कड़ाके की सर्दी से ठिठुरा मध्यप्रदेश, 26 शहरों में पारा 10° से नीचे, शीतलहर अलर्ट

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कड़ाके की सर्दी से ठिठुरा मध्यप्रदेश, 26 शहरों में पारा 10° से नीचे, शीतलहर अलर्ट

मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड, कई शहरों में शीतलहर का प्रकोप

सर्द हवाओं के चलते पूरा मध्यप्रदेश कड़ी ठंड की चपेट में है। प्रदेश के 26 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज हुआ है और कई जगहों पर शीतलहर तथा ठंडा दिन की स्थिति बनी हुई है।

अगले दो दिन शीतलहर का अलर्ट

मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए शीतलहर को लेकर अलर्ट जारी किया है। रविवार को भोपाल, सीहोर और राजगढ़ में शीतलहर चलने की संभावना जताई गई है। सोमवार को भोपाल, राजगढ़, शाजापुर, सीहोर, सिवनी और शहडोल में कोल्ड वेव की स्थिति रहने की आशंका है।

उत्तर से आ रही ठंडी हवाओं का असर

मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के कारण हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में हुई बर्फबारी व बारिश से उठी ठंडी हवाएं मध्यप्रदेश में पहुंच रही हैं। पिछले दो दिनों से इन हवाओं का असर लगातार दिख रहा है। बीते 24 घंटों के दौरान भोपाल, राजगढ़, सीहोर, शाजापुर और शहडोल में शीतलहर देखी गई, जबकि इंदौर, सिवनी, शाजापुर, नरसिंहपुर और बैतूल में ठंडा दिन दर्ज हुआ।

ग्वालियर, चंबल, उज्जैन और सागर संभाग में सबसे ज्यादा ठंड

ग्वालियर, चंबल, उज्जैन और सागर संभाग में शीतलहर का असर सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। उत्तर दिशा से सीधी ठंडी हवाएं इन हिस्सों में पहुंच रही हैं, जिससे यहां दिन और रात दोनों ही समय तापमान अन्य जिलों की तुलना में अधिक नीचे बना हुआ है।

सीजन में पहली बार पारा 5 डिग्री से नीचे

शुक्रवार-शनिवार की रात को इस सीजन में पहली बार मध्यप्रदेश के कुछ इलाकों में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया। कुल 26 शहरों में पारा 10 डिग्री से कम रहा। शहडोल के कल्याणपुर में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री दर्ज हुआ, जो प्रदेश में सबसे कम रहा। उमरिया में 4.8 डिग्री, राजगढ़ में 5 डिग्री, रीवा में 5.4 डिग्री, नौगांव (छतरपुर) में 5.7 डिग्री और खजुराहो में 6.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

रायसेन में 7.4 डिग्री, दमोह और सतना में 7.5 डिग्री, मंडला में 8 डिग्री, मलाजखंड में 8.1 डिग्री, दतिया में 8.3 डिग्री, गुना में 8.4 डिग्री, बैतूल में 8.5 डिग्री, सीधी में 8.6 डिग्री, छिंदवाड़ा में 8.8 डिग्री, धार में 9.1 डिग्री, श्योपुर, सिवनी और नरसिंहपुर में 9.4 डिग्री तथा सागर में 9.9 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज हुआ।

बड़े शहरों में भी तेज ठंड

मुख्य शहरों की बात करें तो इंदौर में न्यूनतम तापमान 6.2 डिग्री, भोपाल में 8.2 डिग्री, ग्वालियर में 7.6 डिग्री, उज्जैन में 10 डिग्री और जबलपुर में 7.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इससे साफ है कि प्रदेश के बड़े शहर भी कड़ाके की ठंड झेल रहे हैं।

दिन के तापमान में भी गिरावट

रात के साथ-साथ दिन में भी ठंड में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। शनिवार को अधिकांश शहरों में अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। सबसे ठंडा बालाघाट का मलाजखंड रहा, जहां दिन का तापमान 21.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सिवनी में 23.2 डिग्री, रीवा, बैतूल और नरसिंहपुर में 24 डिग्री, पचमढ़ी में 24.2 डिग्री, धार और श्योपुर में 24.4 डिग्री, जबकि भोपाल और सीधी में 24.6 डिग्री तथा दतिया और टीकमगढ़ में 24.7 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान रिकॉर्ड हुआ।

नवंबर में रिकॉर्ड तोड़ ठंड, दिसंबर में भी कड़ाके की संभावना

मौसम विभाग के अनुसार इस बार सर्दी का असर सामान्य से अधिक तेज है। भोपाल में नवंबर की ठंड ने 84 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है और इंदौर में भी पिछले 25 साल की तुलना में सबसे ज्यादा ठंड दर्ज की गई है। अनुमान है कि दिसंबर में भी इसी तरह की कड़ाके की सर्दी बनी रह सकती है।

नवंबर में भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली, जो 1931 के बाद सबसे लंबा दौर रहा। 17 नवंबर की रात को भोपाल में तापमान 5.2 डिग्री तक गिरा, जो वहां का ओवरऑल रिकॉर्ड बन गया। इससे पहले 30 नवंबर 1941 को 6.1 डिग्री दर्ज हुआ था। इंदौर में भी इस दौरान तापमान 6.4 डिग्री तक पहुंचा, जो इस सीजन की सबसे सर्द रात रही।

सर्दी बढ़ने के पीछे मौसमीय कारण

सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के अनुसार इस बार उत्तरी राज्यों में नवंबर के पहले सप्ताह से ही बर्फबारी शुरू हो गई थी। इसके कारण ठंडी हवाएं जल्दी मध्यप्रदेश तक पहुंचीं। हालांकि नवंबर के अंतिम सप्ताह में हवा की दिशा बदलने से ठंड का असर कुछ कम हुआ, लेकिन कुल मिलाकर सर्दी का दौर सामान्य से अधिक तेज रहा।

दिसंबर-जनवरी: सबसे ठंडे महीने

मौसम विभाग का कहना है कि जैसे मानसून के चार महीनों में जुलाई और अगस्त सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, वैसे ही सर्दी के लिए दिसंबर और जनवरी अहम माने जाते हैं। इन दो महीनों में उत्तर भारत से ठंडी हवाएं अधिक मात्रा में आती हैं, जिससे तापमान में तेज गिरावट और शीतलहर की स्थिति बनती है। पिछले 10 साल के आंकड़े भी इसी ट्रेंड की पुष्टि करते हैं। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय रहने से दिसंबर में मावठा (बारिश) भी होती है, जिससे दिन में भी ठंड बढ़ जाती है।

दिसंबर में ठंड का संभावित ट्रेंड

मौसम के रुझान के अनुसार दिसंबर में मजबूत पश्चिमी विक्षोभ आने की संभावना रहती है। इसके साथ ही उत्तरी हवाओं के कारण दिन और रात के तापमान में गिरावट होती है। इस बार भी इसी तरह की स्थिति बनने का अनुमान जताया जा रहा है।

लंबे समय तक चल सकती है कोल्ड वेव

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक दिसंबर में प्रदेश के कई शहरों में कोल्ड वेव का असर रहेगा, जबकि जनवरी में शीतलहर का यह दौर 20 से 22 दिन तक चल सकता है।

कड़ाके की ठंड के प्रमुख कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार ला नीना की स्थिति ने ठंड को लंबा और अधिक प्रभावी बनाया है। पहाड़ों पर जल्दी बर्फबारी होने से ठिठुरन बढ़ी, ठंडी हवाएं सामान्य से लगभग 25 प्रतिशत अधिक अंदर तक पहुंचीं और पश्चिमी विक्षोभ लगातार सक्रिय रहा। इन सभी कारणों से प्रदेश में सर्दी का दौर ज्यादा कड़ा और लंबा रहने की संभावना है।

भोपाल में दिसंबर का तापमान और बारिश का ट्रेंड

भोपाल में दिसंबर के महीने में दिन और रात दोनों समय ठंड और हल्की बारिश का ट्रेंड देखा गया है। पिछले 10 में से 5 साल में दिसंबर में यहां आधा से तीन-चौथाई इंच तक बारिश हो चुकी है। रिकॉर्ड के अनुसार 11 दिसंबर 1966 को न्यूनतम तापमान 3.1 डिग्री दर्ज हुआ था, जो अब तक का सबसे कम तापमान है। वर्ष 2021 में भी तापमान 3.4 डिग्री तक पहुंच चुका है।

इंदौर में दिसंबर की ठंड

इंदौर में दिसंबर में रात का तापमान आमतौर पर 5 से 8 डिग्री के बीच रहता है। पिछले वर्ष यह 8.6 डिग्री तक दर्ज हुआ। पिछले 10 साल में दिन का अधिकतम तापमान सामान्यतः 28 से 31 डिग्री के बीच रहा है। इस महीने इंदौर में भी बारिश होती रही है और पिछले चार साल से दिसंबर में लगातार बारिश रिकॉर्ड की गई है।

31 दिसंबर 2015 को दिन का अधिकतम तापमान 33 डिग्री दर्ज हुआ था, जबकि 27 दिसंबर 1936 की रात को तापमान 1.1 डिग्री तक गिरा था। वर्ष 1967 में दिसंबर महीने में कुल 108.5 मिमी (करीब 4.2 इंच) बारिश हुई, जो रिकॉर्ड है। 17 दिसंबर 2009 को 24 घंटों में 53 मिमी (लगभग 2.1 इंच) बारिश दर्ज की गई थी।

ग्वालियर: दिन में गर्माहट, रात में कड़ी ठंड

ग्वालियर में पिछले 10 साल में दिसंबर के दौरान दिन का अधिकतम तापमान 26.2 से 31.6 डिग्री के बीच रहा है, जबकि रात में न्यूनतम तापमान 1.8 से 6.9 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। 6 दिसंबर 2006 को दिन का तापमान 32.1 डिग्री तक पहुंचा था। 26 दिसंबर 1961 को न्यूनतम तापमान 0.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो यहां का रिकॉर्ड है। वर्ष 1997 में कुल दिसंबर माह में 106.6 मिमी (करीब 4.1 इंच) बारिश हुई थी और 13 दिसंबर 2013 को 24 घंटे में 32.1 मिमी (लगभग 1.2 इंच) बारिश रिकॉर्ड की गई।

जबलपुर में तेज सर्दी और बारिश का रुझान

जबलपुर में दिसंबर में ठंड के साथ बारिश होने का भी ट्रेंड है। 28 दिसंबर 1960 को दिन का अधिकतम तापमान 33.2 डिग्री दर्ज हुआ था। 28 दिसंबर 1902 की रात में न्यूनतम तापमान 0.6 डिग्री दर्ज हुआ, जो वहां का ओवरऑल रिकॉर्ड है। वर्ष 1885 में दिसंबर के महीने में सर्वाधिक 125 मिमी (करीब 4.9 इंच) बारिश रिकॉर्ड की गई थी, जबकि 16 दिसंबर 1885 को 24 घंटे में 68.1 मिमी (लगभग 2.6 इंच) बारिश का रिकॉर्ड है।

उज्जैन में कड़ाके की ठंड और बारिश

उज्जैन में दिसंबर महीने में दिन का औसत तापमान 28.2 डिग्री और रात का औसत तापमान 9.4 डिग्री सेल्सियस रहता है। इस दौरान औसतन 4.6 मिमी बारिश होती है और पिछले पांच साल से दिसंबर में यहां लगातार बारिश दर्ज हो रही है। 18 दिसंबर 2002 को दिन का तापमान 34.9 डिग्री तक पहुंचा, जो ओवरऑल रिकॉर्ड है। 28 दिसंबर 1968 और 29 दिसंबर 1983 को रात में न्यूनतम तापमान 0.5 डिग्री तक गिरा था।

वर्ष 1997 में उज्जैन में दिसंबर माह की कुल मासिक बारिश 119.4 मिमी (करीब 4.7 इंच) रही। 11 दिसंबर 1967 को 24 घंटे में 35.3 मिमी (लगभग 1.3 इंच) बारिश दर्ज की गई, जो सबसे अधिक है।

निष्कर्ष: सर्दी का दौर लंबे समय तक रहने के आसार

कुल मिलाकर, पश्चिमी विक्षोभ, ला नीना, पहाड़ी राज्यों में जल्दी बर्फबारी और उत्तर से आने वाली प्रबल ठंडी हवाओं के कारण मध्यप्रदेश में इस बार सामान्य से अधिक कड़ाके की ठंड देखी जा रही है। नवंबर में रिकॉर्ड टूटने के बाद दिसंबर और जनवरी में भी लंबे समय तक शीतलहर और ठंडा दिन रहने की संभावना जताई जा रही है, जिससे लोगों को ठंड से बचाव के विशेष उपाय करने की जरूरत होगी।

Lokendra Mishra