पाक अधिकृत कश्मीर में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, स्थिति गंभीर
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गए हैं। हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं, जिससे हालात बेकाबू हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा शहबाज शरीफ सरकार की नीतियों और वादों को लेकर भड़का हुआ है। इस उग्र विरोध के चलते पाकिस्तानी सरकार ने PoK में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं और इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह से बंद कर दिया है।
प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं?
प्रदर्शन का नेतृत्व संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी कर रही है। प्रदर्शनकारी प्रशासनिक सुधारों की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले 70 सालों से उनके बुनियादी अधिकारों को नजरअंदाज किया गया है। कमेटी ने 38-सूत्रीय चार्टर जारी किया है जिसमें मंगला हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट से सस्ती बिजली उपलब्ध कराने और कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को समाप्त करने जैसी मांगें शामिल हैं।
हिंसा और सुरक्षा बलों की तैनाती
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुजफ्फराबाद में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। पुलिस की गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई और 22 से अधिक लोग घायल हो गए। इस घटना ने प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और बढ़ा दिया। लोग सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।
इस्लामाबाद ने हालात को काबू में करने के लिए PoK में भारी हथियारों से लैस गश्ती दल तैनात किए हैं। पड़ोसी पंजाब प्रांत से हजारों सैनिक हटाकर PoK भेजे गए हैं। इसके अलावा, राजधानी इस्लामाबाद से भी 1000 अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया है।
इंटरनेट सेवाएं बंद और फ्लैग मार्च
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए PoK में इंटरनेट सेवाओं पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके साथ ही, कई कस्बों और शहरों में सुरक्षा बलों ने फ्लैग मार्च किया है। पाकिस्तानी न्यूज चैनलों पर वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ और अराजकता देखी जा सकती है।
नेताओं का बयान
संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के प्रमुख शौकत नवाज मीर ने कहा, "हमारा आंदोलन किसी संस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह बुनियादी अधिकारों की लड़ाई है। पिछले 70 सालों में हमें हमारे अधिकार नहीं दिए गए। अब बहुत हो गया... या तो हमें हमारे हक दो या जनता के गुस्से का सामना करो।"
आवश्यक सुधारों की मांग
प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि प्रशासनिक सुधार किए जाएं और पुराने वादों को पूरा किया जाए। साथ ही, PoK के लोगों को उनके अधिकार दिए जाएं। अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते सभी दुकानें और परिवहन सेवाएं पूरी तरह से ठप हैं।
स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें भी इस इलाके पर टिक गई हैं। पाकिस्तान सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है।