MP में 'स्कूल चलें हम' अभियान का आगाज: CM ने किया शुभारंभ, 92 हजार स्कूलों में प्रवेशोत्सव

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MP  में  'स्कूल चलें हम'  अभियान का आगाज: CM ने किया शुभारंभ,  92 हजार स्कूलों  में प्रवेशोत्सव

MP में 'स्कूल चलें हम' अभियान का भव्य शुभारंभ

मध्यप्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र 2024-25 का आगाज 'स्कूल चलें हम' अभियान के साथ 1 अप्रैल से हो गया है। चार दिन तक चलने वाले इस राज्यव्यापी अभियान का मुख्य फोकस अधिक से अधिक बच्चों को शिक्षा से जोड़ना है। बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के सांदीपनि विद्यालय टीटीनगर में राज्य स्तरीय प्रवेश उत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बच्चों पर पुष्प वर्षा की और उन्हें साइकिलें वितरित कीं। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, मंत्री विश्वास सारंग, मंत्री विजय शाह, मंत्री कृष्णा गौर सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे।

अभियान का मुख्य उद्देश्य और alcance

यह अभियान राज्य के करीब 92 हजार सरकारी स्कूलों और 85 लाख विद्यार्थियों वाले विशाल तंत्र में नामांकन बढ़ाने, बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले (ड्रॉपआउट) बच्चों को वापस स्कूल लाने और शिक्षा के प्रति एक सकारात्मक माहौल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य स्तर से लेकर ग्राम स्तर तक कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा तय की गई है। स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कार्यक्रमों का आयोजन व्यवस्थित और प्रभावी तरीके से किया जाए। अभियान का सबसे अहम उद्देश्य उन बच्चों की पहचान कर उन्हें स्कूलों से जोड़ना है, जो अभी तक शिक्षा से दूर हैं। इसके लिए गांव और बस्तियों में ऐसे बच्चों की पहचान की जाएगी।

चार दिवसीय अभियान की विस्तृत रूपरेखा

पहला दिन: बालसभा और पाठ्य-पुस्तकों का वितरण (1 अप्रैल)

अभियान के पहले दिन 1 अप्रैल को सभी स्कूलों में बालसभा का आयोजन किया गया। इस दिन बच्चों को नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तकों का वितरण किया गया, ताकि सत्र की शुरुआत से ही उनकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए। बच्चों के लिए विशेष भोजन की व्यवस्था भी की गई, जिससे स्कूल का माहौल उत्साहपूर्ण बना रहे।

दूसरा दिन: 'भविष्य से भेंट' (2 अप्रैल)

अभियान के दूसरे दिन विद्यार्थियों को प्रेरित करने पर जोर रहेगा। इस दिन विभिन्न क्षेत्रों के सफल लोग जैसे खिलाड़ी, कलाकार, अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता स्कूलों में पहुंचकर बच्चों से संवाद करेंगे। वे अपने अनुभव साझा कर पढ़ाई के महत्व को समझाएंगे और बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे।

तीसरा दिन: सांस्कृतिक गतिविधियां और अभिभावक भागीदारी (3 अप्रैल)

3 अप्रैल को स्कूलों में सांस्कृतिक और खेल-कूद कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें पालकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इस दौरान उन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी और शिक्षा में उनकी भूमिका को मजबूत करने पर जोर रहेगा। जिन बच्चों की उपस्थिति 85% से अधिक रही है, उनके पालकों को सम्मानित भी किया जाएगा।

चौथा दिन: कमजोर छात्रों पर विशेष ध्यान (4 अप्रैल)

अभियान के आखिरी दिन ऐसे विद्यार्थियों की पहचान की जाएगी, जो कक्षोन्नति प्राप्त नहीं कर सके। उनके पालकों को समझाया जाएगा कि असफलता अंत नहीं है और लगातार प्रयास से बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है। साथ ही शाला प्रबंधन समिति (एसएमसी) की बैठक में नए सत्र की कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसमें शत-प्रतिशत नामांकन और ड्रॉपआउट दर कम करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

L. N. Bhargava