महाराष्ट्र निकाय चुनाव में महायुति गठबंधन की बड़ी जीत
महाराष्ट्र में हुए नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों के नतीजों में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने स्पष्ट बढ़त हासिल की है। भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, जबकि विपक्षी महाविकास अघाड़ी को सीमित सफलता मिली।
परिणाम: महायुति आगे, भाजपा सबसे बड़ी पार्टी
राज्य की 288 नगर परिषदों और नगर पंचायतों की सीटों पर दो चरणों में चुनाव कराए गए थे। रविवार को घोषित नतीजों के अनुसार महायुति गठबंधन ने कुल 213 सीटों पर जीत दर्ज की। इनमें भाजपा ने 118 सीटें जीतकर अपना वर्चस्व स्थापित किया।
महायुति की सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 58 सीटें और एनसीपी (अजित पवार गुट) को 37 सीटें मिलीं। दूसरी ओर विपक्षी महाविकास अघाड़ी को कुल 51 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा, जिसमें कांग्रेस को 31, उद्धव ठाकरे की शिवसेना को 9 और शरद पवार की एनसीपी को 10 सीटें मिलीं। शेष 24 सीटों पर स्थानीय गठबंधनों और अन्य उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।
चुनावी चरण, निर्विरोध जीत और स्थानीय समीकरण
निकाय चुनाव दो चरणों में हुए। पहले चरण में 2 दिसंबर को 263 निकायों में मतदान संपन्न हुआ, जबकि शेष 23 नगर परिषदों और कुछ रिक्त पदों के लिए 20 दिसंबर को वोटिंग कराई गई।
कई स्थानों पर निर्विरोध निर्वाचन भी देखने को मिला। धुले जिले की डोंडाइचा नगर परिषद और सोलापुर की उंगर नगर पंचायत में अध्यक्ष और सदस्यों का चुनाव बिना मुकाबले के हुआ। इसी तरह जलगांव जिले की जामनेर नगर परिषद में अध्यक्ष पद पर कोई मुकाबला नहीं था। इन तीनों जगहों पर भाजपा ने निर्विरोध जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की।
संजय राउत के आरोप: मशीन, पैसा और महंगी कैंपेनिंग
चुनाव नतीजों के बाद शिवसेना (उद्धव) के सांसद संजय राउत ने चुनाव प्रक्रिया और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका आरोप है कि भाजपा को लगभग 120–125, शिंदे गुट को करीब 54 और अजित पवार गुट को 40–42 सीटें मिलीं, जो विधानसभा चुनाव के पैटर्न से मिलती-जुलती हैं। उन्होंने कहा कि मशीन, सेटिंग और पैसों के सहारे यह नतीजे हासिल किए गए और संख्या में कोई खास बदलाव नहीं दिखा।
राउत ने आरोप लगाया कि इस चुनाव में पैसों की “बारिश” हुई और 30 करोड़ के बजट वाली नगरपालिकाओं पर करीब 150 करोड़ रुपये तक खर्च किए गए। उनके मुताबिक, सत्ताधारी दलों ने निकाय चुनाव अभियान में हेलिकॉप्टर और प्राइवेट प्लेन तक का इस्तेमाल किया, जबकि उनकी पार्टी ने यह चुनाव बड़े पैमाने पर कार्यकर्ताओं के भरोसे छोड़ा।
उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता में शामिल तीनों पार्टियां कई जगह एक-दूसरे के खिलाफ लड़ती रहीं, जिससे भारी मात्रा में पैसा खर्च हुआ और मतदाताओं में भी पैसे के बदले वोट देने की आदत विकसित हो रही है।
बारामती में जय पाटिल की लगातार चौथी जीत
निकाय नतीजों के बीच एनसीपी (अजित पवार) के लिए बारामती से अच्छी खबर आई। पार्टी के सिटी अध्यक्ष जय पाटिल ने बारामती नगर परिषद चुनाव में लगातार चौथी बार जीत दर्ज की। उनके प्रतिद्वंद्वी को मात्र 200 वोट मिले। जय पाटिल इससे पहले नगर परिषद के उपाध्यक्ष (डिप्टी मेयर) भी रह चुके हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर उनकी पकड़ का संकेत मिलता है।
निष्कर्ष: महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति में सत्ता पक्ष की मजबूती
महाराष्ट्र के निकाय चुनाव नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया कि राज्य की स्थानीय राजनीति पर इस समय महायुति गठबंधन का मजबूत नियंत्रण है। भाजपा और उसके सहयोगियों ने नगर परिषदों और नगर पंचायतों में अपना संगठनात्मक ढांचा और चुनावी तैयारियां दिखाईं। हालांकि विपक्ष ने ईवीएम, पैसे के दुरुपयोग और महंगी कैंपेनिंग पर सवाल उठाए हैं, लेकिन फिलहाल नतीजे सत्ता पक्ष के पक्ष में राजनीतिक संदेश दे रहे हैं। आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले ये नतीजे राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण संकेत माने जा रहे हैं।
Lokendra Mishra