महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव में भाजपा गठबंधन की बड़ी बढ़त, BMC पर ऐतिहासिक प्रदर्शन

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महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव में भाजपा गठबंधन की बड़ी बढ़त, BMC पर ऐतिहासिक प्रदर्शन

महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव में भाजपा गठबंधन की बड़ी बढ़त, BMC में ऐतिहासिक प्रदर्शन

राज्यभर के नतीजे: 29 में से 25 नगर निगमों में बढ़त

महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेतृत्व वाले गठबंधन को बड़ी सफलता मिलती दिख रही है। 29 नगर निगमों की 2,869 सीटों में से 2,833 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं। इन नतीजों में 29 में से 25 नगर निगमों में भाजपा गठबंधन को बढ़त मिली है, जबकि 36 सीटों के नतीजे आना बाकी हैं।

अब तक के नतीजों के अनुसार भाजपा 1,400 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 397, कांग्रेस को 324, अजित पवार की एनसीपी को 158, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को 153 और मनसे को 13 सीटें मिली हैं। नागपुर, पुणे, ठाणे, नवी मुंबई, पिंपरी चिंचवाड़ और नासिक जैसे प्रमुख शहरों में भी भाजपा गठबंधन को बढ़त मिली है।

मुंबई BMC नतीजे: भाजपा गठबंधन का मजबूत प्रदर्शन

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के 227 वार्डों के परिणाम शुक्रवार देर रात तक घोषित किए गए। यहां भाजपा ने 89, शिवसेना (शिंदे) ने 29, कांग्रेस ने 24, शिवसेना (UBT) ने 65, मनसे ने 6, एआईएमआईएम ने 8, एनसीपी को 3, समाजवादी पार्टी को 2 और एनसीपी (एसपी) को 1 सीट मिली।

मुंबई में पहली बार भाजपा का मेयर बनने की संभावना जताई जा रही है। पिछले लगभग 30 वर्षों से मेयर पद पर शिवसेना का कब्जा रहा है, जबकि चार साल से चुनाव न होने के कारण यह पद खाली था। वरिष्ठ पत्रकार संदीप सोनवलकर के मुताबिक मेयर का आरक्षण (महिला, ओबीसी, एससी या ओपन) लॉटरी सिस्टम से तय होगा, जिसका फैसला चुनाव आयोग करेगा।

गठबंधन, सीट बंटवारा और मतदान प्रतिशत

BMC चुनाव में कुल 227 सीटों पर मतदान हुआ। भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच गठबंधन है, जिसके तहत भाजपा 137 और शिंदे गुट 90 सीटों पर लड़ी। शिवसेना (UBT) ने मनसे के साथ गठबंधन किया, जिसमें UBT 163 और मनसे 52 सीटों पर चुनाव लड़ी। कांग्रेस ने वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के साथ गठबंधन किया और 143 सीटों पर मैदान में उतरी, जबकि VBA 46 सीटों पर लड़ी। अजित गुट वाली एनसीपी बिना गठबंधन के 94 सीटों पर चुनाव लड़ी।

BMC चुनाव में इस बार 52.94% मतदान हुआ, जबकि 2017 के चुनाव में यह आंकड़ा 55.53% था। अधिकारियों के अनुसार मुंबई को 227 वार्डों में बांटा गया है और बहुमत के लिए 114 सीटों की आवश्यकता है। 23 काउंटिंग सेंटर्स पर मतगणना कराई गई, जहां 23 रिटर्निंग ऑफिसर, 2,299 कर्मचारी, 759 पर्यवेक्षक, 770 सहायक और 770 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात रहे।

प्रधानमंत्री और शीर्ष नेताओं की प्रतिक्रियाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महाराष्ट्र के लोगों ने एनडीए के जन-समर्थक सुशासन के एजेंडे को आशीर्वाद दिया है। उन्होंने लिखा कि अलग-अलग नगर निगम चुनावों के नतीजे बताते हैं कि महाराष्ट्र के लोगों के साथ एनडीए का रिश्ता और मजबूत हुआ है तथा गठबंधन का ट्रैक रिकॉर्ड और विकास का विजन लोगों को पसंद आया है। उन्होंने चुनाव में काम करने वाले हर एनडीए कार्यकर्ता की मेहनत की सराहना की।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में विकास के विजन के साथ चुनाव लड़ा गया, जिसके कारण रिकॉर्ड तोड़ जनादेश मिला। उनके अनुसार इन नतीजों से स्पष्ट है कि महाराष्ट्र पीएम मोदी पर भरोसा करता है और भाजपा व महायुति 25 मेयर बनाने जा रही है। उन्होंने महाराष्ट्र की जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं का आभार जताया और कहा कि यह जीत विकास और प्रगति सुनिश्चित करने वाले विजन पर जनता के भरोसे को दर्शाती है।

भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि नगर निकाय चुनावों में भाजपा नेतृत्व वाली महायुति की सफलता पीएम मोदी पर जनता के भरोसे की प्रतीक है और दावा किया कि भाजपा अगले 20–25 वर्षों तक शासन करेगी। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने इसे राष्ट्रवादी ताकतों की जीत बताया और कहा कि मतदाताओं ने पाकिस्तान की सेना के समर्थन में दिखने वालों को सबक सिखाया है।

महाराष्ट्र के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने कहा कि ठाकरे परिवार का शासन अब इतिहास बन चुका है और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में एक नए अध्याय की शुरुआत हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान उद्धव ठाकरे ने तुष्टिकरण की राजनीति के लिए समझौते किए। मंत्री नीतेश राणे ने महायुति की बढ़त को ‘जय श्रीराम’ और ‘आई लव महादेव’ की सोच से जोड़ते हुए मेयर पदों पर महायुति के कब्जे की संभावना जताई।

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि राज्य की जनता ने विकास की राजनीति को चुना है, मुंबई ने महायुति को बहुमत दिया है और जनता नकारात्मकता तथा इमोशन की राजनीति से दूर रह रही है।

विपक्ष के आरोप और प्रतिक्रिया

शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि आधी रात तक अंतिम नतीजे आने की संभावना है और अभी जो आंकड़े दिए जा रहे हैं वे गलत हैं। उनका दावा था कि करीब 100 वार्डों में वोटों की गिनती शुरू भी नहीं हुई थी और मतदान सूची से हजारों मतदाताओं के नाम गायब हैं, विशेषकर उन इलाकों में जहां शिवसेना (UBT), मनसे और कांग्रेस की उपस्थिति है। उन्होंने EVM मशीनों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि वह उनकी बात नहीं सुन रहा।

राउत ने यह भी कहा कि मुकाबला कांटे का है और शिवसेना (UBT) बहुत पीछे नहीं है, जैसा दिखाया जा रहा है। उन्होंने संभावना जताई कि मैच ड्रॉ पर भी समाप्त हो सकता है और यह भी कहा कि शिंदे गुट में शामिल हुए उनके कई पूर्व कॉर्पोरेटर हार गए हैं। कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने दावा किया कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना आगे है और उन्हें बहुमत मिल जाएगा।

स्थानीय नेताओ की प्रतिक्रियाएं और विवाद

BMC चुनाव में भाजपा नेता किरीट सोमैया ने शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे पर तीखे आरोप लगाए और कहा कि मुंबई के लोगों ने उन्हें सबक सिखाया है। उनके कुछ बयानों में उद्धव ठाकरे और मुस्लिम समुदाय के संदर्भ में विवादास्पद टिप्पणियां भी शामिल हैं।

कांग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा ने कहा कि मुंबई की जनता ने ड्रामे की राजनीति नहीं, बल्कि बदलाव, जवाबदेही और विकास के लिए वोट दिया है। उन्होंने विपक्ष के EVM, मतदाता सूची और स्याही पर लगाए आरोपों को अंदरूनी लोकतंत्र की कमी छिपाने का बहाना बताया।

शिवसेना (शिंदे) गुट के मंत्री संजय शिरसाट ने आरोप लगाया कि मतगणना केंद्रों की ओर जा रहे उनके कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और वे इस मामले में कार्रवाई व शिकायत दर्ज कराएंगे। छत्रपति संभाजीनगर में भी काउंटिंग सेंटर के बाहर भीड़ पर पुलिस लाठीचार्ज की जानकारी दी गई।

व्यक्तिगत जीतें और स्थानीय प्रसंग

जलगांव नगर निगम चुनाव में कोल्हे परिवार के तीन सदस्यों ने अलग-अलग वार्डों से जीत दर्ज कर इतिहास रचा। पूर्व महापौर और शिवसेना (शिंदे) गुट के नेता ललित कोल्हे ने जेल से चुनाव लड़कर विजय हासिल की। उनके बेटे पीयूष कोल्हे ने भी अपना पहला चुनाव जीता, जिसके बाद परिवार में भावुक माहौल देखने को मिला और उनकी मां सरिता कोल्हे ने उन्हें गले लगाकर खुशी जताई।

BMC में कई वार्डों से विभिन्न दलों के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। वार्ड 145 से AIMIM की खैरुनिशा अकबर हुसैन, वार्ड 193 से शिवसेना (UBT) की हेमांगी हरीश वर्लेकर, वार्ड 134 से AIMIM की मेहजबीन खान और वार्ड 182 से कांग्रेस की आशा काले विजयी रहीं। वार्ड 209 से शिंदे गुट की पूर्व विधायक यामिनी जाधव ने कांग्रेस उम्मीदवार को हराकर जीत हासिल की।

मुंबई BMC चुनाव में भाजपा के रवि राजा वार्ड 185 से हार गए। वे पिछली BMC परिषद में कांग्रेस की ओर से विपक्ष के नेता थे और बाद में भाजपा में शामिल हुए थे।

जालना के वार्ड नंबर 1 से भाजपा उम्मीदवार भास्कर मुकुंदराव दानवे ने विकास मुद्दा प्रमुख होने की बात कही, जबकि जलगांव के वार्ड 19 से भाजपा के राजेंद्र घुगे पाटिल ने बताया कि महायुति के सभी उम्मीदवार उनके वार्ड से जीते हैं।

महायुति का एजेंडा और चुनावी वादे

भाजपा गठबंधन ने बीएमसी चुनाव में महिलाओं को BEST बसों में यात्रा के लिए किराए में 50% छूट देने का वादा किया। उद्धव–राज ठाकरे गठबंधन ने महिला घरेलू सहायकों को प्रति माह 1,500 रुपये और 700 वर्गफुट तक के घरों पर प्रॉपर्टी टैक्स माफ करने का वादा किया। कांग्रेस ने मुंबई की प्रदूषण समस्या, BEST बस सेवा में सुधार और शहर की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने पर जोर दिया।

शिवसेना नेता शाइना एनसी ने कहा कि महायुति की जीत विकास-केन्द्रित एजेंडे की देन है और हाउसिंग, मेट्रो प्रोजेक्ट, ट्रांसपोर्ट, पर्यावरण, हेल्थकेयर, शिक्षा और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर फोकस का असर नतीजों में दिख रहा है।

BMC की महत्वत्ता और राजनीतिक दांव

BMC को एशिया की सबसे बड़ी सिविक बॉडी माना जाता है, जिसका बजट लगभग 74,000 करोड़ रुपये के आसपास बताया जाता है। यह बजट गोवा, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा जैसे राज्यों के बजट से भी बड़ा है। 1997 से 2017 तक बिना विभाजित शिवसेना ने यहां लगातार सत्ता में रहकर शासन किया था, उस समय भाजपा उसकी सहयोगी थी।

इसी महत्व के कारण BMC चुनाव को सिर्फ नगर निगम का नहीं, बल्कि मुंबई की सत्ता हासिल करने की लड़ाई माना जा रहा है। यह महायुति और महाविकास आघाड़ी दोनों के लिए साख का सवाल बन गया। भाजपा, उद्धव ठाकरे की शिवसेना, एकनाथ शिंदे की शिवसेना, कांग्रेस, शरद पवार और अजित पवार सभी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटे रहे।

वार्ड पुनर्विन्यास और टले हुए चुनाव

नगर निगम चुनाव सामान्यत: हर पांच वर्ष में होते हैं। BMC का पिछला चुनाव 2017 में हुआ था, इसलिए अगला चुनाव 2022 में होना था। उस समय निर्वाचन प्रक्रिया और वार्ड सीमाओं में बदलाव की प्रक्रिया चल रही थी। नए वार्ड नक्शे और सीटों का पुनर्विन्यास प्रस्तावित था, जिसके तहत वार्डों की संख्या 227 से बढ़ाकर 236 करने का सुझाव था। इस प्रस्ताव के चलते पुरानी सीटों पर चुनाव कराना संभव नहीं हो पाया और चुनाव टाल दिए गए, हालांकि अंततः यह प्रस्ताव पास नहीं हुआ।

एग्जिट पोल, सुरक्षा और चुनाव पूर्व माहौल

BMC चुनाव के लिए आए तीन एग्जिट पोल में भाजपा गठबंधन को 130 से 150 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था। कांग्रेस गठबंधन के लिए 60 सीटों और अन्य के लिए 5 से 7 सीटों का अनुमान था। मतदान के बाद और मतगणना से पूर्व पिंपरी-चिंचवाड़ सहित कई स्थानों पर भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया।

मतगणना से पहले उद्धव और राज ठाकरे के चाचा चंद्रकांत वैद्य ने दोनों भाइयों की सफलता की कामना की और विश्वास जताया कि BMC पर उनका शासन मुंबई के हित में होगा। दूसरी ओर, भाजपा प्रवक्ता धर्मपाल मेश्राम ने मतगणना से पहले ही दावा किया कि महायुति सभी 29 नगर निगमों में अपना झंडा फहराएगी।

निष्कर्ष: विकास बनाम आरोपों के बीच चुनावी संदेश

महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों के रुझान और घोषित नतीजे दिखाते हैं कि शहरी इलाकों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों की पकड़ मजबूत हुई है, खासकर BMC जैसे महत्वपूर्ण निकाय में। सत्ता पक्ष इसे विकास, सुशासन और पीएम मोदी के नेतृत्व पर भरोसे की जीत बता रहा है, जबकि विपक्ष मतदान प्रक्रिया, मतदाता सूची और EVM को लेकर सवाल उठा रहा है तथा कांटे की टक्कर का दावा कर रहा है।

अंतिम नतीजों के पूर्ण रूप से सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि नगर निगमों में सत्ता का संतुलन कितनी मजबूती से भाजपा गठबंधन के पक्ष में गया है और BMC में मेयर पद पर कौन दल काबिज होगा। फिलहाल रुझान महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में महायुति की स्थिति को मजबूत दिखा रहे हैं।

Amit Pateria