केंद्र से मध्य प्रदेश को केवल 22 फीसदी फंड, कई योजनाओं पर संकट
मध्य प्रदेश को चालू वित्त वर्ष में केंद्र सरकार से मिलने वाली कुल 44,355.83 करोड़ रुपए की राशि में से अब तक केवल 9,753.05 करोड़ रुपए ही जारी हुए हैं। यानी लगभग 22 फीसदी फंड ही राज्य को मिल सका है। इसके चलते जल, स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास, शहरी विकास और जनजातीय कल्याण जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
किसान कल्याण और ग्रामीण विकास से 7,774.54 करोड़ पर रोक
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मंत्रालय से मध्य प्रदेश के लिए स्वीकृत 7,774.54 करोड़ रुपए अब तक जारी नहीं हुए हैं। राज्य में किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग के मंत्री एदल सिंह कंसाना के विभाग को परम्परागत कृषि विकास योजना के तहत 29.95 करोड़ और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 165 करोड़ रुपए मिलने थे, लेकिन एक भी रुपया नहीं आया है। कुल 996.34 करोड़ की स्वीकृति होने के बावजूद राशि राज्य को नहीं मिल पाई है।
ग्रामीण विकास विभाग के तहत पीएम जनमन योजना (आवास) के लिए 660 करोड़ और पीएम जनमन योजना (सड़क) के लिए 633.60 करोड़ रुपए देने का प्रावधान है। पीएम आवास ग्रामीण के लिए 2,640 करोड़, निर्मल भारत अभियान के लिए 356.41 करोड़, पीएम कृषि सिंचाई योजना (वाटरशेड विकास) के लिए 164.88 करोड़ और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के लिए 480 करोड़ का प्रावधान है। इनमें से केवल पीएम आवास योजना के लिए 1,987.16 करोड़, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के लिए 80.34 करोड़ और मनरेगा में 3,160 करोड़ के बदले 533.21 करोड़ तथा पीएम पोषण शक्ति निर्माण के लिए 576 करोड़ में से 348.57 करोड़ मिले हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और कुछ अन्य मदों में एक भी रुपया नहीं मिला है।
जल जीवन मिशन और जल संसाधन योजनाएं ठप
पीएचई विभाग को जल जीवन मिशन के लिए 8,561.22 करोड़ की राशि मिलनी थी, पर 10 माह में एक भी रुपया जारी नहीं हुआ। विभाग की मंत्री संपतिया उइके फंड लाने में सफल नहीं रहीं, और उन पर कमीशनखोरी के आरोपों की शिकायत के बाद विभागीय इंजीनियर-इन-चीफ जांच के आदेश दे चुके हैं। विभाग में कथित घोटालों के कारण मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कुछ एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने और इंजीनियरों को नोटिस जारी करने की कार्रवाई भी की है।
जल संसाधन विभाग को केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना के लिए 630 करोड़ और बांधों से संबंधित कार्यों के लिए 290 करोड़ रुपए देने की बात है, लेकिन अभी तक एक रुपया भी जारी नहीं हुआ है।
ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा और आयुष विभाग को भी इंतजार
ऊर्जा विभाग को आरडीएसएस (रीवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम) के तहत 1,736.33 करोड़ रुपए मिलने हैं, पर अब तक कोई राशि नहीं मिली। नवकरणीय ऊर्जा विभाग को प्रधानमंत्री जनमन कार्यक्रम के अंतर्गत विद्युतीकरण के लिए 8.99 करोड़ मिलना था, जो जारी नहीं हुआ है। आयुष विभाग को राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत 93.42 करोड़ रुपए मिलने हैं, जिनका इंतजार है।
स्वास्थ्य और मेडिकल ढांचे के लिए पर्याप्त फंड नहीं
डिप्टी सीएम और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल केंद्र से तय राशि लाने में सफल नहीं हो पाए हैं। उप स्वास्थ्य केंद्रों के लिए 724 करोड़, सिकल सेल एनीमिया के लिए 23.28 करोड़, नए नर्सिंग कॉलेज निर्माण के लिए 37.50 करोड़, जिला स्तरीय स्वास्थ्य अमले के लिए 97.24 करोड़, एमबीबीएस सीटों में वृद्धि के लिए 90 करोड़ और पीएम जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के लिए 765.96 करोड़ रुपए का प्रावधान था, लेकिन इन मदों में एक भी रुपया नहीं मिला है।
मेडिकल कॉलेजों में पीजी पाठ्यक्रम के लिए 150 करोड़ और नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए 250 करोड़ रुपए देने की बात है, पर राशि जारी नहीं की गई। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में 2,652.94 करोड़ के बदले 1,035.58 करोड़ मिले हैं। वहीं प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के लिए 285.80 करोड़ के बदले 521.87 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं, जो स्वीकृत राशि से अधिक है।
नगरीय विकास, पीएम आवास अर्बन और ई-बस योजनाएं प्रभावित
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अपने विभाग के लिए फंड लाने में सफल नहीं रहे हैं। विभाग को केवल उज्जैन स्मार्ट सिटी के लिए 5 करोड़ की सहायता मिली है। इसके अलावा पीएम आवास योजना (अर्बन) बीएलसी के लिए 600 करोड़, पीएम आवास योजना (अर्बन) एएचपी के लिए 150 करोड़, हाउसिंग फॉर ऑल के लिए 250.86 करोड़, अटल मिशन फॉर रिजूवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन 2.0 के लिए 471 करोड़ और पीएम ई-बस सेवा के लिए 65.99 करोड़ रुपए में से एक भी रुपया जारी नहीं हुआ है। शहरी स्वच्छ मिशन 2.0 आईईसी के 48 करोड़ में से भी कोई राशि नहीं मिली।
स्कूल शिक्षा, पीएमश्री, समग्र शिक्षा और न्यायिक ढांचे को कम आवंटन
स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह के विभाग को पीएमश्री विद्यालयों के लिए तय 258 करोड़ रुपए में से कोई राशि नहीं मिली है। समग्र शिक्षा अभियान के लिए 3,321.99 करोड़ में से केवल 1,460.75 करोड़ जारी हुए हैं, जबकि स्टार्स परियोजना के 100.80 करोड़ में से भी कुछ नहीं मिला।
विधि और विधायी कार्य विभाग को पोक्सो एक्ट के तहत फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना के लिए 101.47 करोड़ रुपए मिलने थे, जिनमें से केवल 15.28 करोड़ ही जारी हुए हैं।
महिला और बाल विकास योजनाओं को भी पूरा फंड नहीं
महिला और बाल विकास विभाग को पीएम मातृ वंदना योजना के अंतर्गत 211.20 करोड़ मिलने थे, जिनमें से 55.26 करोड़ ही मिले हैं। न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम विशेष पोषण आहार योजना में 583 करोड़ की मांग के बावजूद एक भी रुपया नहीं मिला।
आंगनवाड़ी सेवाओं के तहत सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के लिए 3,263.59 करोड़ रुपए देने की बात थी, लेकिन अब तक 759.29 करोड़ ही जारी हुए हैं। पोषण अभियान के तहत सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के लिए 133.86 करोड़ की स्वीकृति के बावजूद राशि नहीं दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, विभाग की मंत्री निर्मला भूरिया इस संबंध में केंद्र में प्रयास करने भी नहीं गईं।
जनजातीय कार्य विभाग की योजनाएं लंबित
जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के विभाग को धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के लिए 200 करोड़, माडा पैकेट में क्लस्टर स्तर पर स्थानीय विकास के लिए 259 करोड़, पीएम जनमन बहुउद्देशीय केंद्र निर्माण योजना के लिए 49 करोड़, अनुसूचित जनजाति उपयोजना क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए 150 करोड़ और विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए 100 करोड़ मिलने थे। इन सभी मदों में अब तक एक भी रुपया जारी नहीं हुआ है।
पेंशन और खाद्य सब्सिडी पर असर
सामाजिक न्याय और निशक्तजन विभाग के मंत्री नारायण सिंह कुशवाह के विभाग को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन के लिए 400 करोड़ में से 157.25 करोड़ और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन के लिए 1,152.19 करोड़ में से 372.88 करोड़ रुपए मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अपेक्षित राशि नहीं मिलने से पेंशन वितरण प्रभावित हो रहा है।
खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग को लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत परिवहन कमीशन खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए 312.50 करोड़ रुपए मिलने थे, लेकिन एक भी रुपया नहीं मिला है।
पंचायत विभाग और अन्य योजनाओं की स्थिति
पंचायत विभाग को ग्राम स्वराज अभियान के लिए 142.95 करोड़ रुपए दिए जाने थे, पर अब तक कोई राशि जारी नहीं हुई है। अन्य विभागों की कई योजनाओं में भी केंद्र से स्वीकृत या प्रस्तावित धनराशि पूर्ण रूप से नहीं पहुंच पाई है।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद फंड संग्रह में सुस्ती
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रियों को कई बार दिल्ली जाकर केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर फंड जारी कराने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके, किसान कल्याण, जल संसाधन, स्वास्थ्य, शिक्षा, नगरीय विकास, महिला और बाल विकास तथा जनजातीय कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग तय राशि का बड़ा हिस्सा केंद्र से नहीं ला पाए हैं, जिसके कारण राज्य की अनेक योजनाएं अधर में हैं।
Vivek Singh