मध्य प्रदेश में बीएलओ की मौतें: तनाव और स्वास्थ्य पर सवाल
मध्यप्रदेश में मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) की मौतों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के मामले सामने आए हैं। पिछले 10 दिनों में 6 बीएलओ की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से बीमार हैं।
मौतों के पीछे तनाव और काम का दबाव
प्रदेश में 4 नवंबर से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया चल रही है, जिसमें 65,014 बीएलओ को 5.74 करोड़ वोटर्स का डेटा डिजिटल करने का जिम्मा दिया गया है। काम की समय सीमा और निलंबन का डर बीएलओ के मानसिक तनाव का कारण बन रहा है। सर्वर डाउन जैसी समस्याओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
मौतों के प्रमुख मामले
मृत बीएलओ में शहडोल जिले के मनीराम नापित, नर्मदापुरम के सुजान सिंह, मंडीदीप के रमाकांत पांडे, झाबुआ के भुवान सिंह चौहान, दमोह के सीताराम गोंड और बालाघाट की अनीता नागेश्वर शामिल हैं। इनमें हार्ट अटैक, ब्रेन हेमरेज और काम के दबाव के कारण स्वास्थ्य बिगड़ने की घटनाएं हुईं।
कर्मचारी संगठन की मांग
मप्र तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने चुनाव आयोग से मृत कर्मचारियों के परिजनों को 15 लाख रुपए राहत राशि और बीमार कर्मचारियों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित करने की मांग की है। संगठन ने इस कार्य को चुनाव से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्य बताते हुए राहत की अपील की है।
बीएलओ की मेहनत और चुनौतियां
कई बीएलओ ने 100% लक्ष्य पूरा कर सम्मान प्राप्त किया है। खंडवा जिले में दुर्गा पटेल और शालू रावत जैसे बीएलओ ने घर-घर जाकर मतदाता फॉर्म भरवाए और सर्वर डाउन होने के बावजूद रात में काम किया। प्रशासन ने अब इनके अनुभव का उपयोग धीमी गति वाले क्षेत्रों में किया है।
स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था
भोपाल में बीएलओ की स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए डॉक्टरों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही बीएलओ के स्वास्थ्य पर नजर रखने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश में बीएलओ की मौतों और स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। काम के दबाव और तनाव को कम करने के लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
L. N. Bhargava