प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम बदला, अब होगा सेवा तीर्थ
केंद्र सरकार ने राजधानी दिल्ली में स्थित प्रमुख शासकीय इमारतों के नाम बदलते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय सचिवालय और राजभवनों को नए नाम देने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि यह कदम सत्ता केंद्रित सोच से सेवा भाव की ओर सांस्कृतिक बदलाव का प्रतीक है।
PMO अब सेवा तीर्थ, सचिवालय कर्तव्य भवन
सरकारी सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री कार्यालय का आधिकारिक नाम अब सेवा तीर्थ कर दिया गया है। यह कार्यालय 78 साल पुराने साउथ ब्लॉक से निकलकर सेवा तीर्थ नाम के आधुनिक और उन्नत कैंपस में शिफ्ट किया जाएगा। यह बदलाव सेंट्रल विस्टा री डेवलपमेंट प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा है।
इसी क्रम में केंद्रीय सचिवालय को भी नया नाम दिया गया है। अब इसे कर्तव्य भवन के नाम से जाना जाएगा। सरकार का मानना है कि यह नाम सार्वजनिक सेवा, जिम्मेदारी और कर्तव्यबोध को बेहतर तरीके से दर्शाता है।
राजभवन का नाम अब लोक भवन
देशभर में राज्यपालों के आधिकारिक आवास और कार्यालय, जिन्हें अब तक राजभवन कहा जाता था, उनका नाम बदलकर लोक भवन किया जा रहा है। गृह मंत्रालय ने बताया कि पिछले वर्ष राज्यपालों के सम्मेलन में इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई थी।
मंत्रालय के अनुसार राजभवन शब्द औपनिवेशिक मानसिकता और राजशाही की सोच को प्रतिबिंबित करता है, जबकि लोक भवन और लोक निवास जैसे नाम जनता केंद्रित लोकतांत्रिक भावना को व्यक्त करते हैं। इसलिए राज्यपालों और उप-राज्यपालों के कार्यालयों और आवासों को क्रमशः लोक भवन और लोक निवास कहा जाएगा।
पहले भी बदले गए कई प्रमुख नाम
इससे पहले भी केंद्र सरकार ने दिल्ली के कई प्रतिष्ठित स्थलों के नाम बदले हैं। राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक जाने वाले राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ रखा गया था। प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास, जिसे पहले रेस कोर्स रोड के नाम से जाना जाता था, 2016 में लोक कल्याण मार्ग नाम दिया गया।
सरकार का कहना है कि इन नाम परिवर्तनों का उद्देश्य औपनिवेशिक विरासत से जुड़ी प्रतीकात्मकता को कम करना और सार्वजनिक संस्थानों को जनकल्याण, सेवा और कर्तव्य से जोड़ना है।
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत बड़े बदलाव
दिल्ली के सत्ता केंद्र में हो रहे ये बदलाव सेंट्रल विस्टा री डेवलपमेंट प्रोजेक्ट से जुड़े हैं। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक के पूरे क्षेत्र को पुनर्विकसित किया जा रहा है। इसमें नया संसद भवन, विभिन्न मंत्रालयों के लिए साझा केंद्रीय सचिवालय, प्रधानमंत्री आवास और उपराष्ट्रपति आवास जैसी इमारतों का निर्माण शामिल है।
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की घोषणा सितंबर 2019 में हुई थी और 10 दिसंबर 2020 को प्रधानमंत्री ने इसकी आधारशिला रखी थी। पूरे प्रोजेक्ट के लिए लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। कर्तव्य पथ के दोनों ओर का इलाका ही सेंट्रल विस्टा कहलाता है।
नए PMO कैंपस सेवा तीर्थ की विशेष भूमिका
नए PMO कैंपस को सेवा तीर्थ नाम दिया गया है, जहां से प्रधानमंत्री और उनका कार्यालय काम करेगा। बताया गया है कि यह अत्याधुनिक सुविधाओं वाला परिसर होगा, जिसमें सुरक्षा, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्रशासनिक जरूरतों का विशेष ध्यान रखा गया है।
14 अक्टूबर को कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन सेवा तीर्थ-2 में तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर चुके हैं, जिससे संकेत मिलता है कि नया परिसर धीरे-धीरे सक्रिय उपयोग में आ रहा है।
गृह मंत्रालय और अन्य मंत्रालयों का शिफ्ट
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत मंत्रालयों के दफ्तरों को भी पुनर्व्यवस्थित किया जा रहा है। गृह मंत्रालय, जो लगभग 90 साल से नॉर्थ ब्लॉक से संचालित हो रहा था, अब जनपथ स्थित कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (सीसीएस) बिल्डिंग में शिफ्ट किया जा रहा है। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
योजना के मुताबिक कर्तव्य पथ के किनारे 10 ऑफिस बिल्डिंग और एक कन्वेंशन सेंटर सहित विस्तृत कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट बनाया जा रहा है, जिसमें सभी मंत्रालयों के दफ्तर एक ही कॉम्प्लेक्स में होंगे। इनमें से तीन इमारतों का निर्माण काफी हद तक पूरा हो चुका है।
नॉर्थ और साउथ ब्लॉक बनेंगे राष्ट्रीय संग्रहालय
जब सभी मंत्रालय नई इमारतों में शिफ्ट हो जाएंगे, तब नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक को युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय में बदलने की योजना है। यह संग्रहालय भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सभ्यतागत विरासत को प्रदर्शित करेगा।
योजना के अनुसार इस संग्रहालय में लगभग 25 से 30 हजार कलाकृतियां प्रदर्शित की जाएंगी, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े संग्रहालयों में शामिल हो सकता है। इससे एक ओर ऐतिहासिक इमारतों का संरक्षण होगा, वहीं दूसरी ओर आम जनता के लिए इन तक पहुंच आसान बन सकेगी।
किराये का बोझ कम करने की मंशा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर में कर्तव्य पथ पर कर्तव्य भवन-03 के उद्घाटन समारोह में बताया था कि बीते वर्षों में कई मंत्रालय किराये की इमारतों में काम कर रहे हैं और सरकार को हर साल लगभग 1500 करोड़ रुपये किराये के रूप में खर्च करने पड़ते हैं।
उन्होंने कहा था कि नए कर्तव्य भवन और कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट बनने से यह आर्थिक बोझ कम होगा, मंत्रालय एक ही कॉम्प्लेक्स में बेहतर समन्वय के साथ काम कर सकेंगे और नीति निर्माण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और सुगम होगी।
निष्कर्ष: प्रतीकात्मक बदलाव के साथ संरचनात्मक पुनर्गठन
कुल मिलाकर प्रधानमंत्री कार्यालय को सेवा तीर्थ, केंद्रीय सचिवालय को कर्तव्य भवन और राजभवनों को लोक भवन नाम देने का निर्णय केवल नाम परिवर्तन तक सीमित नहीं है। यह प्रशासनिक ढांचे के बड़े पुनर्गठन, औपनिवेशिक प्रतीकों से दूरी और सेवा व जनकेंद्रित शासन की अवधारणा को मजबूत करने की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा है। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत नए आवास, दफ्तर, संग्रहालय और सार्वजनिक स्थल विकसित होकर आने वाले वर्षों में दिल्ली के सत्ता केंद्र का स्वरूप पूरी तरह बदल देंगे।
Gulzar Ahmad