मोदी ने न्याय प्रणाली में सुधार की जरूरत पर चर्चा की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) सम्मेलन में भाग लिया। उन्होंने कहा कि कानून की भाषा इतनी सरल होनी चाहिए कि आम लोग उसे आसानी से समझ सकें। हर नागरिक को न्याय मिलने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए, चाहे वह गरीब हो या अमीर।
गरीब और वंचितों के लिए लीगल एड डिफेंस सिस्टम
पीएम मोदी ने बताया कि सरकार ने गरीबों और वंचित वर्गों को न्याय दिलाने के लिए लीगल एड डिफेंस सिस्टम शुरू किया है। इस योजना के तहत पिछले तीन सालों में आठ लाख से ज्यादा आपराधिक मामलों का निपटारा किया गया है। यह पहल न्याय की सुगमता की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट की तारीफ करते हुए कहा कि इससे न्याय प्रणाली और अधिक पारदर्शी और आधुनिक हो रही है।
जेलों में विचाराधीन कैदियों की स्थिति पर चिंता
जस्टिस विक्रमनाथ ने कहा कि भारत की जेलों में 70 प्रतिशत कैदी ऐसे हैं जिन्हें अभी तक दोषी नहीं ठहराया गया है। उन्होंने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए कानूनी सहायता और विचाराधीन कैदियों की हिरासत प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।
सामुदायिक मध्यस्थता और सामाजिक न्याय
प्रधानमंत्री ने सामुदायिक मध्यस्थता के लिए एक नया प्रशिक्षण मॉड्यूल भी शुरू किया। उन्होंने बताया कि भारत में आपसी समझौते से झगड़े सुलझाने की परंपरा बहुत पुरानी है। नया मेडिएशन एक्ट इस परंपरा को आधुनिक रूप देगा और समाज में सद्भाव बनाए रखने में मदद करेगा।
NALSA की भूमिका
NALSA की स्थापना 1987 में गरीब और कमजोर वर्गों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इसके प्रमुख होते हैं और राज्य स्तर पर भी विधिक सेवा प्राधिकरण काम करता है। यह संस्था लोक अदालतों का आयोजन करती है और संविधान के अनुच्छेद 39(ए) के तहत समान न्याय सुनिश्चित करती है।
न्याय प्रणाली को सरल और सुलभ बनाना
प्रधानमंत्री ने निष्कर्ष में कहा कि जब लोग अपनी भाषा में कानून को समझते हैं, तो वे उसका पालन बेहतर तरीके से करते हैं और न्याय प्रक्रिया अधिक प्रभावी होती है। उन्होंने न्याय को सभी के लिए सुलभ बनाने के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
Rajesh Agnihotri