CJI गवई ने मणिपुर राहत शिविर का अनुभव साझा किया, न्याय को बताया हर नागरिक का अधिकार

· 1 min read

CJI बीआर गवई ने मणिपुर राहत शिविर का अनुभव साझा किया

भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई ने शनिवार को महात्मा गांधी को स्मरण करते हुए जातीय हिंसा प्रभावित मणिपुर के चुराचांदपुर में राहत शिविर में बिताए अपने अनुभव को साझा किया। उन्होंने न्याय को कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं बल्कि हर नागरिक का अधिकार बताया।

राहत शिविर में अनुभव

CJI गवई ने सुप्रीम कोर्ट में कानूनी सहायता वितरण तंत्र को मजबूत करने पर राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन को संबोधित करते हुए कहा, "मणिपुर के चुराचांदपुर में राहत सामग्री बांटने के दौरान एक बुजुर्ग महिला ने हाथ जोड़कर कहा, 'बने रहो भैया।' यह पल याद दिलाने वाला था कि विधिक सेवा आंदोलन का असली इनाम आंकड़ों में नहीं, बल्कि नागरिकों की कृतज्ञता और विश्वास में है।"

हाशिए पर पड़े लोगों के लिए न्याय का आह्वान

उन्होंने साथी न्यायाधीशों, वकीलों और कानूनी अधिकारियों से समाज के हाशिए पर पड़े लोगों के लिए न्याय सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि न्याय केवल कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि सभी नागरिकों का अधिकार है।

मणिपुर दौरे की जानकारी

CJI गवई ने मार्च 2025 में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में मणिपुर का दौरा किया था। उन्होंने मणिपुर के विभिन्न जिलों में विधिक सेवा शिविरों और चिकित्सा शिविरों के साथ-साथ इंफाल पूर्व, इंफाल पश्चिम और उखरूल जिलों में नए विधिक सहायता क्लीनिकों का उद्घाटन किया।

न्याय का प्रकाश सब तक पहुंचाने की भूमिका

उन्होंने कहा, "न्यायालय के अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे न्याय का प्रकाश समाज के हाशिए पर खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं। हमारी सफलता का असली पैमाना आंकड़ों में नहीं, बल्कि आम आदमी के भरोसे में है।"

Adarsh Chaurasiya