राज्यसभा में जहरीले कफ सिरप और दवाओं की मिलावट का मुद्दा उठा
कांग्रेस सांसद विवेक के. तन्खा ने राज्यसभा में छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से 35 से अधिक बच्चों की दर्दनाक मौत का मामला उठाया। उन्होंने इस हृदयविदारक कांड और दवाओं की गुणवत्ता को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किए, जिसमें नियामक खामियों को उजागर करने की बात कही गई।
केंद्र सरकार का जवाब और कार्रवाई
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने तन्खा के सवालों के जवाब में कफ सिरप विवाद और देश भर में खाद्य एवं औषधि सुरक्षा पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि छिंदवाड़ा जैसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए देश भर में 1100 से अधिक कफ सिरप निर्माताओं की गहन जांच की गई है।
दवा विनिर्माताओं पर नकेल
मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2022 से अब तक 960 औषधि परिसरों का जोखिम-आधारित निरीक्षण किया गया है। इन निरीक्षणों में कमियां पाए जाने पर 860 से अधिक दंडात्मक कार्रवाइयां की गईं, जिनमें लाइसेंस रद्द करना और उत्पादन रोकना शामिल है।
राज्यों में मिलावट के खिलाफ कार्रवाई: उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश
खाद्य सुरक्षा एवं मानक (FSS) अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई में, उत्तर प्रदेश ने देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक मामले दर्ज किए हैं। वर्ष 2024-25 में उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 30,380 खाद्य नमूनों का विश्लेषण किया गया। इसी अवधि में राज्य में 14,920 सिविल मामलों में शास्ति (पेनल्टी) लगाई गई, जो देश में सबसे ज्यादा है। पिछले तीन वर्षों में उत्तर प्रदेश में कुल 629 आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि (सजा) हुई है।
मध्य प्रदेश में भी मिलावटखोरों के विरुद्ध अभियान तेज रहा है। पिछले तीन सालों में एमपी में 40 हजार से ज्यादा फूड आइटम्स की जांच की गई। वर्ष 2022 से 2025 के बीच कुल 40,425 खाद्य नमूनों की जांच की गई। इन तीन वर्षों में कुल 6,443 सिविल मामलों में जुर्माना लगाया गया और 139 आपराधिक मामलों में सजा सुनाई गई। मानकों का पालन न करने वाले खाद्य व्यवसाय संचालकों पर कार्रवाई करते हुए मध्य प्रदेश में पिछले तीन सालों में कुल 35 लाइसेंस रद्द किए गए हैं।
औषधि सुरक्षा के लिए अन्य प्रमुख कदम
खाद्य पदार्थों के अलावा, औषधि सुरक्षा के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। दिसंबर 2022 से 960 से अधिक परिसरों का निरीक्षण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 860 से अधिक कार्रवाई (कारण बताओ नोटिस, उत्पादन रोकना, लाइसेंस रद्द करना आदि) की गई हैं। राज्य अधिकारियों के साथ मिलकर 1100 से अधिक कफ सिरप निर्माताओं की बारीकी से जांच की गई है ताकि दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
Vivek Singh