कर्नाटक: कांग्रेस विधायक की भतीजी पर ₹70 हजार वेतन बिना ड्यूटी का आरोप

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कर्नाटक: कांग्रेस विधायक की भतीजी पर ₹70 हजार वेतन बिना ड्यूटी का आरोप

कर्नाटक के बागलकोट में सरकारी क्लीनिक की मेडिकल ऑफिसर पर अनियमितता के आरोप

मुख्य आरोप और प्रारंभिक जांच

बागलकोट की वाम्बे कॉलोनी स्थित नम्मा क्लीनिक में कॉन्ट्रैक्ट/आउटसोर्स आधार पर कार्यरत मेडिकल ऑफिसर डॉ. अंकिता यरगल पर आरोप है कि उन्होंने मार्च 2025 से सितंबर 2025 तक ड्यूटी पर उपस्थिति नहीं दी, फिर भी उन्हें प्रतिमाह 70 हजार रुपए से अधिक वेतन मिलता रहा। डॉ. अंकिता बागलकोट के कांग्रेस विधायक उमेश मेटी की भतीजी हैं और उनके पिता राजकुमार यरगल बागलकोट के जिला स्वास्थ्य अधिकारी (DHO) हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डॉ. अंकिता ने मार्च में एसएन मेडिकल कॉलेज में पैथोलॉजी विषय में फुलटाइम पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) में प्रवेश लिया, लेकिन सरकारी नौकरी से इस्तीफा नहीं दिया। अप्रैल 2025 से वे नम्मा क्लीनिक में मेडिकल ऑफिसर के पद पर बनी रहीं। अधिकारियों का कहना है कि इस दौरान क्लीनिक में मेडिकल ऑफिसर के नहीं पहुंचने से मरीजों और स्थानीय लोगों को परेशानी हुई। कॉलेज के प्रिंसिपल ने PG की पढ़ाई की अनुमति दी थी, लेकिन जिला पंचायत CEO गजानन बाले के नोटिस के मुताबिक, कॉलेज की अनुमति से क्लीनिक की ड्यूटी से गैरहाजिरी का मामला खत्म नहीं होता। उनकी अनुपस्थिति और दोहरी व्यस्तता की अलग से जांच की जा रही है।

सुनवाई और आगे की प्रक्रिया

जिला पंचायत CEO ने 15 सितंबर 2025 को मामले की सुनवाई रखी थी, लेकिन डॉ. अंकिता उपस्थित नहीं हुईं। अब उन्हें 18 सितंबर 2025 को सुबह 10 बजे जिला पंचायत कार्यालय के कमरा नंबर 11 में पेश होने का नोटिस दिया गया है। CEO ने कहा है कि अगली सुनवाई में भी गैरहाजिर रहने पर एकतरफा फैसला लिया जा सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, मामले में सरकारी स्वास्थ्य संस्थान के नियमों और डॉक्टरों के पेशेवर आचार नियमों के संभावित उल्लंघन की जांच हो रही है। जांच के बाद जरूरत पड़ने पर मामला कर्नाटक मेडिकल काउंसिल (KMC) और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) को भेजा जा सकता है, जिसके बाद विभागीय और पेशेवर स्तर पर कार्रवाई हो सकती है। DHO राजकुमार यरगल ने 15 सितंबर को कहा कि उनकी बेटी की नियुक्ति उनके DHO बनने से पहले तत्कालीन DHO मंजूनाथ डोड्डेरी ने की थी। उन्होंने दावा किया कि DHO का पद संभालने के बाद उन्होंने डॉ. अंकिता का वेतन जारी नहीं किया और तालुक स्वास्थ्य अधिकारी को उन्हें ड्यूटी से हटाने के निर्देश दिए थे। वहीं, स्थानीय कार्यकर्ता राजू नाइक ने आरोप लगाया कि डॉ. अंकिता ने मार्च में पैथोलॉजी में PG शुरू की, लेकिन सरकारी क्लीनिक की नौकरी से इस्तीफा नहीं दिया।

Arvind Vishwakarma