मुख्यमंत्री की सुरक्षा में चूक और रंगपंचमी गेर में हुए हादसे पर सवाल
रंगपंचमी पर गेर के दौरान पटाखे छोड़े जाने से आठ लोगों के झुलसने की घटना में आरोपी इवेंट संचालकों पर पुलिस ने सिर्फ जमानती धारा में केस दर्ज किया है। यह घटना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंच से महज 15 फीट की दूरी पर हुई, जिससे उनकी सुरक्षा में भी बड़ी चूक मानी जा रही है। इस हादसे में घायल हुए आठ लोगों में से दो का इलाज अभी भी इंदौर में चल रहा है।
आरोपियों पर जमानती धारा और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल
पुलिस ने इस मामले में इवेंट संचालक मुजीब, शाहनवाज और उनके सहयोगी कर्मचारी शरीक को हिरासत में लिया। इन तीनों ने बिना अनुमति के भीड़भाड़ वाली जगह पर पटाखे छोड़े, जिससे कई लोगों की जान खतरे में पड़ गई। हालांकि, पुलिस ने इन आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 151 के तहत जमानती अपराध दर्ज किया। इन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया। एडिशनल एसपी गुरुप्रसाद पाराशर ने मामले की जानकारी देने में असमर्थता जताई।
विशेषज्ञों की राय: गैर-जमानती धारा की आवश्यकता
सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट वीरेंद्र शर्मा ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि सीएम की सुरक्षा को अनदेखा कर सैकड़ों लोगों की भीड़ में बिना अनुमति पटाखे छोड़ने से मानवीय जीवन संकट में पड़ा। उनके अनुसार, ऐसे गंभीर मामले में आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती बीएनएस की धारा 150 में कार्रवाई की जानी चाहिए थी, जिसमें दस साल तक की सजा का प्रावधान है। पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जीवन को संकट में डालने जैसे गंभीर अपराध के लिए हल्की धाराएं लगाई गईं।
अनसुलझे प्रश्न: आयोजकों को किसने बुलाया?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इवेंट संचालकों को गेर में पटाखे छोड़ने के लिए किस मंच या संस्था ने बुलाया था। एक लोकेश नाम भी सामने आया था, लेकिन कार्रवाई सिर्फ तीन लोगों पर हुई। नीलगंगा पुलिस इस संबंध में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाई है, जिससे मामले की तह तक पहुंचने में और भी देरी होने की आशंका है।
Adarsh Chaurasiya