लोकसभा में वंदे मातरम् पर मोदी का कांग्रेस पर वार

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लोकसभा में वंदे मातरम् पर मोदी का कांग्रेस पर वार

लोकसभा में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पर विशेष चर्चा

लोकसभा में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर सोमवार को विशेष चर्चा आयोजित की गई। इस चर्चा की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की और लगभग एक घंटे के भाषण में उन्होंने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व पर विस्तार से बात की।

मोदी का कांग्रेस और नेहरू पर आरोप

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने वंदे मातरम् को अंग्रेजों के खिलाफ करारा जवाब और आज भी प्रेरणा देने वाला नारा बताते हुए कहा कि महात्मा गांधी को भी यह गीत अत्यंत प्रिय था और वे इसे राष्ट्रीय गान के रूप में देखते थे। मोदी ने सवाल उठाया कि आज़ादी के बाद के दशकों में इस गीत के साथ अन्याय क्यों हुआ और किस ताकत ने महात्मा गांधी की भावनाओं को नजरअंदाज कर दिया।

मोदी ने 1936 की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि मोहम्मद अली जिन्ना ने 15 अक्टूबर 1936 को लखनऊ से वंदे मातरम् के खिलाफ मुहिम शुरू की। आरोप लगाया गया कि कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू ने मुस्लिम लीग के दबाव के आगे झुककर वंदे मातरम् की पड़ताल शुरू कर दी, बजाय इसके कि वे लीग के बयानों का कड़ा विरोध करते। प्रधानमंत्री ने कहा कि इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेक दिए और वंदे मातरम् के साथ विश्वासघात किया।

भाषण में बार-बार वंदे मातरम् का उल्लेख

मोदी के भाषण में वंदे मातरम् केंद्र में रहा। उन्होंने एक घंटे के संबोधन में वंदे मातरम् शब्द 121 बार, देश 50 बार, भारत 35 बार, अंग्रेज 34 बार और बंगाल 17 बार लिया। उन्होंने कांग्रेस का 13 बार, नेहरू का 7 बार और महात्मा गांधी का 6 बार उल्लेख किया। इसके अलावा मुस्लिम लीग, जिन्ना, संविधान और तुष्टिकरण जैसे शब्द भी बार-बार आए।

प्रधानमंत्री ने वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी को याद करते हुए कहा कि उनका योगदान स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि देश भर में वंदे मातरम् के समर्थन में प्रभात फेरियां निकलीं, लेकिन कांग्रेस ने अंततः इस गीत के टुकड़े कर दिए।

संसद में वर्षभर के कार्यक्रम की शुरुआत

राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भारत सरकार ने वर्षभर चलने वाला कार्यक्रम तय किया है। इसी क्रम में लोकसभा और राज्यसभा में विशेष चर्चा आयोजित की जा रही है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने 2 दिसंबर को सभी दलों के नेताओं के साथ बैठक कर कार्यक्रम का रूपरेखा तय की थी। निर्णय के अनुसार 8 दिसंबर को लोकसभा और 9 दिसंबर को राज्यसभा में वंदे मातरम् पर चर्चा होनी है।

लोकसभा में इस चर्चा के लिए 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की ओर से लोकसभा में उपनेता प्रतिपक्ष गौरव गोगोई ने अपनी बात रखी और प्रधानमंत्री के आरोपों का जवाब दिया।

निष्कर्ष

लोकसभा में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर हुई चर्चा राजनीतिक तकरार के बीच ऐतिहासिक स्मरण का मंच बन गई। एक ओर प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस और नेहरू पर वंदे मातरम् के साथ अन्याय करने और मुस्लिम लीग के सामने झुकने के आरोप लगाए, तो दूसरी ओर विपक्ष ने इन आरोपों को राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया। इस बहस के माध्यम से वंदे मातरम् के इतिहास, उसकी भूमिका और समकालीन राजनीति में उसकी प्रतिध्वनि को नए सिरे से सामने लाया गया।

Gulzar Ahmad