महागठबंधन में ईगो की लड़ाई से NDA को बड़ा फायदा?
बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के भीतर 12 सीटों पर सहयोगी दलों के बीच भारी टकराव देखने को मिल रहा है। मुख्य दल RJD, कांग्रेस, CPI और VIP इन सीटों पर अपने-अपने उम्मीदवार उतार चुके हैं, जिससे वोटरों में भ्रम की स्थिति बन गई है।
फ्रेंडली फाइट या आपसी कलह?
महागठबंधन ने इसे "फ्रेंडली फाइट" का नाम दिया है, लेकिन यह आपसी ईगो की लड़ाई में बदल गई है। कई सीटों पर सहयोगी दल एक उम्मीदवार पर सहमत नहीं हो पाए हैं, जिससे वोटों के बिखराव का खतरा बढ़ गया है।
महागठबंधन के कोर वोट बैंक पर असर
इस संघर्ष का सबसे बड़ा प्रभाव महागठबंधन के कोर वोट बैंक, जिसमें यादव, मुस्लिम और अति-पिछड़ा वर्ग शामिल हैं, पर पड़ रहा है। वोटर असमंजस में हैं कि उनका असली उम्मीदवार कौन है।
कांग्रेस और CPI के बीच टकराव
बेगूसराय की बछवाड़ा सीट पर CPI और कांग्रेस के बीच सबसे अधिक विवाद है। CPI इसे अपनी "रेड लाइन" सीट मानती है, जबकि कांग्रेस ने अपने दिग्गज युवा नेता को यहां उतारा है। CPI ने बछवाड़ा के जवाब में कांग्रेस की तीन अन्य सीटों पर भी अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं।
वोटरों की परेशानी
स्थानीय वोटर और कार्यकर्ता भी इस स्थिति से परेशान हैं। कई सीटों पर लोग यह तय नहीं कर पा रहे कि किसे वोट करें। महागठबंधन की इस आपसी लड़ाई से NDA को अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
क्या सुलझेगा गठबंधन का विवाद?
हालांकि, कुछ सीटों पर महागठबंधन ने नामांकन वापसी करवाकर संकट टालने की कोशिश की है, लेकिन इन 12 सीटों पर स्थितियां अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई हैं।
Ravi Yadav