मध्यप्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज से, दो बड़े विधेयक होंगे पेश

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मध्यप्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज से, दो बड़े विधेयक होंगे पेश

मध्यप्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज से, दो अहम विधेयक होंगे पेश

मध्यप्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो रहा है, जो 5 दिसंबर तक चलेगा। इस अवधि में कुल चार दिन विधानसभा की बैठकें निर्धारित की गई हैं। 3 दिसंबर को भोपाल गैस त्रासदी की बरसी के अवसर पर स्थानीय अवकाश रहने के कारण उस दिन सदन की कार्यवाही नहीं होगी।

सत्र से पहले रिकॉर्ड संख्या में प्रश्न और प्रस्ताव

सत्र की अधिसूचना जारी होने के बाद से अब तक विधानसभा सचिवालय को कुल 1,497 प्रश्नों की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। इनमें 751 तारांकित और 746 अतारांकित प्रश्न शामिल हैं। इसके अलावा 194 ध्यानाकर्षण सूचनाएं, 6 स्थगन प्रस्ताव, 14 अशासकीय संकल्प, 52 शून्यकाल सूचनाएं और नियम-139 के तहत 2 सूचनाएं आई हैं। सदन को 15 याचिकाएं और 2 शासकीय विधेयक भी प्राप्त हुए हैं।

VIT यूनिवर्सिटी और अतिवृष्टि मुआवजा पर विपक्ष की तैयारी

शीतकालीन सत्र में विपक्ष ने सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है। विपक्षी विधायक सीहोर स्थित वीआईटी यूनिवर्सिटी में छात्रों को खराब भोजन और पानी मिलने के आरोप के कारण उत्पन्न विवाद को जोरदार तरीके से उठाएंगे। इसके साथ ही अतिवृष्टि से हुए नुकसान और प्रभावितों को मुआवजा देने के मुद्दे पर भी सदन में बहस की संभावना है।

नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्षों के प्रत्यक्ष चुनाव का प्रस्ताव

सत्र के दौरान मध्यप्रदेश सरकार नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव प्रस्तावित कर रही है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार अध्यक्ष का चुनाव पार्षदों द्वारा किया जाता है, लेकिन प्रस्तावित संशोधन के बाद अध्यक्ष को सीधे जनता चुन सकेगी।

इसके साथ ही राइट टू रिकॉल की व्यवस्था लागू करने की भी तैयारी है। इस व्यवस्था के तहत यदि मतदाता अध्यक्ष के कार्य से असंतुष्ट हों, तो वे मतदान के माध्यम से उन्हें पद से हटाने का अधिकार रखेंगे। यह बदलाव निकाय स्तर पर जनप्रतिनिधियों के प्रति जवाबदेही को बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है।

दुकान एवं स्थापना (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025

कैबिनेट की हालिया बैठक में राज्य सरकार ने व्यापार और दुकानों से जुड़े महत्वपूर्ण बदलावों को मंजूरी दी है। दुकान एवं स्थापना (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025 को स्वीकृति दी जा चुकी है, जिसे अब विधानसभा में पेश किया जाएगा।

प्रस्ताव के अनुसार, दुकानों और प्रतिष्ठानों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल की जाएगी। दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम में किए जा रहे संशोधन के तहत दुकानदारों और कामगारों को सप्ताह में एक दिन अनिवार्य अवकाश देना आवश्यक होगा। सरकार का तर्क है कि यह प्रावधान कामगारों के स्वास्थ्य, बेहतर कार्य वातावरण और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है।

रजिस्ट्रेशन शुल्क और डेटा अपडेट की नई व्यवस्था

दुकान एवं स्थापना (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025 के मसौदे के अनुसार रजिस्ट्रेशन शुल्क की अधिकतम सीमा 2,500 रुपये तय की गई है। यदि कर्मचारियों की संख्या या अन्य प्रमुख जानकारी में परिवर्तन होता है, तो संबंधित प्रतिष्ठान को सात दिन के भीतर पोर्टल पर विवरण अपडेट करना अनिवार्य होगा।

इसी तरह, यदि कोई प्रतिष्ठान बंद किया जाता है तो 10 दिन के भीतर पोर्टल पर इसकी सूचना देना जरूरी होगा। जैसे ही यह सूचना दर्ज होगी, संबंधित रजिस्ट्रेशन स्वतः निरस्त हो जाएगा। श्रम विभाग के अनुसार, इन संशोधनों का उद्देश्य प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाना, तथा कामगारों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार

शीतकालीन सत्र के एजेंडे में जहां एक ओर स्थानीय निकायों की चुनाव प्रणाली में बदलाव और दुकानों से जुड़े श्रम कानूनों में सुधार पर महत्वपूर्ण विधायी काम होना है, वहीं दूसरी ओर वीआईटी यूनिवर्सिटी और अतिवृष्टि से संबंधित मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस की संभावना भी है। प्रश्नों, प्रस्तावों और विधेयकों की बड़ी संख्या से संकेत मिलता है कि सीमित अवधि के बावजूद सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही व्यस्त और महत्वपूर्ण रहने वाली है।

Navjeet Kaur