नंदीग्राम उपचुनाव: ममता की प्रत्याशी ने नाम वापस लिया, कांग्रेस को समर्थन

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नंदीग्राम उपचुनाव: ममता की प्रत्याशी ने नाम वापस लिया, कांग्रेस को समर्थन

पश्चिम बंगाल उपचुनाव: नंदीग्राम में ममता गुट की प्रत्याशी ने नामांकन वापस लिया, कांग्रेस को समर्थन की घोषणा

उम्मीदवार की नाम वापसी और समर्थन की घोषणा

पश्चिम बंगाल में दो विधानसभा सीटों नंदीग्राम और रेजीनगर पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से 18 दिन पहले ममता बनर्जी के गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया। संचिता ने नाम वापसी से पहले पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। ममता बनर्जी ने 13 सितंबर को संचिता प्रधान डे को नंदीग्राम और रबीउल आलम चौधरी को रेजीनगर से उम्मीदवार घोषित किया था। नाम वापसी के तुरंत बाद ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि उनकी पार्टी अब नंदीग्राम सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देगी। रेजीनगर सीट पर रबीउल आलम चौधरी मैदान में बने रहेंगे। नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी, जबकि रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई। दोनों सीटों पर मतदान 6 अक्टूबर को होगा और परिणाम 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।

स्रोत में नाम वापसी की प्रक्रिया से संबंधित सात सवाल-जवाब भी शामिल हैं। इसके अनुसार नाम वापसी की समय-सीमा समाप्त होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर अंतिम उम्मीदवारों की सूची जारी करता है। एक बार वैध तरीके से नाम वापसी हो जाने के बाद उम्मीदवार अपना फैसला बदलकर फिर से चुनाव नहीं लड़ सकता। यदि एक सीट पर कई उम्मीदवार शेष रहते हैं तो सभी के नाम अंतिम सूची में शामिल होंगे और तय कार्यक्रम के अनुसार मतदान होगा। यदि केवल एक उम्मीदवार बचता है तो चुनाव निर्विरोध हो सकता है और रिटर्निंग ऑफिसर प्रक्रिया पूरी कर उसे निर्वाचित घोषित करता है। नाम वापसी की समय-सीमा समाप्त होने के बाद नए उम्मीदवार को उसी चुनाव में नामांकन दाखिल करने का मौका नहीं मिलता।

चुनाव आयोग का फैसला और नंदीग्राम का राजनीतिक इतिहास

चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी के गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चिह्न मिला है, जबकि दूसरे गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चिह्न दिया गया है। इससे एक दिन पहले आयोग ने दोनों गुटों को मूल नाम 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' और मूल चुनाव चिह्न 'फूल-घास' इस्तेमाल करने से रोक दिया था। यह अंतरिम व्यवस्था है और मूल नाम व चिह्न पर अंतिम फैसला अभी लंबित है। अब दोनों गुट उपचुनाव में नए पार्टी नाम और सिंबल से चुनाव लड़ेंगे।

नंदीग्राम लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक संघर्ष का प्रमुख केंद्र रहा है। 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस को 2011 में सत्ता तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से तत्कालीन प्रतिद्वंद्वी शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गईं। अधिकारी बाद में भाजपा में शामिल होकर तृणमूल के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी बन गए। 2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के साथ भवानीपुर सीट से भी चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीत दर्ज की। भवानीपुर में उन्होंने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों से हराया। अधिकारी को 73,917 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी को 58,812 वोट मिले। बाद में अधिकारी ने भवानीपुर सीट अपने पास रखी और नंदीग्राम से इस्तीफा दे दिया, जिससे यह सीट खाली हुई। 4 मई को आए 2021 के विधानसभा चुनाव परिणाम में नंदीग्राम से शुभेंदु अधिकारी को जीत मिली थी। तब भाजपा को 50.37% वोट मिले थे, तृणमूल कांग्रेस को 46.55% और कांग्रेस को केवल 0.31% वोट प्राप्त हुए थे।

Sharad Shrivastava