केरल CM चयन में कांग्रेस की उलझन: राहुल-प्रियंका सक्रिय, पर विधायक किसे चाहते हैं, यह तय नहीं
केरल में विधानसभा चुनाव के नतीजे आए 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन कांग्रेस अभी तक मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला नहीं कर पाई है। 12 मई की रात करीब 3 बजे तक मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर चली मैराथन मीटिंग में भी कोई निर्णय नहीं हो सका। राहुल गांधी पिछले तीन दिनों से लगातार केरल के कांग्रेस नेताओं, समर्थकों, दावेदारों और सहयोगी पार्टियों से बातचीत कर रहे हैं। वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी भी इस प्रक्रिया में सक्रिय हैं और कुछ नेताओं से उनकी अलग मुलाकातें भी हुई हैं। पार्टी नेता जयराम रमेश के अनुसार, 14 मई को मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान किया जाएगा।
प्रमुख दावेदार और उनकी स्थिति
मुख्यमंत्री पद के लिए मुख्य रूप से तीन नाम चर्चा में हैं: केसी वेणुगोपाल, वी.डी. सतीशन और रमेश चेन्नीथला। केसी वेणुगोपाल, जो राहुल गांधी के भरोसेमंद माने जाते हैं, उन्हें विधायकों का समर्थन हासिल है। वहीं, राज्य में कांग्रेस के सबसे बड़े नेता और विपक्ष के पूर्व नेता वी.डी. सतीशन को पार्टी समर्थकों का साथ मिल रहा है। रमेश चेन्नीथला, पार्टी के सबसे अनुभवी नेता, तीसरे स्थान पर हैं, लेकिन अगर वेणुगोपाल उनका समर्थन करते हैं तो समीकरण बदल सकते हैं।
हाईकमान का रुख और विधायकों की राय
सूत्रों के अनुसार, हाईकमान किसी भी ऐसे उम्मीदवार को मुख्यमंत्री बनाना चाहता है जो विधायकों पर थोपा हुआ न लगे। राहुल गांधी सभी की सहमति से फैसला लेना चाहते हैं, इसीलिए विधायकों, पार्टी नेताओं और समर्थकों की राय जानने की कोशिश की जा रही है। सहयोगी दलों और सिविल सोसायटी से भी सलाह ली जा रही है। राहुल गांधी चाहते हैं कि यह निर्णय सर्वसम्मति से हो, न कि केवल संख्या बल के आधार पर।
संभावित परिदृश्य
वायनाड में विरोध के संकेत
केरल में कांग्रेस की अंदरूनी कलह का असर वायनाड में भी दिख रहा है, जहाँ राहुल गांधी ने 2019 में बड़ी जीत हासिल की थी। स्थानीय स्तर पर लगे पोस्टरों में "राहुल-प्रियंका वायनाड को भूल जाओ, यहां फिर नहीं जीतोगे" जैसे संदेश लिखे गए हैं। यह संकेत है कि यदि केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाया गया तो स्थानीय समर्थक नाराज हो सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय
वरिष्ठ पत्रकार आदेश रावल के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान के सामने यह संकट है कि वह विधायकों की सुने या समर्थकों की, जिसके कारण निर्णय लेने में देरी हो रही है। राहुल गांधी ऑब्जर्वर भेजकर विधायकों की राय लेना चाहते थे, लेकिन अंतिम फैसला लेने में अब तक सफल नहीं हुए हैं।
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Bhavanesh Soni