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मेनका गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बताया अव्यावहारिक

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मेनका गांधी ने  सुप्रीम कोर्ट  के फैसले को बताया  अव्यावहारिक

मेनका गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अव्यावहारिक बताया

पूर्व केंद्रीय मंत्री और पशु अधिकारों की पैरोकार मेनका गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि आवारा कुत्तों को स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थलों से हटाकर नसबंदी और टीकाकरण के बाद शेल्टर होम में स्थानांतरित किया जाए। इस फैसले को मेनका गांधी ने "अव्यावहारिक" करार दिया।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर को सार्वजनिक स्थलों पर कुत्तों के काटने की घटनाओं में वृद्धि को देखते हुए अधिकारियों को आवारा पशुओं को आश्रय गृहों में भेजने का निर्देश दिया। साथ ही, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) समेत संबंधित एजेंसियों को राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे से आवारा पशुओं को हटाने का आदेश दिया।

मेनका गांधी की प्रतिक्रिया

एक कार्यक्रम में इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए मेनका गांधी ने कहा कि "कुत्तों, बिल्लियों, बंदरों को हटाने और शेल्टर होम में रखने का आदेश व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है।" उन्होंने स्थानीय निकायों के बीच तालमेल की कमी पर चिंता जताई और कहा कि भारत को पशुओं के प्रति दया-भावना और सहानुभूति से निर्देशित होना चाहिए।

सिनेकाइंड पहल का शुभारंभ

मेनका गांधी ने 'सिनेकाइंड' पहल के शुभारंभ के दौरान यह टिप्पणियां कीं। यह अभियान 'फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया' (एफएफआई) और 'पीपुल फॉर एनिमल्स' (पीएफए) के सहयोग से शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य सिनेमा जगत में पशु-प्रकृति के प्रति सहानुभूति को कमजोरी के बजाय ताकत के रूप में चित्रित करना है।

L. N. Bhargava