हरदा में करणी सेना का जनक्रांति आंदोलन, प्रशासन से टकराव तेज
मध्य प्रदेश के हरदा जिले में करणी सेना परिवार का जनक्रांति आंदोलन लगातार जारी है। नेहरू स्टेडियम में चल रहे इस प्रदर्शन को जिले के इतिहास का सबसे बड़ा आंदोलन बताया जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में लोग अपनी मांगों को लेकर जुटे हैं।
लाठीचार्ज मामले पर पुलिसकर्मियों को हटाने और जांच का आश्वासन
आंदोलन के बीच करणी सेना का सात सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल हरदा कलेक्टर से मिला। श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने बताया कि बातचीत के दौरान प्रशासन ने हरदा में हुए लाठीचार्ज के आरोपित पुलिसकर्मियों को हटाने और उनके खिलाफ मजिस्ट्रियल जांच कराने का भरोसा दिया है।
हालांकि करणी सेना नेतृत्व का कहना है कि यह आश्वासन केवल मौखिक रूप से दिया गया है, जबकि वे प्रशासन से लिखित आदेश की मांग कर रहे हैं। संगठन का मत है कि बिना आधिकारिक लिखित आदेश के वे आंदोलन खत्म नहीं करेंगे।
भोपाल और दिल्ली कूच की चेतावनी
इससे पहले करणी सेना परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीवन सिंह शेरपुर और श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने चेतावनी दी थी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे भोपाल और दिल्ली की ओर कूच करेंगे।
नेताओं ने साफ किया कि आंदोलन केवल आश्वासनों पर आधारित नहीं रहेगा और जब तक ठोस निर्णय और आदेश जारी नहीं होते, तब तक दबाव बनाए रखा जाएगा।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और बाहर से बुलाया गया बल
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिले में पांच स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। प्रदर्शन स्थल नेहरू स्टेडियम से लेकर हरदा जिले के सभी प्रवेश और निकास मार्गों पर कड़ी निगरानी की जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
बाहर से बुलाए गए पुलिस बल के ठहरने के लिए शहर के करीब 30 होटल और धर्मशालाएं प्रशासन ने अपने नियंत्रण में ले ली हैं। इससे साफ है कि प्रशासन इस आंदोलन को बेहद संवेदनशील मानते हुए पूरी तैयारी के साथ स्थिति पर नजर रखे हुए है।
करणी सेना की प्रमुख मांगें
करणी सेना परिवार ने अपनी कुल 21 सूत्रीय मांगें सामने रखी हैं। इन मांगों में न्यायिक जांच, दर्ज मामलों की वापसी, आरक्षण और भर्ती प्रक्रिया में सुधार, आर्थिक आधार पर आरक्षण की व्यवस्था, किसानों से जुड़े मुद्दों का समाधान, बिजली बिल और स्मार्ट मीटर से संबंधित समस्याओं का निपटारा शामिल है।
इसके अलावा शिक्षा और रोजगार के अवसर, महिला सुरक्षा, गो-संरक्षण, पूर्व सैनिकों के अधिकारों और सुविधाओं तथा मीडिया कर्मियों से संबंधित मांगें भी सूची में शामिल हैं। संगठन का कहना है कि ये मांगें आम जनता के व्यापक हित से जुड़ी हैं और सरकार को इन्हें गंभीरता से लेना चाहिए।
निष्कर्ष: लिखित आश्वासन पर टिका अगला कदम
हरदा का यह आंदोलन फिलहाल जारी है और करणी सेना नेतृत्व प्रशासन से लिखित आदेश मिलने पर ही आगे की रणनीति तय करने की बात कह रहा है। लाठीचार्ज के आरोपित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई, न्यायिक और मजिस्ट्रियल जांच, तथा 21 सूत्रीय मांगों को लेकर संगठन अपने रुख पर अडिग है।
प्रशासन और करणी सेना के बीच चल रही बातचीत के बीच जिले की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखा गया है। अब आगे की स्थिति इस पर निर्भर करेगी कि प्रशासन मौखिक भरोसे को लिखित निर्णयों में कितनी जल्दी बदलता है और आंदोलनकारी इसे किस रूप में स्वीकार करते हैं।
Gulzar Ahmad