बजट 2026: निर्मला सीतारमण तोड़ेंगी 75 साल पुरानी बजट परंपरा, दिखेगी नए भारत की साफ तस्वीर
देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार यूनियन बजट पेश करते हुए एक बड़ी परंपरा तोड़ने जा रही हैं। आजादी के बाद से चली आ रही 75 साल पुरानी व्यवस्था में बदलाव आ रहा है। यह कदम देश के आर्थिक भविष्य की पूरी तस्वीर पेश करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बजट भाषण के पार्ट बी में बड़ा बदलाव
एनडीटीवी रिपोर्ट के मुताबिक, बजट भाषण के पार्ट बी में अब सिर्फ टैक्स और छोटी-मोटी नीतियां नहीं बताई जाएंगी। इसके बजाय, भारत के अल्पकालिक और दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति की स्पष्ट तस्वीर पेश की जाएगी। पहले पार्ट ए में मुख्य घोषणाएं, विकास योजनाएं और बड़े लक्ष्य शामिल होते थे, जबकि पार्ट बी सिर्फ टैक्स बदलाव और कुछ नीतिगत ऐलानों तक सीमित रहता था।
इस बदलाव का अर्थशास्त्रियों और बाजारों के लिए विशेष महत्व है, क्योंकि इससे देश की आर्थिक दिशा और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका अधिक स्पष्ट होगी। पार्ट बी में भारत की मौजूदा क्षमताओं, घरेलू मजबूतियों और आगे की संभावनाओं का विस्तार से जिक्र होगा। यह निवेशकों को भी अर्थव्यवस्था का एक स्पष्ट रोडमैप देगा।
निर्मला सीतारमण की पिछली पहल और अन्य उम्मीदें
यह लगातार 9वीं बार होगा जब निर्मला सीतारमण बजट पेश कर रही हैं। उन्होंने 2019 में अपना पहला बजट पेश करते हुए दशकों पुरानी लेदर ब्रीफकेस की जगह लाल कपड़े में लिपटा पारंपरिक बही-खाता इस्तेमाल कर एक और परंपरा तोड़ी थी। पिछले चार साल से बजट पूरी तरह पेपरलेस है और टैबलेट पर पेश किया जाता है, जो इस बार भी जारी रहेगा।
इस बजट में सरकार फिस्कल 2026 के लिए जीडीपी के 4.5 फीसदी से कम घाटे का लक्ष्य हासिल करने पर ध्यान केंद्रित करेगी। बाजार की नजर फिस्कल 2027 के लिए डेट-टू-जीडीपी कम करने की दिशा पर भी होगी। सरकार का इरादा कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) पर फोकस जारी रखने का है, जिसमें 10 से 15 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद है। यह इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देगा और अर्थव्यवस्था में गति लाएगा। इसके अतिरिक्त, फिस्कल 2027 के लिए नाममात्र जीडीपी ग्रोथ का अनुमान (संभावित रूप से 10.5 से 11 फीसदी) और पीएम ग्राम सड़क योजना, स्वास्थ्य एवं शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों के लिए आवंटन पर भी सबकी नजर रहेगी।
Janmejay Chaturvedi