महायुति की बड़ी जीत से बढ़ सकती है एकनाथ शिंदे और विपक्ष की टेंशन

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महायुति की बड़ी जीत से बढ़ सकती है एकनाथ शिंदे और विपक्ष की टेंशन

महाराष्ट्र निकाय चुनाव में महायुति की बड़ी जीत, भाजपा बनी सबसे बड़ी पार्टी

महाराष्ट्र में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी, शिंदे गुट की शिवसेना और अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के गठबंधन ‘महायुति’ ने जोरदार प्रदर्शन किया है। गठबंधन ने कुल 288 में से 215 निकायों में अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की है, जबकि भाजपा अकेले सबसे बड़े दल के रूप में उभरकर सामने आई है।

चुनाव प्रक्रिया और मतदान प्रतिशत

राज्य में 286 नगर परिषदों और नगर पंचायतों के लिए दो चरणों में मतदान हुआ। इनमें 246 नगर परिषद और 42 नगर पंचायतें शामिल थीं। पहले चरण में 2 दिसंबर को 263 निकायों के लिए मतदान हुआ, जिसमें 67 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। दूसरे चरण में 20 दिसंबर को 23 निकायों के लिए मतदान हुआ, जहां 47 प्रतिशत मतदाता मतदान के लिए पहुंचे।

महायुति का प्रदर्शन और सीटों का बंटवारा

रविवार सुबह शुरू हुई मतगणना देर शाम तक जारी रही। अंतिम रुझानों के अनुसार महायुति ने 215 निकाय अध्यक्ष पदों पर जीत हासिल की। इनमें भारतीय जनता पार्टी के खाते में 129, शिवसेना (शिंदे गुट) के पास 51 और एनसीपी (अजित पवार) के पास 35 अध्यक्ष पद आए। इस तरह विधानसभा चुनाव के बाद स्थानीय निकायों में भी भाजपा ने खुद को सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में स्थापित किया।

सहयोगी दलों के बीच ‘फ्रेंडली फाइट’

महायुति के तीनों घटक दलों भाजपा, शिवसेना और एनसीपी के बीच कई निकायों पर आपसी समझ के बजाय ‘फ्रेंडली फाइट’ देखने को मिली। इन जगहों पर घटक दलों ने अलग-अलग उम्मीदवार उतारे। कणकवली, दहानू और पालघर में शिवसेना ने भाजपा को मात दी। वहीं लोहा में एनसीपी (अजित पवार) ने भाजपा उम्मीदवार गजानन सूर्यवंशी और उनके पांच परिजनों को हराया। यहां एनसीपी के विजयी अध्यक्ष प्रत्याशी का नाम शरद पवार है। दूसरी ओर, वडनगर में भाजपा ने शिवसेना पर जीत दर्ज की।

भाजपा की रणनीति और ‘शत-प्रतिशत भाजपा’ लक्ष्य

भाजपा ने इन स्थानीय चुनावों में भी सक्रिय और संगठित तरीके से प्रचार किया। पार्टी के लिए यह चुनाव अपने लक्ष्य ‘शत प्रतिशत भाजपा’ की दिशा में प्रगति मापने का एक अवसर माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, यह ऐसा राजनीतिक भविष्य संकेत कर सकता है, जहां भाजपा को सत्ता में बने रहने के लिए सहयोगियों की आवश्यकता कम हो जाए। इसी वजह से स्थानीय चुनावों के नतीजे पार्टी के लिए अहम मील का पत्थर माने जा रहे हैं, जबकि इसके सहयोगी दल इन परिणामों को उतनी सकारात्मक नजर से नहीं देख सकते, जितना भाजपा देख रही है।

भाजपा के एक नेता ने कहा कि ये नतीजे 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनाव के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास बढ़ाएंगे।

विपक्ष पर असर और आगामी बीएमसी चुनाव

विधानसभा चुनाव में पहले से ही झटके झेल चुके विपक्ष के लिए स्थानीय निकाय चुनावों में प्रदर्शन कमजोर रहा। खासकर तब, जब बृह्नमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में कुछ ही हफ्ते बाकी हैं। बीएमसी में शिवसेना (यूबीटी) लगभग तीन दशक से अपना प्रभाव बनाए हुए है और वह इसे बचाए रखने की कोशिश करेगी।

स्थानीय निकाय चुनावों में शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरद पवार गुट) दोहरे अंक में भी सीटें हासिल नहीं कर पाए। पहले से ही विभाजन की वजह से कमजोर पड़े इन दलों के लिए यह नतीजे चिंता बढ़ाने वाले माने जा रहे हैं।

देवेंद्र फडणवीस का बयान

राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नतीजों को संगठन और सरकार, दोनों के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव विकास के मुद्दों पर लड़ा गया। उनके अनुसार उन्होंने सकारात्मक विकास एजेंडा, अब तक किए गए कार्यों और भविष्य की योजनाओं के आधार पर वोट मांगे।

फडणवीस ने कहा कि उन्होंने पहली बार पूरी तरह सकारात्मक वोट की अपील की और लोगों ने भी उन्हें सकारात्मक वोट दिए। उनके मुताबिक, इन नतीजों ने यह साबित किया है कि जनता ने विकास आधारित राजनीति और महायुति की नीतियों पर भरोसा जताया है।

Sachin Saxena