MP में CAG रिपोर्ट ने खोली सरकार की पोल: वक्फ बोर्ड का कब्जा, सड़कों-कॉलोनियों में करोड़ों की धांधली

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MP में CAG रिपोर्ट ने खोली सरकार की पोल: वक्फ बोर्ड का कब्जा, सड़कों-कॉलोनियों में करोड़ों की धांधली

CAG रिपोर्ट में मध्य प्रदेश सरकार की गड़बड़ियां उजागर

नियंत्रक महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में मध्य प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों में वर्ष 2018 से 2023 के दौरान हुई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाहियों का खुलासा हुआ है। यह विस्तृत रिपोर्ट 20 फरवरी को विधानसभा में पेश की गई, जिसमें कुल 14 विभागों के कामकाज और योजनाओं की पड़ताल की गई है।

वक्फ बोर्ड द्वारा सरकारी जमीनों पर कब्जा

रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के 20 जिलों में 77 करोड़ रुपये मूल्य की 33 सरकारी संपत्तियों को वक्फ बोर्ड की संपत्ति के रूप में पंजीकृत कर दिया गया। यह घटना कलेक्टरों की अनदेखी और लापरवाही का परिणाम थी। CAG ने सरकार के इस स्पष्टीकरण को खारिज कर दिया कि यह एक "तकनीकी त्रुटि" थी। रिपोर्ट में बताया गया कि कुछ संपत्तियां हाल ही में पंजीकृत हुई थीं और दो संपत्तियों पर कलेक्टरों द्वारा आपत्ति दर्ज करने के बावजूद वक्फ बोर्ड ने उन्हें अपनी संपत्ति के रूप में दर्ज कर लिया था। CAG ने इसे वक्फ एक्ट का दुरुपयोग और सरकारी जमीनों पर कब्जा बताया।

लोक निर्माण विभाग (PWD) की खामियां

लोक निर्माण विभाग ने नर्मदापुरम और विदिशा जिलों में स्वीकृति से 24 किलोमीटर अधिक लंबी सड़कें बना दीं, जिससे 15.80 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय हुआ और एशियाई विकास बैंक (ADB) के ऋण की शर्तों का उल्लंघन हुआ। इसके अलावा, रायसेन जिले में एक सड़क ऐसे क्षेत्र में बना दी गई जो जल संसाधन विभाग की सिंचाई परियोजना के कारण जल्द ही डूब क्षेत्र में आने वाला था, बावजूद इसके कि विभाग को इसकी जानकारी थी। रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि विभाग के पास ब्लैकलिस्टेड फर्मों की निगरानी का कोई तंत्र नहीं है, जिसके चलते एक ब्लैकलिस्टेड फर्म (मेसर्स केतन कंस्ट्रक्शन लिमिटेड) को साझेदारी के माध्यम से 139.35 करोड़ रुपये का अनुबंध मिल गया।

नगर तथा ग्राम निवेश (T&CP) की विफलताएं

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की निष्क्रियता के कारण राज्य में अवैध कॉलोनियां पनप गईं और शहरी विकास अव्यवस्थित रहा। इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर नगर निगम 260 करोड़ रुपये के "आश्रय शुल्क" का हिसाब नहीं दे पाए, जिसे CAG ने अनुचित बताया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस शुल्क का उपयोग प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए किया गया, जो नगर पालिका अधिनियम 1998 के प्रावधानों के खिलाफ है, क्योंकि पीएम आवास के लिए अलग से बजट होता है। भोपाल नगर निगम ने कलेक्टर द्वारा सूचित 255 अवैध कॉलोनियों पर तीन साल तक कोई कार्रवाई नहीं की। इसी तरह, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर नगर निगमों ने 1331 अवैध कॉलोनियों में से केवल 479 को ही रहने लायक बनाया, जबकि बाकी पर केवल FIR दर्ज की गई, जिसकी आगे की कार्रवाई का कोई विवरण नहीं मिला।

स्कूल शिक्षा विभाग में छात्र-शिक्षक अनुपात

रिपोर्ट में स्कूल शिक्षा विभाग में छात्र-शिक्षक अनुपात में गंभीर विसंगतियां सामने आईं। टीकमगढ़ के हायर सेकेंडरी स्कूलों में प्रति शिक्षक 112 छात्र थे, जबकि राज्य का औसत 40 छात्र प्रति शिक्षक का है। अशोक नगर, मंडला, रतलाम, सतना, शहडोल, शिवपुरी और टीकमगढ़ जैसे कई जिलों में यह अनुपात राज्य के औसत से काफी अधिक पाया गया। वर्ष 2018-19 से 2019-20 के बीच "एक परिसर, एक शाला" योजना के तहत स्कूलों की कुल संख्या में 25% की गिरावट भी दर्ज की गई।

कुल मिलाकर, CAG की इस रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार के विभिन्न प्रशासनिक क्षेत्रों में पारदर्शिता, जवाबदेही और कुशल प्रबंधन की कमी को उजागर किया है, जिससे करोड़ों रुपये का नुकसान और जनता को असुविधा हुई है।

Arvind Vishwakarma