मध्यप्रदेश में शीतलहर और कोहरे का प्रकोप, कई जिलों में तापमान लुढ़का
मध्यप्रदेश के ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग इस समय तीव्र सर्दी और शीतलहर की चपेट में हैं। प्रदेश के कई हिस्सों में ठिठुरन, घने कोहरे और गिरते तापमान से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए ठंड और कोहरे को लेकर अलर्ट जारी किया है।
सात जिलों में शीतलहर अलर्ट, 20 से अधिक जिले कोहरे से घिरे
रविवार को ग्वालियर, दतिया, निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना और सतना में शीतलहर को लेकर चेतावनी जारी की गई है। इन जिलों में दिन भर सर्द हवाएं चलने और अधिकतम तापमान में गिरावट की संभावना जताई गई है।
सुबह के समय ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, इंदौर, भोपाल, उज्जैन, रायसेन, शाजापुर, देवास, सीहोर, गुना, अशोकनगर और विदिशा में कहीं घना तो कहीं मध्यम कोहरा दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार दो दिन तक दिन और रात के तापमान में उतार-चढ़ाव रहेगा, लेकिन तीन दिन बाद फिर से कड़ाके की ठंड का दौर शुरू हो सकता है।
खजुराहो सबसे ठंडा, 25 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे
बीती रात प्रदेश के 25 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। छतरपुर जिले का खजुराहो लगातार दूसरी रात प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 3.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।
शिवपुरी में 4 डिग्री, राजगढ़ में 4.4 डिग्री, दतिया में 4.6 डिग्री, नौगांव में 5 डिग्री, रीवा में 5.5 डिग्री, मंडला में 6 डिग्री, पचमढ़ी में 6.4 डिग्री और उमरिया में 6.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।
राज्य के पांच प्रमुख शहरों में ग्वालियर सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 5.9 डिग्री दर्ज हुआ। भोपाल में 7.2 डिग्री, इंदौर में 6.9 डिग्री, उज्जैन में 9 डिग्री और जबलपुर में 9.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
वेस्टर्न डिस्टरबेंस और जेट स्ट्रीम से बढ़ेगी सर्दी
सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के अनुसार, अगले दो दिनों के लिए कोहरे और शीतलहर का अलर्ट जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि उत्तर भारत के उत्तरी हिस्से में एक सक्रिय वेस्टर्न डिस्टरबेंस प्रणाली मौजूद है। जैसे-जैसे यह सिस्टम आगे बढ़ेगा, ठंड का असर बढ़ेगा और तापमान में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
इस समय उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर समुद्र तल से लगभग 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर करीब 252 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से जेट स्ट्रीम हवाएं बह रही हैं। इसका असर मध्यप्रदेश पर भी पड़ रहा है और खासतौर पर उत्तरी हिस्से में ठिठुरन बढ़ गई है।
कोहरे से रेल यातायात प्रभावित, कई ट्रेनें घंटों लेट
घने कोहरे की वजह से दिल्ली से मध्यप्रदेश आने वाली कई ट्रेनों की समय-सारणी प्रभावित हुई है। मालवा एक्सप्रेस, पंजाब मेल और जनशताब्दी जैसी प्रमुख ट्रेनें प्रतिदिन लेट चल रही हैं। मालवा एक्सप्रेस भोपाल में पांच से छह घंटे की देरी से पहुंच रही है। रविवार को भी कोहरे के कारण ट्रेनों के समय पर असर देखा गया।
नवंबर, दिसंबर और जनवरी में रिकॉर्डतोड़ सर्दी का दौर
इस साल मध्यप्रदेश में नवंबर और दिसंबर की सर्दी ने कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। जानकारी के अनुसार, नवंबर में 84 साल की सबसे कड़ी सर्दी दर्ज की गई, जबकि दिसंबर में 25 साल का रिकॉर्ड टूटा। जनवरी में भी कड़ाके की ठंड जारी है और भोपाल में ठंड का 10 साल का रिकॉर्ड टूट चुका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस जनवरी में भी प्रदेश में कई जगहों पर शून्य से नीचे (माइनस) तापमान दर्ज हो चुका है। इस बार तेज सर्दी के साथ घना कोहरा और शीतलहर का असर भी देखने को मिल रहा है।
जनवरी को ठंड के लिए खास क्यों माना जाता है
मौसम विभाग के अनुसार, जैसे मानसून के चार महीनों जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर में से जुलाई और अगस्त सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं, उसी तरह कड़ाके की ठंड के लिए दिसंबर और जनवरी अहम हैं। इन दो महीनों में उत्तर भारत से ठंडी हवाएं अधिक मात्रा में मध्यप्रदेश की ओर आती हैं, जिससे तापमान में उल्लेखनीय गिरावट होती है और प्रदेश में तेज सर्द हवाएं चलती हैं।
पिछले 10 वर्षों के आंकड़े भी इसी ट्रेंड की पुष्टि करते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस के सक्रिय होने पर जनवरी में अक्सर बारिश भी होती है। पिछले वर्ष जनवरी में कई जिलों में बारिश दर्ज की गई थी और इस साल भी नए साल के पहले ही दिन आसमान पर बादल छाए रहे।
भोपाल: 0.6 डिग्री तक जा चुका है तापमान
भोपाल में जनवरी के महीने में तीखी सर्दी के साथ दिन में कभी-कभी हल्की गर्माहट और बारिश का ट्रेंड देखने को मिलता है। 18 जनवरी 1935 को रात का न्यूनतम तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था, जो रिकॉर्ड स्तर है। वहीं 26 जनवरी 2009 को दिन का अधिकतम तापमान 33 डिग्री तक पहुंच गया था।
पिछले 10 वर्षों में से 7 साल जनवरी में बारिश हो चुकी है। 24 घंटे में सबसे अधिक 2 इंच बारिश 6 जनवरी 2004 को दर्ज हुई, जबकि जनवरी 1948 में माह भर में कुल 3.8 इंच बारिश का रिकॉर्ड है।
इंदौर: माइनस 1.1 डिग्री का रिकॉर्ड
इंदौर में जनवरी की सर्दी का रिकॉर्ड माइनस में दर्ज हो चुका है। 16 जनवरी 1935 को न्यूनतम तापमान माइनस 1.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जो यहां का ओवरऑल रिकॉर्ड है। 27 जनवरी 1990 को दिन का अधिकतम तापमान 33.9 डिग्री दर्ज किया गया था।
इंदौर में 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 6 जनवरी 1920 के नाम है, जब 3 इंच से अधिक बारिश हुई थी। इसी वर्ष जनवरी में लगभग 4 इंच मासिक बारिश दर्ज की गई थी।
जबलपुर: जनवरी में ठंड और बारिश का खास पैटर्न
जबलपुर में भी जनवरी में तेज सर्दी और बारिश का स्पष्ट ट्रेंड दिखाई देता है। 7 जनवरी 1946 को रात का न्यूनतम तापमान 1.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ था, जो रिकॉर्ड स्तर है। 7 जनवरी 1973 को अधिकतम तापमान 33.4 डिग्री तक पहुंचा था।
यहां 24 जनवरी 1919 को 24 घंटे में 2.5 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई थी। उसी वर्ष जनवरी महीने में कुल 8 इंच से अधिक बारिश हुई थी।
ग्वालियर: उत्तरी हवाओं से सबसे ठंडा क्षेत्र
उत्तरी हवाओं के सीधे असर के कारण ग्वालियर-चंबल क्षेत्र जनवरी में अक्सर सबसे ठंडा रहता है। पिछले 10 साल के रिकॉर्ड के अनुसार, 2018 में ग्वालियर में न्यूनतम तापमान 1.9 डिग्री और 2019 में 2.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। 24 जनवरी 1954 को यहां रात का तापमान माइनस 1.1 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया था।
ग्वालियर में जनवरी में बारिश भी होती रही है। वर्ष 2014 से 2024 के बीच 9 बार जनवरी में बारिश दर्ज की गई। 8 जनवरी 1926 को 24 घंटे में 2.1 इंच बारिश हुई थी, जबकि 1948 में जनवरी माह में कुल 3.1 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई थी।
उज्जैन: जीरो डिग्री तापमान का अनुभव
उज्जैन में भी उत्तरी हवाओं का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जिसके कारण यहां कड़ाके की ठंड पड़ती है। 22 जनवरी 1962 को उज्जैन में न्यूनतम तापमान 0 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। पिछले 10 वर्षों में यहां पारा 2 से 5.8 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड किया गया है।
उज्जैन में 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश 11 जनवरी 1987 को दर्ज की गई, जब लगभग सवा इंच पानी गिरा था। जनवरी 1994 में यहां 2.2 इंच मासिक बारिश का रिकॉर्ड भी दर्ज है।
निष्कर्ष: अगले दिनों में और कड़ाके की ठंड की आशंका
मौसम विभाग के पूर्वानुमान और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए मध्यप्रदेश में अगले कुछ दिनों तक शीतलहर, घने कोहरे और गिरते तापमान से राहत की उम्मीद कम है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस के आगे बढ़ने के साथ ठंड और बढ़ सकती है, जिससे आम लोगों, यात्रियों और किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
Bhavanesh Soni