उज्जैन में बाबा महाकाल मंदिर क्षेत्र से जुड़ी जमीन को लेकर उठा विवाद अब केवल एक जमीन सौदे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह भाजपा सरकार और संगठन दोनों के लिए सर दर्द बनता जा रहा है..दरसअल आलोट से भाजपा विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय पर आरोप हैं कि उन्होंने जिस करीब 45 हजार वर्गफीट जमीन की खरीद में हिस्सेदारी की, वह पहले सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज थी और महाकाल मंदिर की पार्किंग उपयोग की भूमि बताई जा रही है..आरोपों के अनुसार यह जमीन यूटोपिया बोटल एंड रिसॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड ने 2 मार्च 2026 को लगभग 3.82 करोड़ रुपए में खरीदी थी..जिसमें विधायक भी पार्टनर हैं..मामला लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू और हाईकोर्ट तक पहुंच भी चुका है..विधायक की सफाई भी आई..बावजूद इसके..इसे लेकर प्रदेश में सियासी घमासान छिड़ गया.. कुछ दिनों पहले महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष के आरोपों से घिरे..बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन के आलोट से बीजेपी विधायक डॉ.चिंतामणि मालवीय पर आरोप महाकाल मंदिर की सरकारी जमीन खरीदने को लेकर हैं..पहले..एक महिला प्रोफेसर के यौन शोषण,प्रताड़ना और एक बुजुर्ग महिला की जमीन पर अवैध कब्जे जैसे..आरोपों के बाद विधायक तब ज्यादा सुर्खियों में आए थे जब आरोप लगाने वाली महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीना बौरासी को 10 करोड़ का नोटिस थमाया था..लेकिन इस बार मामला आस्था का केंद्र महाकाल मंदिर के आस पास की जमीन से जुड़ा होने से ज्यादा तूल पकड़ रहा है..कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से लेकर..नेता अभिनव बरौलिया,अंबिका शर्मा,महिला कांग्रेस अध्यक्ष जहां विधायक मालवीय को निशाने पर लेकर..सरकार को घेरने का प्रयास कर रही है..वहीं..हिंदू उत्सव समिति भी विधायक पर कार्रवाई कराने मैदान में कूद चुकी है..कांग्रेस का आरोप है कि विधायक के जमीन खरीदी मामले की निष्पक्ष जांच हो..पहले विधायक से इस्तीफा लिया जाए..फिर जांच के बाद जो तथ्य सामने आएं सबकुछ जनता के सामने लाया जाए..हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने विधायक पर एक्शन लेने की सलाह भाजपा और सत्ता के शीर्ष लोगों को दी है..हालांकि इधर पूरे मामले को भांपते हुए विधायक डॉ चिंतामणि मालवीय ने भी अपना पक्ष रखा और स्वयं को पाक साफ बताया..विधायक ने तो यहां तक कहा कि उनके बढ़ते राजनैतिक रसूख से घबराए कुछ..लोग उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं..क्योंकि जमीन नियमानुसार खरीदी गई है..हर प्रक्रिया का पालन हुआ है...खैर बात कुछ भी हो लेकिन..इस मामले को लेकर सियासी बयानबाजी तेज है..और तमाम कयास भी लगाए जा रहे हैं. यहां कांग्रेस यानी विपक्ष का सीधा सवाल है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल लगातार संगठन और सरकार में नेताओं को अनुशासन, सुशासन और जवाबदेही का संदेश देने में जुटे हैं..मंत्रियों की परफॉर्मेंस समीक्षा से लेकर पदाधिकारियों को अनुशासन का पाठ पढ़ाने तक..भाजपा नेतृत्व यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि सरकार की छवि सर्वोपरि है..ऐसे में यदि भाजपा विधायक पर सरकारी जमीन को निजी बताकर खरीदने जैसे आरोप लगते हैं, तो उसकी भी जांच होगी...हालांकि यहां सवाल केवल विपक्ष के आरोपों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि जनता यह भी समझ रही कि बीजेपी जिस तरह अनुशासनहीन नेताओं पर कार्रवाई का डंडा चलाकर उदाहरण पेश कर रही है..वो ऐसे मामलों पर क्या रुख अपनाती है..क्योंकि महाकाल मंदिर की आस्था और उससे जुड़ी जमीन का विषय स्वाभाविक रूप से संवेदनशील है..मामला केवल कानूनी नहीं, भावनात्मक और राजनीतिक रूप से भी बड़ा बनता जा रहा है. बहरहाल यह जमीन मामले का उठा विवाद अब केवल एक सत्तापक्ष विधायक की सफाई या विपक्ष के आरोपों का मामला नहीं रहा..बल्कि यह उस राजनीतिक नैतिकता की भी परीक्षा पर भी सवाल उठाने वाला हो चुका है जिसका दावा भाजपा संगठन और सरकार लगातार करती रही है..इसलिए अब इंतजार सत्ता के एक्शन और रिएक्शन का ही है..यहां यह भी जानना जरूरी है कि ये बीजेपी विधायक चिंतामणि मालवीय वही हैं जो पहले भी अपनी ही सरकार की मंशा पर अपनी शंका..जता चुके हैं वो भी सदन के भीतर..
चिंतामणि ने क्यों बढ़ाई..अपनी चिंता..बुरे फंसे विधायक?...अब सरकार के एक्शन..संगठन के रिएक्शन का इंतजार! (लोकायुक्त,ईओडब्ल्यू और हाईकोर्ट तक पहुंची शिकायतें )..बात पते की..( महेंद्र विश्वकर्मा)