केन-बेतवा लिंक परियोजना का काम ठप: छतरपुर में आदिवासियों और किसानों का उग्र प्रदर्शन

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केन-बेतवा लिंक परियोजना  का काम ठप: छतरपुर में आदिवासियों और किसानों का  उग्र प्रदर्शन

छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना का काम दूसरे दिन भी ठप, आदिवासियों का भारी प्रदर्शन

बुंदेलखंड की प्यास बुझाने के उद्देश्य से शुरू की गई केन-बेतवा लिंक परियोजना वर्तमान में बड़े जनविरोध का केंद्र बन गई है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के बिजावर अनुविभाग में हजारों की संख्या में आदिवासी किसान, महिलाएं और ग्रामीण ढोढन बांध स्थल पर धरने पर बैठ गए हैं। इस विरोध प्रदर्शन के कारण परियोजना का निर्माण कार्य लगातार दूसरे दिन भी पूरी तरह ठप रहा। आंदोलनकारियों ने मशीनों के सामने खड़े होकर काम बंद करवा दिया है।

आंदोलन का कारण और ग्रामीणों की मांगें

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे समाजसेवी अमित भटनागर के अनुसार, आदिवासी और ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर दिल्ली जा रहे थे, लेकिन प्रशासन द्वारा उन्हें रास्ते में ही रोक दिया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें रास्ते में प्रताड़ित किया गया और उनका राशन भी छीन लिया गया, जिसके बाद इस आंदोलन ने उग्र रूप धारण कर लिया। ग्रामीण अब "जल, जंगल, जमीन" की रक्षा के लिए बांध स्थल पर ही डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह उनके अस्तित्व की लड़ाई है और जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, निर्माण कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा।

परियोजना की रूपरेखा और पर्यावरणीय चिंताएं

यह विरोध प्रदर्शन केन नदी पर प्रस्तावित 77 मीटर ऊंचे और 213 किलोमीटर लंबे ढोढन बांध के निर्माण को लेकर हो रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत केन और बेतवा नदियों को जोड़ने के लिए 221 किलोमीटर लंबी नहर और 2 किलोमीटर की टनल बनाई जानी है। निर्माण कार्य पन्ना नेशनल पार्क के कोर क्षेत्र के पास होने के कारण विस्थापन और पर्यावरण संरक्षण के गंभीर मुद्दे भी सामने आ रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन पर झूठे आश्वासन देने और कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सटई तहसील के तहसीलदार इंद्र कुमार गौतम ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। प्रशासन का कहना है कि वे लगातार संवाद कर रहे हैं और जल्द ही समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। फिलहाल बांध स्थल पर सुरक्षा की दृष्टि से भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, जबकि आंदोलनकारी न्याय न मिलने तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

Pushpendra Chaubey