मध्यप्रदेश में भारी बारिश से फसलों को नुकसान
मध्यप्रदेश में मंगलवार को भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर समेत 10 जिलों में बारिश दर्ज की गई। बैतूल में डेढ़ इंच, बालाघाट के मलाजखंड में सवा इंच और ग्वालियर में आधा इंच से अधिक बारिश हुई। सतना जिले के लालपुर गांव में आकाशीय बिजली गिरने से देवी मंदिर में पूजा कर रही आठ महिलाएं और बच्चियां झुलस गईं। इनमें से एक महिला की हालत गंभीर है और उसका इलाज मझगवां स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है।
बारिश से फसलें खराब, कपास की गुणवत्ता प्रभावित
खरगोन जिले में भारी नमी के कारण कपास की गुणवत्ता खराब हो गई है। स्थानीय मंडियों में नीलामी एक सप्ताह के लिए रोक दी गई है। किसान अपने घरों और जिनिंग फैक्ट्रियों में कपास सुखाने में लगे हैं। केके फायबर्स के संचालक प्रितेश अग्रवाल ने बताया कि फैक्ट्री में सूखने के लिए रखा 700 क्विंटल कपास गीला हो गया। खेतों में भी कपास की चुनाई संभव नहीं हो पा रही है।
बड़वानी जिले के तलवाड़ा बुजुर्ग गांव के खेतों में बारिश का पानी घुस गया, जिससे भिंडी और मक्के की फसलें खराब हो गईं। किसानों को लगभग 80 हजार रुपये का नुकसान हुआ है।
मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विभाग ने 1 अक्टूबर से एक नए सिस्टम के सक्रिय होने की संभावना जताई है, जिससे दशहरे तक कई जिलों में बारिश जारी रह सकती है। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि अगले चार दिनों तक हल्की बारिश और गरज-चमक के साथ तेज हवा चलने की संभावना है। इसके बाद पांचवे दिन से भारी बारिश का दौर फिर शुरू हो सकता है।
मानसून की विदाई में देरी
इस साल मानसून 16 जून को मध्यप्रदेश में पहुंचा था। अब तक प्रदेश के 12 जिलों से मानसून विदा हो चुका है, लेकिन नए सिस्टम के कारण इसकी विदाई में देरी हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की सामान्य विदाई 6 अक्टूबर तक हो जाती है, लेकिन इस बार यह तारीख आगे बढ़ सकती है।
बारिश के आंकड़े
इस साल अब तक राज्य में 122 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है। सामान्य औसत 37.2 इंच के मुकाबले 45.1 इंच बारिश हो चुकी है। गुना जिले में 65.6 इंच बारिश के साथ सबसे अधिक बारिश हुई है, जबकि शाजापुर और खरगोन जैसे जिलों में सबसे कम बारिश दर्ज की गई है।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश में मानसून की बारिश ने जहां किसानों को राहत दी, वहीं कई जगहों पर फसलों को भारी नुकसान हुआ। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।