साइबर ठगी से बचाने एमपी पुलिस का ‘सेफ क्लिक-2.0’ अभियान
डिजिटल दुनिया जितनी तेजी से लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन रही है, साइबर अपराधी भी उतनी ही तेजी से नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। कभी घर बैठे हजारों रुपये कमाने का झांसा, कभी ऑनलाइन गेम में फ्री डायमंड और रिवॉर्ड का लालच तो कभी निवेश पर पैसे दोगुने करने का वादा, इन सबके पीछे साइबर अपराधियों का संगठित नेटवर्क सक्रिय है।
'सेफ क्लिक 2.0' अभियान
बढ़ते साइबर अपराधों के बीच मध्यप्रदेश पुलिस ने लोगों को जागरूक करने के लिए 'सेफ क्लिक 2.0' साइबर सुरक्षा अभियान शुरू किया है। अभियान के तहत जारी पोस्टरों में आम नागरिकों, अभिभावकों और युवाओं को अलग-अलग तरह के साइबर फ्रॉड से बचने के व्यवहारिक उपाय बताए गए हैं।
साफ संदेश दिया गया है कि "सावधानी ही सुरक्षा है।" पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक, ऐप या निवेश योजना पर भरोसा करने से पहले उसकी पूरी जांच करें। यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते धनराशि को सुरक्षित कराया जा सके।
ऑनलाइन टास्क फ्रॉड: आसान कमाई के लालच में न फंसें
अभियान में सबसे अधिक जोर ऑनलाइन टास्क फ्रॉड पर दिया गया है। इसमें ठग सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप के जरिए लोगों को वीडियो लाइक करने, चैनल सब्सक्राइब करने या रेटिंग देने जैसे आसान काम के बदले मोटी कमाई का लालच देते हैं। शुरुआत में विश्वास जीतने के लिए छोटी रकम भी भेजी जाती है, लेकिन बाद में "प्रीमियम टास्क" के नाम पर हजारों रुपए जमा करा लिए जाते हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जो भी ऑनलाइन काम शुरू करने से पहले पैसे जमा कराने की शर्त रखे, वह लगभग निश्चित रूप से धोखाधड़ी है।
गेमिंग रिवॉर्ड और फ्री UC का झांसा
युवाओं और किशोरों को निशाना बनाने वाले गेमिंग रिवॉर्ड स्कैम पर भी विशेष चेतावनी दी गई है। साइबर अपराधी खुद को गेम कंपनी, यूट्यूबर या ई-स्पोर्ट्स पार्टनर बताकर फ्री UC, डायमंड या इनाम देने का दावा करते हैं। इसके लिए फर्जी वेबसाइट या APK फाइल डाउनलोड कराई जाती है, जिसके बाद गेमिंग अकाउंट, बैंकिंग जानकारी और मोबाइल डेटा तक चोरी हो सकता है। पुलिस ने सलाह दी है कि केवल आधिकारिक ऐप और वेबसाइट का ही उपयोग करें, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) चालू रखें और किसी के साथ OTP या लॉगिन जानकारी साझा न करें।
निवेश पर दोगुना पैसा? सबसे बड़ा लालच, सबसे बड़ा नुकसान
पोस्टरों में इन्वेस्टमेंट फ्रॉड को भी विस्तार से समझाया गया है। साइबर ठग सोशल मीडिया पर नकली विज्ञापनों और फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए कम समय में भारी मुनाफे का दावा करते हैं। शुरुआत में ऐप पर नकली लाभ दिखाकर निवेश बढ़वाया जाता है, लेकिन जब पैसा निकालने की बारी आती है तो टैक्स, प्रोसेसिंग फीस या अन्य शुल्क के नाम पर और रकम मांगी जाती है। अंततः निवेशक अपना पूरा पैसा गंवा बैठता है। पुलिस ने सलाह दी है कि केवल SEBI से पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से ही निवेश करें और "जल्दी अमीर बनने" के किसी भी लालच से बचें।
अभिभावकों को भी दी गई खास सलाह
अभियान में बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर भी विशेष पोस्टर जारी किए गए हैं। अभिभावकों से कहा गया है कि वे बच्चों के साथ नियमित संवाद बनाए रखें, परिवार में "नो फोन रूल" जैसी आदतें विकसित करें, बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर संतुलित नजर रखें और उन्हें सोशल मीडिया व ऑनलाइन गेमिंग के संभावित खतरों के बारे में जागरूक करें। बच्चों की किसी भी डिजिटल समस्या पर डांटने के बजाय संवाद और सहयोग का रास्ता अपनाने की सलाह दी गई है।
मोबाइल सुरक्षा के लिए संचार साथी पोर्टल का उपयोग करें
मोबाइल सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए लोगों को संचार साथी पोर्टल की जानकारी भी दी गई है। इसके तहत चक्षु (Chakshu) सुविधा से संदिग्ध कॉल, SMS और WhatsApp फ्रॉड की शिकायत की जा सकती है। CEIR के माध्यम से चोरी हुए मोबाइल का IMEI ब्लॉक कराया जा सकता है, जबकि TAFCOP से अपने नाम पर जारी सभी मोबाइल नंबरों की जानकारी लेकर अनधिकृत सिम बंद कराई जा सकती है। साथ ही सेकेंड हैंड मोबाइल खरीदने से पहले उसकी वास्तविकता की जांच करने की भी सलाह दी गई है।
पुलिस की अपील
मध्यप्रदेश पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार लोगों की जल्दबाजी, लालच और लापरवाही है। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने, फर्जी ऐप डाउनलोड करने, एडवांस भुगतान करने या निजी बैंकिंग जानकारी साझा करने से पहले पूरी तरह सतर्क रहें। पुलिस ने दोहराया है कि साइबर ठगी होने पर हर मिनट महत्वपूर्ण होता है, इसलिए तुरंत 1930 पर कॉल करें और ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं। जागरूकता ही साइबर अपराध के खिलाफ सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच है।
Bhavanesh Soni