मध्यप्रदेश में स्लीपर बसों पर कड़ी कार्रवाई, 3 दिन में अनिवार्य एआईएस जांच

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मध्यप्रदेश में स्लीपर बसों पर कड़ी कार्रवाई, 3 दिन में अनिवार्य एआईएस जांच

मध्यप्रदेश में स्लीपर बसों की सुरक्षा पर सख्ती, एआईएस जांच अनिवार्य

मध्यप्रदेश में स्लीपर बसों में आग की लगातार घटनाओं के बाद परिवहन विभाग ने सुरक्षा मानकों को लेकर कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग ने सभी बस ऑपरेटरों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर बसों की एआईएस मानकों के अनुसार जांच कराना अनिवार्य होगा।

तीन दिन में एआईएस जांच नहीं तो ब्लैकलिस्ट

परिवहन विभाग ने आदेश जारी कर कहा है कि तीन दिन के भीतर ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड (एआईएस) जांच नहीं कराने वाली स्लीपर बसों को सीधे ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। इसके लिए प्रदेश के सभी आरटीओ कार्यालयों से बस ऑपरेटरों को नोटिस जारी किए गए हैं और बसों सहित तलब किया गया है।

विशेष चेकिंग अभियान और जब्ती कार्रवाई

बुधवार देर रात पूरे प्रदेश में चलाए गए विशेष चेकिंग अभियान के दौरान फायर सेफ्टी मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली 27 स्लीपर बसों को जब्त किया गया। इसके बाद अब दूसरे चरण की सख्त कार्रवाई शुरू की गई है, जिसमें समय सीमा के भीतर एआईएस जांच कराना अनिवार्य कर दिया गया है।

एआईएस मानक क्या हैं

एआईएस एक तकनीकी सुरक्षा मानक है, जिसमें बस की संरचना, इलेक्ट्रिकल सिस्टम और अग्नि सुरक्षा से जुड़े प्रावधान शामिल होते हैं। एआईएस-119 के तहत बसों में फायर अलार्म और फायर डिटेक्शन सिस्टम लगाना अनिवार्य किया गया है, ताकि आग लगने की स्थिति में समय पर चेतावनी मिल सके।

ब्लैकलिस्ट होने पर परमिट और फिटनेस सेवाएं बंद

जांच नहीं कराने वाली बसों को वाहन पोर्टल पर ‘नॉट टू बी ट्रांजेक्टेड’ श्रेणी में डाल दिया जाएगा। ब्लैकलिस्ट होने के बाद ऐसे बस ऑपरेटरों को परमिट, फिटनेस जैसी परिवहन संबंधी सेवाओं का लाभ नहीं मिल सकेगा, जिससे उनकी बसों का संचालन practically रुक जाएगा।

बस ऑपरेटरों के लिए अस्थायी राहत

परिवहन विभाग ने बस ऑपरेटरों को एक माह की अस्थायी राहत भी दी है। इस अवधि के दौरान बिना एआईएस-119 जांच के बसें चल सकेंगी, लेकिन हर बस में 10 किलोग्राम क्षमता का वैध अग्निशमन यंत्र रखना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक बसें निर्धारित मानकों के अनुसार जांच पूरी नहीं करवा लेतीं।

मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद सख्ती

बीते दो वर्षों में प्रदेश में स्लीपर बसों में आग की 20 से अधिक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए सभी राज्यों से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। इसी निर्देश और दबाव के बाद मध्यप्रदेश में स्लीपर बसों की सुरक्षा को लेकर निगरानी और सख्ती बढ़ा दी गई है।

निष्कर्ष

परिवहन विभाग की इन ताजा व्यवस्थाओं का उद्देश्य स्लीपर बसों में यात्रा करने वाले यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आग की घटनाओं पर रोक लगाना है। एआईएस मानकों की अनिवार्य जांच, ब्लैकलिस्ट की चेतावनी और फायर सेफ्टी उपकरणों की अनिवार्यता के साथ सरकार सख्त रुख अपनाती दिख रही है।

Pushpendra Chaubey