महिला आरक्षण बिल लोकसभा में गिरा: मोदी सरकार को 11 साल में पहली बार बिल पास कराने में नाकामी
महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन बिल संसद में गिर गया। बिल के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े। लोकसभा में कुल 528 सांसदों ने वोट डाले। बिलों को पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी, जो कि 352 वोट थे। इस तरह बहुमत नहीं मिलने से यह बिल 54 वोट से गिर गया।
यह 11 साल के शासन में पहला मौका है जब मोदी सरकार सदन में कोई बिल पास नहीं करा पाई।
बहस और मुख्य बातें
इन संशोधित बिलों पर लोकसभा में 21 घंटे चर्चा हुई, जिसमें कुल 130 सांसदों ने अपने विचार रखे, इनमें 56 महिला सांसद थीं।
अमित शाह का बयान
गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा के दौरान एक घंटा स्पीच दी। उन्होंने कहा कि अगर ये बिल पास नहीं होते हैं तो इसकी जिम्मेदारी विपक्ष की होगी। उन्होंने विपक्ष पर महिला आरक्षण का जानबूझकर विरोध करने का आरोप लगाया और कहा कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनकी राह का रोड़ा कौन है। शाह ने कहा कि बीजेपी हमेशा महिला सशक्तिकरण के पक्ष में रही है और अतीत में भी महिलाओं को महत्वपूर्ण पद दिए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण स्वीकार नहीं करता और सरकार धर्म के आधार पर आरक्षण न देगी और न किसी को देने देगी।
शाह ने विपक्ष के जाति जनगणना के दावों पर भी स्पष्टीकरण दिया कि जनगणना में जाति की गणना भी होगी, और सरकार 2026 के बाद परिसीमन करेगी ताकि सभी राज्यों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
राहुल गांधी का बयान
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं, बल्कि भारत के निर्वाचन क्षेत्र के नक्शे को बदलने के लिए एक "शेमफुल कानून" है। उन्होंने इसे ओबीसी, दलित वर्गों के लिए क्रूरता वाला बिल बताया और कहा कि सरकार ओबीसी वर्ग से अधिकार छीनना चाहती है। राहुल ने जाति जनगणना के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा और कहा कि विपक्ष इस बिल को हरा कर रहेगा।
अन्य नेताओं के विचार
बिल और प्रक्रिया
यह बिल संविधान में संशोधन कर सरकार को परिसीमन आयोग बनाने का अधिकार देता है। अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व जज होंगे। आयोग सभी निर्वाचन क्षेत्र (लोकसभा सीटें) दोबारा तय करेगा और उसका निर्णय अंतिम होगा। संविधान के आर्टिकल 368 के तहत, संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत (कुल सदस्यों का बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत) जरूरी होता है। लोकसभा की वर्तमान संख्या 540 है, जिसमें से कम से कम 360 सांसदों को इसके पक्ष में वोट देना होता।
Pushpendra Chaubey