मध्य प्रदेश में दिव्यांगजनों के लिए पहली बार बनेगी नीति, 180 दिन में ड्राफ्ट

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मध्य प्रदेश में पहली बार बनेगी दिव्यांगजन नीति, 180 दिन में ड्राफ्ट तैयार होगा

मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश के दस लाख दिव्यांगजनों के लिए पहली बार एक व्यापक नीति बनाने जा रही है। इस नीति का उद्देश्य दिव्यांगजनों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और लाभों के लिए एक एकीकृत मंच पर लाना है, ताकि विभिन्न विभागों द्वारा अलग-अलग योजनाओं के तहत मिलने वाले लाभों में एकरूपता लाई जा सके।

नीति बनाने की आवश्यकता

दिव्यांगजन आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया ने बताया कि वर्तमान में दिव्यांगजनों के लिए कोई एक समग्र नीति नहीं है। विभिन्न विभाग अपनी-अपनी योजनाएं चलाते हैं, जिससे दिव्यांगजनों के लिए काम में एकरूपता की कमी महसूस होती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह बच्चों और महिलाओं के लिए अलग-अलग नीतियां हैं, उसी तरह दिव्यांगजनों के लिए भी एक समर्पित नीति की आवश्यकता है ताकि उनके समग्र विकास को सुनिश्चित किया जा सके।

विशेषज्ञों और हितग्राहियों से होगी चर्चा

नीति तैयार करने के लिए राज्य सरकार विशेषज्ञों, हितग्राहियों और दिव्यांगजनों से सीधे बातचीत करेगी। डॉ. खेमरिया ने बताया कि विदेशों में दिव्यांगजनों की स्थिति का अध्ययन करने वाले, विश्वविद्यालयों में शोध करने वाले विशेषज्ञों के साथ-साथ ग्रामीण, शहरी और आदिवासी क्षेत्रों के दिव्यांगजनों से भी सुझाव लिए जाएंगे। अलीराजपुर, झाबुआ, बड़वानी जैसे इलाकों में योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली दिक्कतों की भी जानकारी ली जाएगी।

छह माह में ड्राफ्ट, 2026 में लागू होने की उम्मीद

विभिन्न विभागों जैसे सामाजिक न्याय, एमएसएमई, एनआरएलएम, महिला एवं बाल विकास आदि के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। अगले छह माह में नीति का ड्राफ्ट तैयार कर कैबिनेट से मंजूरी दिलाई जाएगी। सरकार का लक्ष्य 2026 तक इस नीति को लागू करना है।

मुख्यमंत्री की पहल और विभागीय निर्देश

नीति बनाने के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपनी सहमति दे दी है। डॉ. खेमरिया ने फरवरी 2026 में मुख्यमंत्री को इस संबंध में पत्र लिखा था। सामाजिक न्याय और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने 13 अप्रैल 2026 को आयुक्त को दिव्यांगजन अधिनियम 2016 के तहत सभी पहलुओं को शामिल करते हुए नीति का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है। इसमें राज्य निधि, निराश्रित निधि, योजनाओं, पुनर्वास और कल्याण जैसे सभी बिंदु शामिल होंगे।

अन्य राज्यों की नीतियों का भी होगा अध्ययन

नीति के मसौदे को अंतिम रूप देने से पहले तेलंगाना, त्रिपुरा समेत अन्य राज्यों की दिव्यांगजन नीतियों का भी अध्ययन किया जाएगा। साथ ही, शासकीय और अशासकीय संस्थाओं, प्रख्यात खिलाड़ियों और सांस्कृतिक प्रतिभाओं से भी चर्चा की जाएगी।

Sharad Shrivastava