लाड़ली लक्ष्मी योजना में भारी ड्रॉप-आउट: केवल 20% बेटियां ही पा सकेंगी पूरा लाभ
मध्य प्रदेश में लिंगानुपात में सुधार और बेटियों को 'लखपति' बनाने के उद्देश्य से शिवराज सिंह चौहान द्वारा 2007 में शुरू की गई लाड़ली लक्ष्मी योजना में सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारी ड्रॉप-आउट देखा गया है।
प्राथमिक से माध्यमिक तक पढ़ाई छोड़ने वाली लाड़लियां
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बजट सत्र में प्रस्तुत आंकड़ों से पता चलता है कि कक्षा 5वीं उत्तीर्ण करने के बाद लगभग 52% लाड़लियां पढ़ाई छोड़ रही हैं। नियमों के जाल के कारण, केवल 20% से भी कम बेटियां ही ऐसी बची हैं जो कॉलेज स्तर तक पहुंचकर योजना की पूरी राशि प्राप्त कर सकेंगी।
शिक्षा के विभिन्न स्तरों पर छात्राओं की संख्या
योजना के प्रारंभ से अब तक छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाली बालिकाओं की संख्या में बड़ा अंतर आया है। कक्षा 6वीं में कुल 13,67,897 बालिकाओं को छात्रवृत्ति मिली, लेकिन कक्षा 9वीं तक यह संख्या गिरकर 7,06,123 रह गई, जिसका अर्थ है कि हाई स्कूल तक पहुंचने से पहले लगभग 48% बेटियां सिस्टम से बाहर हो गईं।
हायर सेकेंडरी स्तर पर स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। कक्षा 11वीं में केवल 2,72,443 और कक्षा 12वीं में मात्र 1,56,378 बेटियां ही छात्रवृत्ति की पात्र बची हैं।
'लखपति' बनने की दौड़ में पिछड़ीं 80% बेटियां
स्नातक (कॉलेज) स्तर तक केवल 22,022 बेटियां ही पहुंच पाई हैं। योजना के नियमानुसार, 21 साल की उम्र और कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने पर ही लाड़लियों को 1 लाख 43 हजार रुपए की पूरी मैच्योरिटी राशि मिलती है। वर्तमान आंकड़ों के आधार पर, कुल पंजीकृत लाड़लियों में से 20% से भी कम बेटियां ही इस अंतिम पायदान तक पहुंचती दिख रही हैं।
संख्या घटने का कारण और योजना का लाभ
विभाग ने प्रतिवर्ष पंजीयन की संख्या में कमी का मुख्य कारण 'योजना में पात्रता' को बताया है। नियमानुसार, केवल वही बालिकाएं छात्रवृत्ति की पात्र होती हैं जो कक्षा 5वीं उत्तीर्ण कर 6वीं में प्रवेश लेती हैं और पात्रता की अन्य शर्तें पूरी करती हैं।
महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया के अनुसार, दिसंबर 2025 तक योजना के तहत कुल 813.20 करोड़ रुपए की छात्रवृत्ति वितरित की जा चुकी है। लाड़ली लक्ष्मी को सरकार की ओर से 1 लाख 43 हजार रुपए का आश्वासन प्रमाण पत्र जारी किया जाता है और ग्रेजुएशन की फीस भी सरकार वहन करती है।
L. N. Bhargava