मोहन भागवत का बयान: RSS को BJP के चश्मे से देखना गलत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने कोलकाता में आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में कहा कि संघ को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के चश्मे से समझने की कोशिश करना गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि RSS सिर्फ एक सेवा संगठन भर नहीं है और उसे जानने के लिए सीधे संघ को देखना और अनुभव करना आवश्यक है।
संघ को अनुभव से समझने पर जोर
भागवत ने कहा कि बहुत से लोग RSS को BJP के नजरिए से समझने की प्रवृत्ति रखते हैं, जो उनके अनुसार एक बड़ी गलती है। उन्होंने कहा कि केवल दूर से देखकर संघ को नहीं समझा जा सकता, बल्कि उसके कार्यों और विचारधारा को अनुभव करना पड़ता है।
राहुल गांधी की आलोचना के बीच आया बयान
भागवत का यह बयान उस पृष्ठभूमि में आया, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जर्मनी की राजधानी बर्लिन में दिए एक बयान में RSS प्रमुख की आलोचना की थी। राहुल गांधी ने कहा था कि RSS चीफ खुले तौर पर कह रहे हैं कि सच्चाई का कोई महत्व नहीं, ताकत महत्वपूर्ण है।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में दावा किया था कि भारत की संस्कृति सत्य पर आधारित है और विभिन्न धर्म भी मूल रूप से सत्य के पालन की बात करते हैं। उनके अनुसार कांग्रेस, महात्मा गांधी और उनके समर्थक भारत के सत्य की रक्षा करते हैं, जबकि RSS ऐसा नहीं करता।
संघ के 100 साल पूरे होने पर कार्यक्रम
मोहन भागवत कोलकाता में RSS के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने हिंदुओं, राजनीति और संघ के कामों से जुड़ी विभिन्न बातें रखीं और संगठन के दृष्टिकोण पर अपनी बात स्पष्ट की।
अंडमान में दिया था सांस्कृतिक पहचान पर संदेश
इससे पहले 14 दिसंबर को अंडमान के श्रीविजय पुरम स्थित नेताजी स्टेडियम में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन समिति की एक जनसभा में भी मोहन भागवत ने संबोधन दिया था। उन्होंने कहा था कि हिंदुओं को एकजुट होकर देश को आगे ले जाना होगा।
उस कार्यक्रम में उन्होंने यह भी कहा था कि हमें तय करना होगा कि हमारे घर की दीवारों पर स्वामी विवेकानंद की तस्वीर हो या माइकल जैक्सन की। उनके इस बयान को सांस्कृतिक पहचान और मूल्यों से जोड़कर देखा गया।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, भागवत ने कोलकाता के कार्यक्रम में यह संदेश देने की कोशिश की कि RSS को केवल राजनीतिक संदर्भ में या BJP से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार संघ की भूमिका और विचारधारा को समझने के लिए उसके कार्यों और अनुभवों को प्रत्यक्ष रूप से जानना जरूरी है, जबकि समानांतर रूप से कांग्रेस नेता राहुल गांधी RSS की आलोचना करते हुए उसे सत्य से दूर और शक्ति पर केंद्रित संगठन के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं।
Arvind Vishwakarma