महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले कांग्रेस का नया राजनीतिक गठबंधन
महाराष्ट्र में बृह्नमुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) सहित 29 महानगर पालिकाओं के चुनाव 15 जनवरी 2026 को होने हैं। इन चुनावों से पहले राज्य की राजनीति में सीट बंटवारे और नए गठबंधनों को लेकर हलचल तेज हो गई है।
महा विकास आघाड़ी के बीच बातचीत, कांग्रेस ने चुना नया साथी
विपक्षी महा विकास आघाड़ी (एमवीए) के घटक दल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) कांग्रेस के साथ सीटों के तालमेल पर अभी बातचीत की प्रक्रिया में ही हैं। इसी बीच कांग्रेस ने राज्य में एक नए साथी के रूप में राष्ट्रीय समाज पक्ष (आरएसपी) के साथ गठबंधन की घोषणा कर राजनीतिक संकेत दे दिए हैं।
धनगर समुदाय के नेता महादेव जानकर के नेतृत्व वाली आरएसपी के साथ कांग्रेस ने आने वाले महानगर पालिका और जिला परिषद चुनावों के लिए गठबंधन करने का फैसला किया है। इस निर्णय को एमवीए के भीतर चल रही रस्साकशी के बीच एक अहम कदम माना जा रहा है।
संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर एकजुटता
कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल और महादेव जानकर ने संयुक्त रूप से घोषणा की कि दोनों दल संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट हो रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह गठबंधन समान विचारधारा वाले दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की कांग्रेस की पुरानी नीति के अनुरूप है।
हालांकि, इस संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीटों के बंटवारे से जुड़ी कोई जानकारी साझा नहीं की गई। सपकाल ने यह भी कहा कि देश में लोकतंत्र और संविधान को कमजोर किए जाने के आरोपों के बीच समान सोच रखने वाली पार्टियों का साथ आना जरूरी हो गया है।
स्थानीय चुनावों की समयसीमा और पूर्व सहयोग
बीएमसी सहित 29 महानगर पालिकाओं के चुनाव के लिए मतदान 15 जनवरी 2026 को होगा। जिला परिषद चुनावों की आधिकारिक तिथि अभी घोषित नहीं की गई है, लेकिन उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुसार ये चुनाव 31 जनवरी से पहले कराए जाएंगे।
सपकाल ने बताया कि नगरपालिका और पंचायत चुनावों के दौरान कई क्षेत्रों में कांग्रेस और आरएसपी ने पहले भी साथ मिलकर काम किया था। सतारा, सांगली, मराठवाड़ा और विदर्भ जैसे इलाकों में दोनों पार्टियों ने बिना औपचारिक गठबंधन के संयुक्त रूप से चुनाव लड़े थे। अब नगर निगम और जिला परिषद स्तर पर इसे औपचारिक रूप देने की दिशा में कदम उठाया गया है।
बहुजन समुदाय की आवाज और वैचारिक आधार
हर्षवर्धन सपकाल ने महादेव जानकर को बहुजन समुदाय की सशक्त आवाज बताया। जानकर ने कहा कि कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन छत्रपति शिवाजी महाराज, शाहू महाराज, महात्मा फुले और डॉ. बी.आर. आंबेडकर की विचारधारा से प्रेरित है। उनके अनुसार संविधान और लोकतंत्र की रक्षा सीटों की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण है, इसलिए यह गठबंधन वैचारिक समानता के आधार पर बनाया गया है।
महादेव जानकर और आरएसपी की राजनीतिक पृष्ठभूमि
महादेव जानकर ने 2003 में राष्ट्रीय समाज पक्ष की स्थापना की थी। यह पार्टी मुख्य रूप से महाराष्ट्र के धनगर समुदाय और अन्य बहुजन समाज के हितों का प्रतिनिधित्व करती है। 2009 में जानकर ने माधा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बारामती से सुप्रिया सुले के खिलाफ चुनाव लड़ा और वहां भी पराजित हुए।
इसके बावजूद उन्हें देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार में विधान परिषद का सदस्य (एमएलसी) बनाया गया। बाद में उन्हें पशुपालन, डेयरी विकास और मत्स्य पालन विभाग का मंत्री भी नियुक्त किया गया।
पूर्व गठबंधन और वर्तमान स्थिति
आरएसपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले महायुति गठबंधन में शामिल होकर चुनाव लड़ा था। हालांकि, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले इस गठबंधन से अलग होकर आरएसपी ने अपने दम पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। अब वही आरएसपी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए कांग्रेस के साथ आधिकारिक रूप से जुड़ रही है।
इस बीच, कुछ दिन पहले शिवसेना (उद्धव गुट) के सांसद संजय राउत ने राहुल गांधी को फोन कर राज्य में एमवीए दलों को एकजुट होकर चुनाव लड़ने का आग्रह किया था। ऐसे समय में कांग्रेस का आरएसपी के साथ नया समीकरण महाराष्ट्र की आगामी स्थानीय चुनावी राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
समापन के तौर पर, कांग्रेस और राष्ट्रीय समाज पक्ष का यह गठबंधन न केवल स्थानीय चुनावों की रणनीति का हिस्सा है, बल्कि इसे संविधान, लोकतंत्र और बहुजन प्रतिनिधित्व के सवालों से जोड़कर भी पेश किया जा रहा है। अब देखना होगा कि एमवीए के भीतर सीट बंटवारे और चुनावी तालमेल पर इस नए गठजोड़ का क्या असर पड़ता है।
Adarsh Chaurasiya