उज्जैन के जमीन विवाद से शुरू हुआ पूरा खेल
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अलका दीक्षित का उज्जैन के एक बड़े कारोबारी के साथ जमीन को लेकर विवाद हुआ था। भुगतान न मिलने के बाद उसने हनी ट्रैप गिरोह के जरिए प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाना शुरू किया। गिरोह ने भोपाल, इंदौर और उज्जैन के कई बड़े कारोबारियों और नेताओं से संपर्क बढ़ाकर उन्हें ब्लैकमेल करने की कोशिश की। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस रैकेट में और भी कई लोग शामिल हो सकते हैं।
क्राइम ब्रांच का सीक्रेट मिशन: 40 जवानों की 7 टीमें
हितेंद्र सिंह ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत मिलने के बाद क्राइम ब्रांच ने 'मिशन सीक्रेट' नाम से एक योजना बनाई। 40 चुनिंदा पुलिस जवानों की 7 टीमें बनाई गईं, जिन्होंने रात में दबिश देकर आरोपियों को पकड़ा। इस कार्रवाई में अलका, उसके बेटे जयदीप, प्रॉपर्टी कारोबारी लाखन चौधरी और हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा को गिरफ्तार किया गया।
जांच में पता चला कि इंटेलिजेंस ब्रांच का हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा लगातार अलका के संपर्क में था और उसने कारोबारी को धमकाने की सलाह दी थी। पुलिस ने उसे उसके सरकारी आवास से पकड़ा और उसका लैपटॉप व मोबाइल जब्त कर लिया।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अलका दीक्षित पर 17 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह शराब तस्करी से ड्रग कारोबार में सक्रिय हो गई थी। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और जल्द ही और बड़े खुलासे की उम्मीद है।
Navjeet Kaur