कानून के शासन में बुलडोजर की जगह नहीं: CJI गवई
भारतीय सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) बीआर गवई ने शुक्रवार को मॉरीशस में आयोजित सर मॉरिस रॉल्ट मेमोरियल लेक्चर 2025 के दौरान एक अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था कानून के शासन (रूल ऑफ लॉ) के आधार पर चलती है और इसमें मनमानी कार्यवाही, जैसे बुलडोजर एक्शन, की कोई जगह नहीं है।
बुलडोजर कार्यवाही संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन
CJI गवई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी आरोपी के खिलाफ बुलडोजर चलाना कानून की प्रक्रिया का उल्लंघन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार एक समय में जज, जूरी और जल्लाद की भूमिका नहीं निभा सकती। इस तरह की कार्यवाही संविधान के अनुच्छेद 21, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा का अधिकार प्रदान करता है, के खिलाफ है।
महत्वपूर्ण फैसलों का उल्लेख
अपने भाषण में CJI गवई ने तीन तलाक को खत्म करने, व्यभिचार कानून के निरस्तीकरण, चुनावी बॉन्ड स्कीम और निजता को मौलिक अधिकार घोषित करने जैसे सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन फैसलों ने दिखाया है कि अदालत ने रूल ऑफ लॉ को एक ठोस सिद्धांत के रूप में स्थापित किया है, जिससे अन्यायपूर्ण और मनमाने कानून समाप्त हो सके।
रूल ऑफ लॉ का नैतिक और सामाजिक महत्व
CJI ने कहा कि भारत में रूल ऑफ लॉ केवल नियमों का एक सेट नहीं है, बल्कि यह एक नैतिक और सामाजिक ढांचा है, जो समानता, गरिमा और सुशासन सुनिश्चित करता है। उन्होंने महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनका दृष्टिकोण लोकतंत्र में कानून के शासन को प्राथमिकता देता है, जो समाज को न्याय और जवाबदेही की ओर ले जाता है।
पिछले फैसले और टिप्पणियां
24 सितंबर को CJI गवई ने कहा था कि बुलडोजर एक्शन के खिलाफ आदेश देना उनके लिए संतोषजनक था। उन्होंने बताया कि किसी परिवार को उसके एक सदस्य की गलती के लिए परेशान नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2024 में बुलडोजर एक्शन को लेकर कड़े निर्देश दिए थे। कोर्ट ने कहा था कि बिना नोटिस के निर्माण गिराने पर अधिकारी को खुद खर्च वहन करना होगा।
लोकतंत्र में न्यायपालिका की भूमिका
CJI गवई ने अपने पिछले बयानों में भी न्यायपालिका की सक्रियता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि संविधान और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालयों की सक्रियता आवश्यक है, लेकिन इसे न्यायिक आतंकवाद में नहीं बदला जा सकता।
मॉरीशस में इस भाषण के दौरान वहां के राष्ट्रपति धरमबीर गोखूल, प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम और मुख्य न्यायाधीश रेहाना मंगली गुलबुल भी मौजूद थे।
इस तरह, CJI गवई के विचार भारत में न्यायिक प्रणाली और कानून के शासन के महत्व को रेखांकित करते हैं, जो लोकतंत्र को मजबूत और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है।