पेंच नेशनल पार्क को मिलेगा बायो स्फीयर रिजर्व का दर्जा: यूनेस्को भेजेंगे प्रस्ताव
अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत संरक्षण की ओर अग्रसर पेंच
सिवनी जिले के प्रसिद्ध पेंच टाइगर रिजर्व को जल्द ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'बायोस्फीयर रिजर्व' का विशेष दर्जा प्राप्त हो सकता है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की हालिया बैठक में पेंच, कान्हा और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व को यूनेस्को के "मेन एंड बायोस्फीयर" (MAB) कार्यक्रम के तहत नामांकित करने पर चर्चा हुई। राज्य सरकार की ओर से तैयार प्रस्ताव शीघ्र ही केंद्र के माध्यम से यूनेस्को को भेजा जाएगा, जिससे कान्हा-बांधवगढ़ के साथ पेंच को भी <अंतरराष्ट्रीय पहचान> मिलेगी और <जैव विविधता संरक्षण> मजबूत होगा।
समृद्ध जैव विविधता वाला 1179 वर्ग किमी क्षेत्र
पेंच टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल (कोर और बफर मिलाकर) लगभग 1179 वर्ग किलोमीटर है। एप्को (EPCO) द्वारा तैयार रिपोर्ट के अनुसार, यह क्षेत्र दुर्लभ वनस्पतियों, वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न है। बायोस्फीयर रिजर्व का दर्जा मिलने से पेंच को न केवल वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान और पर्यावरणीय अध्ययन के लिए अंतरराष्ट्रीय बजट व संसाधनों का लाभ भी प्राप्त होगा।
तीन स्तरों पर होगा पर्यावरण का संरक्षण
बायोस्फीयर रिजर्व के तहत क्षेत्र को कोर और बफर जोन में विभाजित कर संरक्षण को और अधिक कड़ा किया जाएगा। कोर एरिया में मानवीय गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगी, जबकि बफर क्षेत्र में नियंत्रित और टिकाऊ विकास कार्यों को अनुमति दी जाएगी। डिप्टी डायरेक्टर पुनीत गोयल ने बताया कि इस दर्जे के मिलने से दुर्लभ प्रजातियों की सुरक्षा बेहतर होगी और क्षेत्र में इको-टूरिज्म के साथ-साथ संरक्षण की नई राहें खुलेंगी।
स्थानीय रोजगार और संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा
डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि यूनेस्को की इस सूची में शामिल होने का सीधा लाभ स्थानीय समुदाय को मिलेगा। इससे क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और स्थानीय निवासियों की पारंपरिक जीवनशैली व संस्कृति को वैश्विक मंच पर संरक्षण प्राप्त होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बायोस्फीयर रिजर्व घोषित होने के बाद पेंच दुनिया भर के पर्यावरण प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा।
Ravi Yadav