लखनऊ आग में 15 मौतें; परिजन रोए, बेटे की लाश देख पिता बेहोश।

· 1 min read
लखनऊ आग में 15 मौतें; परिजन रोए, बेटे की लाश देख पिता बेहोश।

लखनऊ कोचिंग अग्निकांड: 15 की मौत, पोस्टमॉर्टम के दौरान परिजनों का दर्दनाक मंजर

लखनऊ में कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग में 15 लोगों की जान चली गई। सोमवार देर रात तक शवों का पोस्टमॉर्टम चलता रहा, जो करीब 7 घंटे तक चला। इस दौरान शवों से बहते खून को देखकर परिजन सहम गए और रोने लगे। अपने बेटे नीलेश की लाश देखकर पिता बेहोश हो गए, जबकि बहन चीख-चीखकर रोई और पिता से लिपटकर बोली, "मेरा भाई चला गया। पापा… उठ जाओ।"

केजीएमसी ट्रॉमा सेंटर में पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। पश्चिम बंगाल से सौमल्या-अनामिका और मध्य प्रदेश से जैनी के परिजन मंगलवार सुबह लखनऊ पहुंचे। अनामिका की मां अपनी बेटी का शव देखकर रोते-रोते बेहोश हो गईं।

बच्चों ने घर पर लगाई मदद की गुहार

छह परिजनों से बातचीत में उन्होंने बताया कि आग में फंसने के बाद बच्चों ने घर पर फोन कर आग लगने की जानकारी दी थी और जान बचाने के लिए मदद की गुहार लगाई थी। जब तक परिजन पहुंचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

हादसे में जान गंवाने वाले परिजनों का दर्द

लखनऊ के अब्दुल रहमान के दोस्त शादान शेख ने बताया कि अब्दुल 8 महीने से बतौर आईटी टेक्नीशियन काम कर रहा था। नौकरी मिलने से वह बहुत खुश था। उसके माता-पिता मॉर्चुरी तक नहीं आ सके क्योंकि उनकी तबीयत खराब थी। दोस्त की बॉडी देखकर शादान फूट-फूटकर रोए।

लखनऊ के सुखमणि सिंह के पिता प्रभुज्योति सिंह ने बताया कि करीब ढाई बजे बेटे का फोन आया था, जिसमें उसने मदद की गुहार लगाई थी। सुखमणि के बड़े भाई साहिबान ने बताया कि वह काम को लेकर काफी उत्सुक रहता था और सुबह जॉब पर निकला था, काफी खुश था।

मृतक मोहम्मद अम्मार के परिजनों ने बताया कि घटना से पहले अम्मार ने कॉल करके बताया था कि सब फंस गए हैं और निकलने का रास्ता नहीं है। आदित्य श्रीवास्तव के परिवारवालों ने अफसरों को जिम्मेदार ठहराया, यह कहते हुए कि अधिकारी बनते ही नियम भूल जाते हैं। आदित्य ने भी घटना से पहले फोन किया था।

आदित्य श्रीवास्तव की बहन निशा ने बताया कि आग पेट शॉप में एसी में शॉर्ट सर्किट होने से लगी। वहीं मौजूद लोगों ने पहले ऊपर किसी को जानकारी नहीं दी और पहले पालतू जानवरों को बचाने में लगे रहे। आदित्य के भाई भवन श्रीवास्तव खिड़की से कूद गए थे, लेकिन आदित्य हिम्मत न जुटा सका। करीब 14-15 बच्चे बाथरूम में बंद हो गए थे।

कोलकाता की अनामिका के घरवाले सुबह लखनऊ पहुंचे। पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर मां रोते-रोते बेहोश हो गईं। अनामिका एनिमेशन आर्टिस्ट के तौर पर नौकरी करती थी। पिछले हफ्ते ही वह परिवार के साथ मनाली घूमने गई थी।

लखनऊ के नीलेश (21) की साथ में काम करने वाली अनामिका से शादी की बात चल रही थी। अगले हफ्ते दोनों परिवारों को बंगाल जाना था। नीलेश को इस साल प्रमोशन और सैलरी हाइक की उम्मीद थी, इसलिए शादी अगले साल तक के लिए टाल दी गई थी।

संबंधित खबर:लखनऊ आग में 15 की मौत, बिल्डिंग अवैध थी, 2016 में गिराने का आदेश हुआ था; 4 अफसर सस्पेंड, 4 आरोपी अरेस्ट।

L. N. Bhargava