बात पते की.. मध्यप्रदेश की दतिया विधानसभा के उपचुनाव का ऐलान हो चुका है..यह केवल एक रिक्त सीट भरने की संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है,बल्कि यह प्रदेश की राजनीति की दिशा और प्रमुख दलों की संगठनात्मक क्षमता की भी परीक्षा बनने जा रहा है..30 जुलाई को होने वाले मतदान और 3 अगस्त 2026 को आने वाले परिणाम इस बात का संकेत देंगे कि 2023 के विधानसभा चुनाव का जनादेश एक क्षणिक राजनीतिक परिस्थितियों का परिणाम था या फिर मतदाता अब भी उसी सोच पर कायम हैं. दतिया सीट से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद खाली हुई..वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने तत्कालीन गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा को 7,742 मतों से हराया था..राजेंद्र भारती को 88,977 जबकि डॉ मिश्रा को 81,235 वोट मिले थे..लेकिन बैंक एफडी फर्जीवाड़े के लगभग 28 वर्ष पुराने मामले में दोषसिद्धि के बाद उनकी सदस्यता 2 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गई और अब एक बार फिर दतिया की जनता नए जनादेश के लिए तैयार है. भाजपा की ओर से डॉ.. नरोत्तम मिश्रा को सबसे मजबूत संभावित दावेदार माना जा रहा है..यदि पार्टी उन्हें मैदान में उतारती है तो यह चुनाव उनके राजनीतिक पुनर्वास का अवसर होगा..लगभग डेढ़ दशक तक दतिया की राजनीति पर प्रभाव रखने वाले डॉ नरोत्तम मिश्रा ने 2008, 2013 और 2018 में लगातार जीत दर्ज की थी..2023 की हार उनके लंबे राजनीतिक सफर का सबसे बड़ा झटका थी..ऐसे में यह उपचुनाव उनके लिए केवल एक सीट जीतने का नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता और जनविश्वास दोबारा स्थापित करने का अवसर भी है..पिछले कुछ महीनों में क्षेत्र में उनकी लगातार सक्रियता,जनता से संवाद,कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने के प्रयास और परिवार की सक्रिय भागीदारी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. हालांकि भाजपा के लिए यह चुनाव केवल डॉ नरोत्तम मिश्रा या जो भी संभावित उम्मीदवार हो उस तक सीमित नहीं है..मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में यह चौथा बड़ा विधानसभा का उपचुनाव होगा तो प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के एक साल बेमिसाल कार्यकाल के साथ ही पहला उपचुनाव..इस उपचुनाव में जहां सरकार के ढाई वर्ष के कामकाज का तो वहीं संगठन की कुशलता,रणनीति,नेतृत्व का भी अप्रत्यक्ष मूल्यांकन होगा..यदि परिणाम भाजपा के पक्ष में आएंगे तो तो यह संदेश होगा कि सरकार के विकास कार्यों और भाजपा संगठन की रणनीति पर जनता की मुहर लगी है..लेकिन यदि परिणाम उलट हुए तो विपक्ष को सरकार और भाजपा के खिलाफ के बड़ा मुदृदा मिलने से भी इनकार नहीं किया जा सकता..प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के लिए भी यह चुनाव संगठनात्मक नेतृत्व की पहली बड़ी परीक्षा होगा..टिकट चयन,स्थानीय गुटबाजी को नियंत्रित करना, कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना और बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना उनकी राजनीतिक क्षमता का पैमाना भी तय करेगा. दूसरी ओर कांग्रेस की स्थिति अपेक्षाकृत अधिक जटिल दिखाई देती है..पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती उम्मीदवार चयन की है..राजेंद्र भारती अपने पुत्र अनुज भारती के लिए टिकट की पैरवी कर रहे हैं..वे राहुल गांधी से लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव तक से मुलाकात कर अपने बेटे को मिलवा लाए हैं..खबरें तो दतिया से यह भी आ रहीं हैं कि यदि बेटे को टिकट नहीं मिला तो..वे वगावत करने से भी पीछे नहीं हटेंगे..वहीं 2023 में टिकट छोड़ने वाले अवधेश नायक स्वयं को स्वाभाविक दावेदार मान रहे हैं..पूर्व विधायक घनश्याम सिंह के समर्थक भी सक्रिय हैं..यदि टिकट वितरण में असंतोष पैदा होता है तो कांग्रेस को चुनाव शुरू होने से पहले ही अंदरूनी नुकसान उठाना पड़ सकता है..प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के लिए यह चुनाव नेतृत्व क्षमता साबित करने का अवसर होगा..यदि वे सभी दावेदारों को साथ लेकर एक मजबूत और सर्वस्वीकार्य उम्मीदवार उतारने में सफल होते हैं तो कांग्रेस मुकाबले में मजबूती से खड़ी रह सकती है..लेकिन टिकट को लेकर विवाद बढ़ा तो इसका सीधा लाभ भाजपा को मिल सकता है..नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के लिए भी यह चुनाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि विधानसभा के भीतर सरकार पर हमलावर रहने के साथ अब उन्हें संगठनात्मक स्तर पर भी विपक्ष की एकजुटता प्रदर्शित करनी होगी.. आजाद समाज पार्टी भी इस चुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी में है..दामोदर यादव पहले ही चुनावी अभियान शुरू कर चुके हैं..किसान सम्मेलनों और सामाजिक बैठकों के जरिए वे अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं..यदि वे यादव मतदाताओं और कांग्रेस-बसपा के परंपरागत वोटों में सेंध लगाने में सफल होते हैं तो मुकाबले का गणित पूरी तरह बदल सकता है.. भले ही जीत उनकी पहुंच से दूर दिखाई दे, लेकिन वे निर्णायक वोट काटने वाले उम्मीदवार साबित हो सकते हैं.. बॉक्स जातीय समीकरण..भी कर सकते उठापटक दतिया की चुनावी तस्वीर को जातीय समीकरण भी रोचक बना रहे हैं..क्षेत्र में लगभग 35 हजार कुशवाहा, 35 से 40 हजार ब्राह्मण, लगभग 20 हजार यादव, 10-10 हजार रावत,लोधी और वैश्य तथा करीब 8 हजार कायस्थ और 7 हजार सिंधी मतदाताओं के आंकड़े हैं..यदि मतदान जातीय आधार पर ध्रुवीकृत हुआ तो चुनाव पूरी तरह नए समीकरणों में प्रवेश कर सकता है..वहीं यदि विकास, नेतृत्व और स्थानीय संपर्क प्रमुख मुद्दे बने तो भाजपा को इसका सीधा लाभ भी मिलने से इनकार नहीं किया जा सकता है..क्योंकि दतिया का राजनीतिक इतिहास बताता है कि यहां मतदाता केवल लहर के आधार पर मतदान नहीं करते..साल 2018 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी थी..इसके बावजूद दतिया ने भाजपा के डॉ नरोत्तम मिश्रा पर भरोसा जताया था..वहीं 2023 में मतदाताओं ने बदलाव का फैसला किया..इससे स्पष्ट है कि यहां स्थानीय मुद्दे और प्रत्याशी की स्वीकार्यता भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं. यह उपचुनाव भाजपा और खासकर यदि उम्मीदवार बनते हैं तो डॉ नरोत्तम मिश्रा के लिए खोया हुआ गढ़ वापस पाने की चुनौती होगी, कांग्रेस के लिए अपनी 2023 की जीत को सही साबित करने की परीक्षा है और आजाद समाज पार्टी के लिए प्रदेश की राजनीति में प्रभाव बढ़ाने का अवसर..वहीं व्यक्तिगत स्तर पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की रणनीति और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की राजनीतिक समन्वय क्षमता का भी महत्वपूर्ण परीक्षण बनने जा रहा है..दतिया का फैसला केवल एक विधायक नहीं चुनेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि मध्यप्रदेश की राजनीति में आने वाले महीनों में मनोवैज्ञानिक बढ़त किस दल और किस नेतृत्व के पास रहेगी..क्योंकि इसके बाद सीधे नगरीय निकाय चुनाव भी हैं..तो यह संदेश वहां तक भी जाएगा तो 2028 में दतिया सीट का चुनाव परिणाम एक बड़ा मुदृदा भी बनकर सामने आएगा. बॉक्स डॉ नरोत्तम मिश्रा ही क्यों मजबूत दावेदार नरोत्तम मिश्रा की फोटो लगाएं.. साल 1990 में पहली बार डबरा से विधानसभा चुनाव लड़कर विधायक बने डॉ नरोत्तम मिश्रा को लेकर उस दौर में किसी ने शायद ही सोचा होगा कि कैसे यह भारतीय जानता युवा मोर्चा का प्रदेश कार्यसमिति सदस्य एक दिन प्रदेश के टॉप लीडर्स में से एक होगा..गृहमंत्री और कानून मंत्री बनेगा..मध्यप्रदेश के गृहमंत्री रहते पहला चुनाव ग्वालियर की डबरा विधानसभा से नरोत्तम मिश्रा ने लड़ा था और फिर 1998, 2003 यानि तीन बार यहां से विधायक चुने गए..डबरा सीट आरक्षित होने से..चौथा विधानसभा चुनाव 2008 में अपने गृह जिले से..दतिया विधानसभा सीट पर लड़े और जीते भी..इसके बाद से 2013,2018 में दतिया सीट नरोत्तम के लिए अजेय सीट रही..दतिया सीट पर लगातार तीन बार चुने जाने का रिकॉर्ड भी नरोत्तम मिश्रा के नाम पर है..लेकिन साल 2023 के चुनावों में उन्हें राजेंद्र भारती से हार का सामना करना पड़ा..ये उनके लिए सियासी तौर पर बड़ा झटका था..वैसे तो 2018 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी थी,लेकिन दतिया सीट की जानता का भरोसा अपने विधायक पर कायम रहा..इस चुनाव में भी राजेन्द्र भारती कांग्रेस से चुनाव लड़े और हारे..लगातार तीन बार हारने के बाद भारती 2023 में जीत सके..वैसे तो डॉ नरोत्तम मिश्रा के नाम क्षेत्र विकास को लेकर कई उपलब्धियां हैं..इसमें दतिया में मेडिकल कॉलेज खुलवाने,कृषि कॉलेज स्वीकृत कराने,हवाई पट्टी बनवाने,सड़कों का चौडीकरण करवाने के साथ नई-नई सरकारी बिल्डिंग निर्माण,लॉ और वेटनेरी कॉलेज खुलवाने..मां पीतांबरा लोक बनवाने जैसे कार्यों की एक लंबी सूची है..हालांकि भाजपा से कौन उम्मीदवार होगा..यह तस्वीर अधिकृत घोषणा होने के बाद ही साफ होगी. बॉक्स हेडिंग क्यों हों रहे दतिया में उपचुनाव राजेंद्र भारती का फोटो लगाएं.. एमपी में दतिया विधानसभा में उपचुनाव का एलान हो चुका है..दतिया विधानसभा उपचुनाव में 30 जुलाई 2026 को वोटिंग होगी तो 3 अगस्त को नतीजे..आएंगे..इसकी अधिसूचना 6 जुलाई को जारी होगी..राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म होने से यह सीट खाली हुई थी..साल 2023 का विस चुनाव मप्र के तत्कालीन गृहमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा..कांग्रेस के प्रत्याशी राजेंद्र भारती से 7,742 वोटों से चुनाव हारे थे..लेकिन अब डॉ नरोत्तम मिश्रा उपचुनाव के लिए सबसे मजबूत भाजपा के दावेदार हैं..यहां कांग्रेस की बात करें तो जिन चेहरों पर कांग्रेस दांव लगा सकती है..उनमें अवधेश नायक का नाम सबसे उपर है..क्योंकि बीते विस 2023 के चुनाव के पहले अवधेश नायक ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा था..और माना जा रहा था..अवधेश नायक ही कांग्रेस के उम्मीदवार होंगे..लेकिन राजेंद्र भारती को पार्टी ने वहां से चेहरा बनाया और वो चुनाव जीते भी लेकिन..बैंक एफडी फर्जीवाड़े से जुड़े एक मामले में 1 अप्रैल 2026 को दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने राजेन्द्र भारती को दोषी ठहराया..दोषसिद्धि के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया..2 अप्रैल 2026 को अदालत ने उन्हें 3 वर्ष के कारावास और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई..साथ ही उच्च न्यायालय में अपील करने के लिए सजा के क्रियान्वयन पर 60 दिन की मोहलत दी, लेकिन उनकी दोषसिद्धि बरकरार रही..मामला करीब 28 साल पुराना है..जिसमें बैंक धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप थे..इसी दिन यानि 2 अप्रैल को मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर 2 अप्रैल 2026 से प्रभावी उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी..साथ ही दतिया विधानसभा सीट रिक्त घोषित कर इसकी सूचना निर्वाचन आयोग को भेज दी. दतिया विस की खासियत मध्यप्रदेश की 230 विधानसभाओं में एक दतिया विधानसभा क्षेत्र है..शहर में मां पीताम्बर पीठ है, जो विश्वविख्यात है और देश विदेश तक भक्तों की आस्था का केंद्र है..तमाम फिल्मी कलाकार, राजनेता यहां विशेष पूजा-अर्चना के लिए आते हैं. महाकाल लोक की तरह मां पीतांबरा माई कॉरिडोर इसके साथ दतिया मेडिकल कॉलेज, एयरपोर्ट बड़ी उपलब्धि..एरई शुगर मिल की वजह से पूरे देश में गुड़ की मंडी बना दतिया क्षेत्र, मेडिकल, फ़िशरीज़ वर्बेटिम कॉलेज की वजह से उभरते एजुकेशन हब की पहचान बना हुआ है.. बॉक्स हेडिंग बीते 4 विस चुनावों की तस्वीर साल 2023 के विस चुनावों में दतिया की जनता ने डॉ नरोत्तम मिश्रा से किनारा किया और लंबे समय से चुनाव दर चुनाव हार रहे राजेंद्र भारती पर भरोसा जताया..इस चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी डॉ नरोत्तम मिश्रा को 81235 वोट मिले थे वहीं राजेंद्र भारती को 88977 वोट मिले थे..करीब 7,742 वोटों से डॉ नरोत्तम मिश्रा चुनाव हार गए थे. डॉ नरोत्तम मिश्रा को 2018 विस चुनावों में भी दतिया की जनता ने तीसरी बार जिताकर बीजेपी से विधायक चुना था..उन्हें इस चुनाव में 72,209 वोट मिले थे, जो कुल डाले गये मतों का 49%था..जबकि उनके प्रतिद्वंदी रहे कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को 69,553 मत हासिल हुए थे. इनका मत प्रतिशत 47.20% था. इस तरह इस चुनाव में नरोत्तम मिश्रा 2656 वोट के अंतर से एक बार फिर कांग्रेस प्रत्याशी भारती राजेंद्र को हरा कर विधायक चुने गए. 2013 का विधानसभा निर्वाचन दतिया के लिए ऐसा चुनाव था, जिसमें जीते और निकटतम प्रत्याशी के अतिरिक्त चुनाव लड़े अन्य सभी प्रत्याशियों की जमानत तक जब्त हो गई थी..मोदी लहर में जानता ने इस चुनाव में बीजेपी के प्रत्याशी नरोत्तम मिश्रा को लगातार दूसरी बार विधायक चुना था..उन्हें 2013 के विधानसभा चुनाव में 57,438 वोट मिले थे..वहीं उनके खिलाफ बसपा छोड़ कर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को जनता ने 45,357 वोट दिये थे..इसके चलते बीजेपी के जीते प्रत्याशी डॉ नरोत्तम मिश्रा ने इस चुनाव में कांग्रेस के भारती राजेंद्र को 11 हजार से ज्यादा वोट से हराया था. विधानसभा के लिए 2008 में हुए आम चुनाव में दतिया में पंद्रह वर्षों का वनवास काट चुकी भारतीय जानता पार्टी ने बतौर पार्टी प्रत्याशी दतिया विधानसभा सीट पर तत्कालीन डबरा विधायक और तत्कालीन राज्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट दिया था. दतिया की जानता ने भी भरोसा जताया और दतिया सीट पर पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़े मिश्रा को 34,489 वोट मिले. वहीं तत्कालीन विधायक और बसपा प्रत्याशी राजेंद्र भारती निकटम प्रतिद्वंदी रहे थे..उन्हें इन चुनाव में 23,256 मत हासिल हुए थे..इस चुनाव में जीत का अंतर 11233 वोट से था. बॉक्स सावन के पहले सोमवार को आएंगे उपचुनाव के नतीजे फोटो—शिवजी के साथ डॉ नरोत्तम मिश्रा की.. इसे इत्तेफाक कहें, संयोग मानें या आस्था से जुड़ा एक दिलचस्प घटनाक्रम? दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजे सावन के पहले सोमवार को आने हैं..राजनीतिक गलियारों में इसकी खास चर्चा इसलिए भी है क्योंकि कुछ समय पहले डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने दतिया में नवग्रह मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा कराई थी..उसके बाद वर्षों से लंबित विधानसभा दतिया के विधायक राजेंद्र भारती से जुड़ा मामले पर फैसला आया और और सीट रिक्त होने का रास्ता साफ हुआ..उस समय कई ज्योतिषाचार्यों और विद्वानों ने इसे नवग्रह प्रतिष्ठा के शुभ फल से जोड़कर देखा था..अब पहले सावन सोमवार को मतगणना की तारीख ने इस चर्चा को फिर हवा दे दी है..और माना ये जा रहा है कि सावन की शुरूआती दिन में ही मतदान होना है..यानि 30 जुलाई को श्रवण मास का आगाज हो जाएगा..हालांकि, धर्म सनातन संस्कृति के मामलों में हमेशा आगे रहने वाले..शिवभक्त डॉ. नरोत्तम मिश्रा अभी भाजपा के केवल संभावित दावेदार हैं, अधिकृत उम्मीदवार नहीं..ऐसे में इसे महज संयोग या समय का कोई रोचक मेल ही कहा जाएगा.
नरोत्तम का 'उत्तम' समय तो कांग्रेस की 'अग्निपरीक्षा'? बात पते की महेंद्र विश्वकर्मा (दतिया उपचुनाव तय करेगा कई नेताओं का सियासी भविष्य)(सावन के पहले सोमवार को आएंगे दतिया उपचुनाव के नतीजे)