कलकत्ता हाईकोर्ट ने TTE को सब्जी बेचने जैसा बताया, खाली बर्थ बेचने पर नाराजगी

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने TTE को सब्जी बेचने जैसा बताया, खाली बर्थ बेचने पर नाराजगी

कलकत्ता हाईकोर्ट ने TTE पर सख्त टिप्पणी की

खाली बर्थ बेचने को सब्जी बेचने जैसा बताया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को ट्रेन में पैसे लेकर खाली बर्थ देने वाले TTE पर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि TTE खाली बर्थ ऐसे बेचते हैं, जैसे बाजार में सब्जियां बिकती हैं। इसी वजह से ट्रेनों में नशीला पदार्थ खिलाकर लूट की घटनाएं होती हैं।

17 साल पुराने केस में सुनवाई के दौरान टिप्पणी

जस्टिस राजशेखर मंथा और जस्टिस बिस्वरूप चौधरी की बेंच 2009 में तीस्ता-तोरसा एक्सप्रेस में हुई लूट और मौत के मामले में दो दोषियों की अपील पर सुनवाई कर रही थी। बेंच ने कहा कि पैसे लेकर जनरल टिकट वाले यात्रियों को खाली बर्थ देने से अपराधियों को यात्रियों तक पहुंचने का मौका मिलता है।

घटना का विवरण

23 फरवरी 2009 को न्यू जलपाईगुड़ी से सियालदह जा रही तीस्ता-तोरसा एक्सप्रेस में दो यात्री जनरल टिकट पर सफर कर रहे थे। दोनों ने TTE को पैसे देकर S-8 कोच में खाली बर्थ ली। यात्रा के दौरान दो लोगों ने उनसे दोस्ती की और खाने-पीने की चीजों में नशीला पदार्थ मिलाकर उन्हें बेहोश कर दिया। आरोपियों ने दोनों यात्रियों का सामान लूट लिया। इस घटना में सुनील कुमार दास की जहरीला पदार्थ शरीर में जाने से मौत हो गई, जबकि अरुण चक्रवर्ती नौ दिन अस्पताल में भर्ती रहने के बाद बच गए।

Sharad Shrivastava